मकर संक्रांति 2026 | 15 Jan 2026

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

मकर संक्रांति भारत का एक प्रमुख फसल उत्सव है, जो प्रतिवर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता है। देश के अलग-अलग राज्यों में इसे स्थानीय परंपराओं, विशिष्ट रीति-रिवाज़ों और विविध नामों के साथ हर्षोल्लास से मनाया जाता है।

  • सौर और खगोलीय आधार: अधिकांश हिंदू त्योहारों के विपरीत यह सौर कैलेंडर के अनुसार लगभग 14 जनवरी को मनाया जाता है, जो सूर्य के मकर राशि में उत्तरायण की यात्रा का प्रतीक है।
    • यह शीत ऋतु से उष्ण महीनों की ओर परिवर्तन को दर्शाता है और निष्क्रियता के अंत का प्रतीक है।
  • कृषि एवं मौसमी महत्त्व: यह मुख्यतः एक फसल उत्सव है, जो शीत ऋतु के अंत और नए कृषि-चक्र की शुरुआत का संकेत देता है तथा प्रकृति की प्रचुरता के प्रति कृतज्ञता को प्रोत्साहित करता है।
  • क्षेत्रीय विविधता: इसे अलग-अलग नामों और रीति-रिवाज़ों से मनाया जाता है:
    • तमिलनाडु में पोंगल: चार दिनों तक मनाया जाने वाला उत्सव, जिसमें कोलम सजावट की जाती है।
    • पंजाब में लोहड़ी: अलाव जलाना और सामूहिक गीत-संगीत।
    • असम में माघ बिहू: भोज, मेजी अलाव (बाँस और घास का अलाव) और सामुदायिक भोजन।
    • बिहार में खिचड़ी: चावल और दाल से बना पारंपरिक व्यंजन।
    • गुजरात और राजस्थान में पतंगबाज़ी: विशेष रूप से अहमदाबाद का अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव
  • सामाजिक एकजुटता का संदेश: तिल–गुड़ जैसी मिठाइयों के आदान-प्रदान की परंपरा सौहार्द, साझा भावना और सामुदायिक एकजुटता को बढ़ावा देती है, जिससे सामाजिक सद्भाव सुदृढ़ होता है।

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