दलहन आत्मनिर्भरता मिशन | 09 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के लिये रोडमैप मध्य प्रदेश के सीहोर ज़िले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (FLRP) में अंतिम रूप दिया गया।
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन क्या है?
- दलहन आत्मनिर्भरता मिशन: केंद्रीय बजट 2025–26 में इसकी घोषणा की गई थी और इसे अक्तूबर 2025 में लॉन्च किया गया। यह केंद्र-प्रायोजित योजना है, जिसकी योजना लागत ₹11,440 करोड़ है और इसका उद्देश्य वर्ष 2025–26 से 2030–31 तक दलहन आत्मनिर्भरता को हासिल करना है।
- केंद्रित फसलें: इस मिशन में अरहर, उड़द और मसूर पर विशेष ध्यान दिया गया है, जो दैनिक उपभोग के लिये महत्त्वपूर्ण हैं, लेकिन वर्तमान में इनकी उत्पादन में कमी देखने को मिल रही है।
- आवश्यकता:
- पोषण सुरक्षा: दलहन एक “पोषण का पावरहाउस” हैं, जो भारतीय आहार में कुल प्रोटीन का 20–25% प्रदान करती हैं।
- हालाँकि प्रति व्यक्ति खपत सिफारिश की गई 85 ग्राम प्रतिदिन से कम है, जिससे प्रोटीन-ऊर्जा कुपोषण और बढ़ जाता है।
- आयात पर निर्भरता: यद्यपि घरेलू उत्पादन में 31% (वर्ष 2013-14 में 192.6 लाख टन से वर्ष 2024-25 में 252.38 लाख टन) वृद्धि हुई, भारत ने वर्ष 2023-24 में मांग पूरी करने के लिये 47.38 लाख टन दलहन आयात किया।
- आयात को कम करना विदेशी मुद्रा की बचत और किसानों को अंतर्राष्ट्रीय मूल्य अस्थिरता से सुरक्षा प्रदान करने के लिये महत्त्वपूर्ण है।
- पोषण सुरक्षा: दलहन एक “पोषण का पावरहाउस” हैं, जो भारतीय आहार में कुल प्रोटीन का 20–25% प्रदान करती हैं।
- मुख्य उद्देश्य और लक्ष्य: इस मिशन का उद्देश्य दलहन की कृषि को अतिरिक्त 35 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाना है, जिससे कुल क्षेत्रफल 310 लाख हेक्टेयर तक पहुँच सके और वर्ष 2030–31 तक उत्पादन 350 लाख टन तक बढ़ सके।
- यह मिशन आयात में कमी, उपज सुधार, जलवायु-सहिष्णु कृषि प्रथाओं को बढ़ावा, किसानों की आय में वृद्धि और दीर्घकालिक पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करता है।
- परिचालन रणनीति:
- SATHI पोर्टल (बीज प्रमाणीकरण, पता लगाने की क्षमता और समग्र सूची): यह एक केंद्रीकृत पोर्टल है, जिसे कृषि मंत्रालय और NIC ने विकसित किया है, जो बीज के पूरे जीवनचक्र को स्वचालित करता है।
- SATHI पोर्टल बीज के उत्पादन से लेकर प्रमाणन, लाइसेंसिंग और बिक्री तक की ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करता है, जिससे किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीजों तक पहुँच सुनिश्चित होती है।
- सुनिश्चित खरीद: अगले चार वर्षों के लिये भाग लेने वाले राज्यों में अरहर, उड़द और मसूर की 100% खरीद सुनिश्चित की जाएगी।
- राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) जैसी एजेंसियाँ इसे प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के तहत नेतृत्व देंगी, ताकि न्यायसंगत मूल्य सुनिश्चित किये जा सकें तथा बाज़ार की अनिश्चितता को कम किया जा सके।
- क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण: हस्तक्षेप क्लस्टर मॉडल के अनुसार किये जाएंगे, ताकि भौगोलिक विविधीकरण और संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके।
- SATHI पोर्टल (बीज प्रमाणीकरण, पता लगाने की क्षमता और समग्र सूची): यह एक केंद्रीकृत पोर्टल है, जिसे कृषि मंत्रालय और NIC ने विकसित किया है, जो बीज के पूरे जीवनचक्र को स्वचालित करता है।
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के लिये रोडमैप के प्रमुख बिंदु:
- देश भर में 1,000 दलहन मिलें स्थापित करने का लक्ष्य है (जिसमें से 55 मध्य प्रदेश में) क्लस्टर मॉडल के तहत, प्रत्येक इकाई पर सरकारी सब्सिडी ₹25 लाख देकर स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्द्धन को प्रोत्साहित किया जाएगा।
- क्लस्टरों में शामिल होने वाले किसानों को सीड किट्स और मॉडल फार्मिंग के लिये प्रति हेक्टेयर ₹10,000 तक सहायता प्रदान की जाएगी।
दलहन आत्मनिर्भरता के लिये नीति आयोग की सिफारिशें
- वन ब्लॉक–वन सीड विलेज: क्लस्टर आधारित सीड हब और कृषक-उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से दलहन सीड सिस्टम को सशक्त बनाने की सिफारिश की गई।
- धान की बंजर भूमि: धान की कटाई के बाद बंजर भूमि का उपयोग दलहन कृषि के लिये करने की सिफारिश की गई।
- आहार समावेशन: जन कल्याण कार्यक्रमों, जैसे– PDS और मिड-डे मील में दलहन को शामिल करके मांग बढ़ाने और कुपोषण दूर करने का सुझाव दिया गया।
- प्रौद्योगिकी: जलवायु-अनुकूल, अल्पावधि किस्मों को बढ़ावा देने और डेटा-आधारित निगरानी के लिये SATHI पोर्टल का उपयोग करने की सिफारिश की गई।
दलहन से संबंधित प्रमुख तथ्य क्या हैं?
- परिचय: दलहन फलीदार पौधों के खाद्य बीज हैं, जिन्हें केवल उनके सूखे अनाज के लिये संगृहीत किया जाता है, ये लेग्युमिनोसी परिवार से संबंधित हैं।
- दलहन में प्रोटीन, फाइबर और पोषक तत्त्वों की मात्रा उच्च, जबकि इसमें वसा की मात्रा कम होती है, नाइट्रोजन-संयोजक फसल के रूप में ये मृदा उर्वरता को बढ़ाती हैं, सूखने पर इनकी भंडारण क्षमता दीर्घकालिक होती है।
- जलवायु आवश्यकताएँ: दलहन के लिये तापमान 20–27°C, वार्षिक वर्षा 25–60 सेमी. और इसके लिये रेतीली–दोमट मृदा अनुकूल मृदा होती है। इसकी वर्ष भर कृषि की जाती है।
- खरीफ: अरहर, उड़द (ब्लैकग्राम), मूंग (ग्रीनग्राम), लोबिया (काउपी), कुलथी (हॉर्सग्राम) और मोथ।
- रबी: चना, मसूर, मटर, लैथिरस और राजमा।
- ग्रीष्मकाल: मूंग, उड़द और काउपी।
- वैश्विक और राष्ट्रीय स्थिति: भारत विश्व का सबसे बड़ा दलहन उत्पादक और उपभोक्ता है, जो विश्व उत्पादन में लगभग 25% योगदान देता है।
- हालाँकि, भारत में दलहन का कुल अनाज उत्पादन में भाग वर्ष 1950 में 16% से घटकर वर्ष 2022–23 में लगभग 8% रह गया, जो दीर्घकालीन अनाज-केंद्रित नीति का संकेत है।
- मुख्य दलहन उत्पादन क्षेत्र: मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, झारखंड, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल।
- अध्ययन दर्शाते हैं कि वर्ष 2050 तक भारत की दालों की मांग लगभग 39 मिलियन टन होगी, जिसके लिये वार्षिक उत्पादन वृद्धि 2.2% आवश्यक है।
- कृषि-विज्ञान एवं पर्यावरणीय लाभ: दलहन फसलें नाइट्रोजन स्थिरीकरण के माध्यम से मृदा उर्वरता में सुधार करती हैं, मृदा की जैवविविधता को बढ़ाती हैं तथा अंतरफसली प्रणालियों को समर्थन देती हैं, जिससे वे पर्यावरणीय रूप से स्थायी बनती हैं।
- इन्हें एक निम्न-कार्बन फसल माना जाता है, जो जलवायु-अनुकूल कृषि तथा शाकाहारी एवं पादप-आधारित आहारों की ओर बढ़ते रुझान के साथ संरेखित हैं।
दलहन उत्पादन प्रोत्साहन हेतु भारत की प्रमुख पहल
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. दलहन आत्मनिर्भरता मिशन क्या है?
यह एक केंद्र-प्रायोजित योजना है, जिसे अक्तूबर 2025 में ₹11,440 करोड़ के बजट के साथ शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य वर्ष 2025-26 से 2030-31 के दौरान दलहन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है।
2. मिशन के तहत किन दलहन को प्राथमिकता दी गई है?
मिशन में अरहर, उड़द और मसूर को प्राथमिकता दी गई है, क्योंकि इन दलहन का उत्पादन लगातार कम है और इनकी मांग/खपत अधिक बनी हुई है।
3. मिशन के तहत उत्पादन लक्ष्य क्या हैं?
दलहन के क्षेत्र का विस्तार 310 लाख हेक्टेयर तक और उत्पादन 350 लाख टन तक वर्ष 2030-31 तक करने का लक्ष्य है।
4. मिशन में गारंटीकृत खरीद की भूमिका क्या है?
अरहर, उड़द और मसूर की 100% खरीद PM-AASHA के तहत NAFED और NCCF द्वारा की जाएगी, ताकि दामों में स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स
प्रश्न. भारत में दालों के उत्पादन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2020)
- उड़द की खेती खरीफ और रबी दोनों फसलों में की जा सकती है।
- कुल दाल उत्पादन का लगभग आधा भाग केवल मूंग का होता है।
- पिछले तीन दशकों में जहाँ खरीफ दालों का उत्पादन बढ़ा है, वहीं रबी दालों का उत्पादन घटा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 2
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a)
