जल महोत्सव 2026 | 09 Mar 2026

स्रोत: पीआईबी 

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के अवसर पर, जिसे ‘सुजलाम शक्ति दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है, गुजरात से पूरे देश में जल महोत्सव 2026 अभियान का शुभारंभ किया।

जल महोत्सव 2026

  • परिचय: यह केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के जल जीवन मिशन और पेयजल और स्वच्छता विभाग द्वारा संचालित एक मुख्य अभियान है, जिसे प्रत्येक वर्ष 8 मार्च से 22 मार्च तक मनाया जाता है। इसकी टैगलाइन है: ‘गाँव का उत्सव, देश का महोत्सव  (Village's festival, nation's festival)’
    • इसका उद्देश्य ग्रामीण पेयजल प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी को सशक्त बनाना और जल जीवन मिशन (JJM) के तहत जल संरक्षण को प्रोत्साहन प्रदान करना है।
  • मुख्य कार्यक्रम:
    • जल अर्पण दिवस: इस दिवस का शुभारंभ ग्रामीण पेयजल संसाधनों को ग्राम पंचायतों (GP) और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को औपचारिक रूप से सौंपने की एक समारोहपूर्वक प्रक्रिया से किया गया।
    • जल बंधन और जल संकल्प: जल बंधन (पेयजल अवसंरचना स्थलों पर पवित्र धागे बाँधना) और जल संकल्प (जल संरक्षण के लिये प्रतिज्ञा) जैसी गतिविधियाँ आयोजित की गईं, ताकि ग्राम जल प्रणालियों की सुरक्षा और रख-रखाव में सामुदायिक सामूहिक प्रतिबद्धता को पुनः पुष्टि की जा सके।
  • बहु-स्तरीय क्रियान्वयन: जल महोत्सव को चार स्तरों राष्ट्रीय, राज्य, ज़िला और ग्राम पंचायत पर संरचित किया गया है, ताकि समन्वित और प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।
    • ग्राम पंचायत स्तर पर गतिविधियों में शामिल हैं: ‘हर घर जल’ घोषणाएँ, ‘जल चौपाल’ संवाद, स्कूलों में जल गुणवत्ता परीक्षण प्रदर्शन और ‘लोक जल उत्सव’ कैलेंडर की तैयारी।
  • महिलाएँ केंद्र में (सुसजल शक्ति): इस अभियान ने जल प्रबंधन में महिलाओं की परिवर्तनकारी भूमिका को उजागर किया। उदाहरण के लिये, 24 लाख से अधिक महिलाएँ फील्ड टेस्टिंग किट्स (FTK) का उपयोग करके जल गुणवत्ता परीक्षण में सक्रिय रूप से शामिल हैं।
    • इस अभियान ने महिला पंप ऑपरेटरों, स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्याओं और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC) के सदस्यों के नेतृत्व को भी मान्यता प्रदान की, यह मानते हुए कि नल के पानी तक पहुँच ने पानी लाने के भार को कम किया है।
    • कन्वर्जेंस और विज़न: यह अभियान इंटर-मिनिस्ट्रियल कन्वर्जेंस (मंत्रालयों के बीच संविलयन) को बढ़ावा देता है और ‘सुसजल ग्राम’ (जल-संपन्न गाँवों) की दिशा में एक राष्ट्रीय स्तर की आंदोलन बनाने का लक्ष्य रखता है, जो सीधे ‘विकसित भारत (Developed India) के व्यापक दृष्टिकोण में योगदान देता है।

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