किसान क्रेडिट कार्ड योजना | 14 Mar 2026
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना को संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना (MISS) का समर्थन प्राप्त है, जिसका लक्ष्य किसानों और संबंधित क्षेत्रों को समय पर सस्ती दरों पर और बिना किसी गारंटी के संस्थागत ऋण उपलब्ध कराना है। इस पहल से कृषि उत्पादकता को बढ़ावा देने और किसानों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
- KCC की शुरुआत: वर्ष 1998 में शुरू की गई KCC योजना किसानों को फसल की बुवाई/रुपाई तथा कटाई के बाद की आवश्यकताओं और संबंधित गतिविधियों के लिये अल्पकालिक संस्थागत ऋण प्रदान करती है।
- ऋण को किफायती बनाने के लिये सरकार ने वर्ष 2006-07 में मॉडिफाइड इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम (MISS) शुरू की, जिसमें रियायती ब्याज दरें और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सहायता प्रदान की जाती है।
- संशोधित KCC (2020) योजना वाणिज्यिक, क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंकों के माध्यम से डिजिटल पेमेंट और फ्लेक्सिबल विड्रॉल के साथ RuPay-सक्षम कार्ड के माध्यम से एकीकृत, सिंगल-विंडो क्रेडिट प्रदान करती है।
- पात्र लाभार्थी: KCC के अंतर्गत व्यक्तिगत किसान और संयुक्त उधारकर्त्ता जो मालिक-कृषक हैं, किराएदार किसान, मौखिक पट्टेदार और बटाईदार, इसके अतिरिक्त इस योजना में स्वयं सहायता समूह (SHG) और संयुक्त देयता समूह (JLG) भी शामिल हैं, ताकि संस्थागत ऋण तक समावेशी पहुँच को बढ़ावा दिया जा सके।
- KCC और MISS के तहत ऋण (2025-26): किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत फसल ऋण की सीमा को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, मत्स्य पालन और संबद्ध गतिविधियों के लिये भी ऋण सीमा को 5 लाख रुपये तक बढ़ाया गया है।
- गैर-गारंटीकृत ऋणों की सीमा बढ़ाकर प्रति उधारकर्त्ता 2 लाख रुपये कर दी गई है। इसके अतिरिक्त, 3 लाख रुपये तक के अल्पकालिक फसल ऋण 7% ब्याज दर पर उपलब्ध हैं, जिसमें 3% की सब्सिडी (MISS के तहत) शामिल है, जिससे प्रभावी ब्याज दर 4% हो जाती है।
- यह 5 साल तक के लिये रिवॉल्विंग क्रेडिट दान करता है, जिससे किसान आवश्यकतानुसार धनराशि निकाल सकते हैं। साथ ही, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान ब्याज में राहत दी जाती है (1 वर्ष तक कोई ब्याज नहीं, जो गंभीर आपदाओं की स्थिति में 5 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है)।
- किसान ऑनबोर्डिंग और डिजिटल सुधार: पीएम-किसान डेटा और किसान ऋण पोर्टल (2023) के साथ एक सरलीकृत KCC एप्लिकेशन कृषि ऋण वितरण में तेज़ी से ऋण प्रसंस्करण और बेहतर पारदर्शिता को सक्षम बनाती है।
- KCC का पैमाना और प्रभाव: वर्तमान में 7.72 करोड़ से अधिक KCC सक्रिय हैं, जिनके तहत 10.2 लाख करोड़ रुपये का ऋण बकाया है। 457 बैंकों के सहयोग से संचालित यह योजना व्यापक संस्थागत पहुँच और कृषि के साथ-साथ पशुपालन व मत्स्य पालन जैसे संबद्ध क्षेत्रों तक ऋण की उपलब्धता के विस्तार को दर्शाती है।
- सरकारी पहल: सरकार ने विभिन्न पहलों के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की पहुँच को बढ़ाया है। इन पहलों में जागरूकता अभियान, आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत राष्ट्रीय स्तर पर चलाया गया 'KCC सैचुरेशन ड्राइव' और RuPay-सक्षम KCC कार्ड की शुरुआत शामिल हैं। ये सभी कदम डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने, वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने और किसानों तक संस्थागत कृषि ऋण की व्यापक पहुँच को मज़बूत करने में सहायक हैं।
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