LIGO-भारत की पहली ग्रेविटेशनल वेव ऑब्जर्वेटरी | 11 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
महाराष्ट्र के हिंगोली ज़िले में भारत की महत्वाकांक्षी लेज़र इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल वेव ऑब्जर्वेटरी (LIGO-India) परियोजना कार्यान्वयन विलंब का सामना कर रही है, जिससे वर्ष 2030 तक इसके पूरा होने के आधिकारिक आश्वासनों के बावजूद इसकी समय-सीमा को लेकर चिंताएँ व्यक्त की गई हैं।
LIGO-India परियोजना क्या है?
- परिचय: LIGO-India भारत की पहली प्रमुख ग्रेविटेशनल वेव ऑब्जर्वेटरी है। यह परियोजना वैश्विक ग्रेविटेशनल-वेव डिटेक्शन नेटवर्क में देश के महत्त्वपूर्ण योगदान को दर्शाती है।
- भारतीय ऑब्जर्वेटरी में एक उन्नत लीगो-शैली (LIGO-style) का इंटरफेरोमीटर होगा, जिससे यह अमेरिका के हनफोर्ड और लिविंगस्टन स्थित केंद्रों, इटली के विर्गो (Virgo) और जापान के काग्रा (KAGRA) के साथ वैश्विक नेटवर्क का 5वाँ नोड बन जाएगा।
- प्रमुख एजेंसियाँ और सहयोग: इस परियोजना का संयुक्त नेतृत्व परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) कर रहे हैं। इसमें यूएस LIGO लेबोरेटरी (US LIGO Lab) और इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (IUCAA), पुणे जैसे प्रमुख भारतीय संस्थानों का भी महत्त्वपूर्ण योगदान शामिल है।
- वैज्ञानिक उद्देश्य: एक "मेगा-साइंस" प्रोजेक्ट के रूप में इसका लक्ष्य स्काई कवरेज़ को बढ़ाना, स्रोत स्थानीयकरण (विशेष रूप से दक्षिणी गोलार्द्ध में) में सुधार करना और अंतर्राष्ट्रीय गुरुत्वाकर्षण-तरंग नेटवर्क के लिये डिटेक्शन सेंसिटिविटी को बढ़ावा देना है।
- तकनीकी विनिर्देश: LIGO ऑब्जर्वेटरी में 90-डिग्री के कोण पर बनी दो 4-किमी लंबी भुजाएँ होती हैं। इनके अंत में परावर्तक दर्पणों के साथ वैक्यूम चैम्बर होते हैं। लेज़र किरणों को इन दर्पणों से परावर्तित किया जाता है और गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाने के लिये उपयोग किया जाता है।
- ऐतिहासिक उपलब्धि: ऐसी पहली तरंग का पता वर्ष 2015 में चला था, जो 1.3 अरब प्रकाश-वर्ष दूर दो ब्लैक होल के विलय के कारण उत्पन्न हुई थी।
गुरुत्वाकर्षण तरंगें क्या हैं?
- परिचय: गुरुत्वाकर्षण तरंगें दिक्-काल (spacetime) में उत्पन्न होने वाली वे तरंगें हैं, जो विशाल वस्तुओं के त्वरण के कारण होती हैं। इनकी भविष्यवाणी सर्वप्रथम वर्ष 1915 में आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत द्वारा की गई थी। ये आधुनिक भौतिकी में एक क्रांतिकारी परिघटना है, जो वैज्ञानिकों को उन ब्रह्मांडीय घटनाओं का निरीक्षण करने की अनुमति देती हैं जिन्हें पारंपरिक दूरबीनें नहीं देख सकतीं।
- प्रसार की विशेषताएँ: ये तरंगें प्रकाश की गति से यात्रा करती हैं और अपने स्रोतों से ऊर्जा को दूर ले जाती हैं। ये अंतरिक्ष-समय (और इसके भीतर मौजूद किसी भी पदार्थ) को एक विशिष्ट क्वाड्रुपोलर पैटर्न (quadrupolar pattern) में खींचती और सिकोड़ती हैं (एक साथ दो खिंचाव और दो दबाव, एक-दूसरे के समकोण पर)।
- विद्युत चुंबकीय तरंगों से भिन्नता: विद्युत चुंबकीय तरंगों (प्रकाश, रेडियो, एक्स-रे, आदि) के विपरीत, गुरुत्वाकर्षण तरंगें विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम का हिस्सा नहीं हैं। ये दोलनशील आवेशों के बजाय गुरुत्वाकर्षण क्षेत्रों में परिवर्तन से उत्पन्न होती हैं।
- प्राथमिक स्रोत: अत्यंत शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण तरंगों के स्रोतों में शामिल हैं:
- ब्लैक होल या न्यूट्रॉन स्टार के बाइनरी सिस्टम का इनवार्ड स्पाइरल और आपस में विलय।
- कोर-कोलेप्स सुपरनोवा।
- ब्रह्मांडीय परिघटनाएँ।
- डिटेक्शन में आने वाली चुनौती: पृथ्वी तक पहुँचने तक, ये तरंगें अत्यंत कमज़ोर हो जाती हैं — आमतौर पर किलोमीटर-पैमाने की दूरी पर लगभग 10⁻²¹ का आंशिक लंबाई परिवर्तन उत्पन्न करती हैं। इसके सटीक डिटेक्शन के लिये LIGO जैसे अत्यधिक संवेदनशील उपकरणों की आवश्यकता होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. LIGO-भारत परियोजना क्या है?
LIGO-भारत एक ग्रेविटेशनल वेव ऑब्जर्वेटरी है, जो महाराष्ट्र के हिंगोली में स्थापित होने की योजना है। यह वैश्विक LIGO नेटवर्क का पाँचवाँ नोड बनेगी और कॉस्मिक गुरुत्वीय तरंगों का पता लगाने में मदद करेगी।
2. गुरुत्वीय तरंगें क्या हैं?
गुरुत्वीय तरंगें स्पेसटाइम में उत्पन्न होने वाली तरंगें या लहरें हैं, जो तेज़ी से गति करने वाली भारी वस्तुओं के कारण बनती हैं। इन्हें अल्बर्ट आइंस्टीन की सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत (1916) में पूर्वानुमानित किया गया था।
3. LIGO गुरुत्वीय तरंगों का पता कैसे लगाता है?
LIGO गुरुत्वीय तरंगों के कारण उत्पन्न होने वाले अत्यंत सूक्ष्म स्पेसटाइम विकृतियों का पता लगाने के लिये लेजर इंटरफेरोमेट्री तकनीक का उपयोग करता है, जिसमें दो एक-दूसरे के लंबवत 4-किमी लंबी भुजाएँ होती हैं।
4. गुरुत्वीय तरंगों के मुख्य स्रोत क्या हैं?
मुख्य स्रोतों में ब्लैक होल का विलय, न्युट्रॉन स्टार का टकराव और कोर-कॉलैप्स सुपरनोवा शामिल हैं, जो शक्तिशाली स्पेसटाइम तरंगें उत्पन्न करते हैं।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. हाल ही में वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से अरबों प्रकाश वर्ष दूर विशालकाय 'ब्लैक होलों' के विलय का प्रेक्षण किया। इस प्रेक्षण का क्या महत्त्व है? (2019)
(a) 'हिग्स बोसॉन कणों' का अभिज्ञान हुआ।
(b) 'गुरुत्वीय तरंगों' का अभिज्ञान हुआ।
(c) 'वाॅर्महोल' से होते हुए से अंतरा-मंदाकिनीय अंतरिक्ष यात्रा की संभावना की पुष्टि की हुई।
(d) इसने वैज्ञानिकों को 'विलक्षणता (सिंगुलैरिटी)' को समझना सुकर बनाया।
उत्तर: (b)
प्रश्न: 'विकसित लेज़र इंटरफेरोमीटर' अंतरिक्ष एंटीना (eLISA)' परियोजना का उद्देश्य क्या है? (2017)
(a) न्यूट्रिनो का पता लगाने के लिये
(b) गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाने के लिये
(c) मिसाइल रक्षा की प्रभावशीलता का पता लगाने के लिये प्रणाली
(d) सौर फ्लेयर्स के प्रभाव का अध्ययन करने के लिये संचार प्रणाली
उत्तर: (b)
