अंतर्राष्ट्रीय बांध सुरक्षा सम्मेलन (ICDS) 2026 | 17 Feb 2026

स्रोत: पीआईबी 

चर्चा में क्यों? 

बंगलूरू में अंतर्राष्ट्रीय बांध सुरक्षा सम्मेलन (ICDS) 2026 सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जो भारत के बांध सुरक्षा पारिस्थितिक तंत्र को सुदृढ़ करने के लिये एक महत्त्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करता है।

ICDS 2026 के मुख्य बिंदु क्या हैं?

  • बांध सुरक्षा ढाँचा: सम्मेलन ने भारत के बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 और बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (DRIP) के कार्यान्वयन पर बल दिया।
  • अवसाद प्रबंधन: जलाशयों में अवसाद के जमाव को जल सुरक्षा के लिये एक बड़े खतरे के रूप में पहचाना गया, जो जलग्रहण क्षेत्र के उपचार और रिमोट सेंसिंग जैसे निवारक उपायों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
    • विशेषज्ञों ने भारत के बांध पोर्टफोलियो में सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देने के लिये 'जोखिम स्क्रीनिंग' और 'डैम ब्रेक असिसमेंट' जैसे उपकरणों की सिफारिश की।
  • बाढ़ प्रबंधन: बाढ़ और सूखे के प्रबंधन के लिये 'डायनेमिक रूल कर्व्स' और रियल टाइम डेटा शेयरिंग का उपयोग करते हुए पूर्वानुमान-आधारित और बेसिन-स्तर पर समन्वित जलाशय संचालन के महत्त्व पर बल दिया गया।
  • आपातकालीन तैयारी: सम्मेलन ने सामुदायिक तैयारी और संस्थागत प्रतिक्रिया को बढ़ाने के लिये आपातकालीन कार्ययोजनाओं (EAP), फ्लडप्लेन ज़ोनिंग और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को सुदृढ़ करने पर बल दिया।

अंतर्राष्ट्रीय बांध सुरक्षा सम्मेलन (ICDS) 2026

  • ICDS 2026, DRIP के चरण II एवं III के तहत आयोजित शृंखला का दूसरा कार्यक्रम है, जिसका पहला आयोजन वर्ष 2023 में जयपुर में हुआ था।
  • इसका आयोजन संयुक्त रूप से कर्नाटक सरकार, जल शक्ति मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग (CWC), IISc बंगलूरू और विश्व बैंक द्वारा किया गया था।

बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना क्या है?

  • DRIP: यह जल शक्ति मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है, जिसे भारत में बांधों की संरचनात्मक सुरक्षा और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिये डिज़ाइन किया गया है।  
    • विश्व बैंक और एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक (AIIB) द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। DRIP के प्रत्येक चरण को 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर की बाहरी सहायता प्राप्त होती है।
  • आवश्यकता: भारत बड़े बांधों की संख्या में (चीन और अमेरिका के बाद) विश्व में तीसरे स्थान पर है, जिसके पास 6628 बांधों का पोर्टफोलियो है (निर्दिष्ट बांधों के राष्ट्रीय रजिस्टर, 2025)।
    • इस पुरानी अवसंरचना की सुरक्षा और परिचालन दक्षता सुनिश्चित करना जल सुरक्षा के लिये महत्त्वपूर्ण है, जिससे DRIP आवश्यक हो जाता है।
  • उद्देश्य:
    • सुरक्षा सुधार: चयनित मौजूदा बांधों और उनसे जुड़े उपकरणों की सुरक्षा तथा संचालन क्षमता को सतत तरीके से सुधारना।
    • संस्थागत सशक्तीकरण: प्रतिभागी राज्यों और केंद्रीय स्तर पर बांध सुरक्षा संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करना।
    • राजस्व सृजन: बांधों के सतत संचालन और रखरखाव के लिये असंगत/सहायक राजस्व सृजन के अवसरों का अन्वेषण करना।
  • वित्तपोषण पैटर्न: इस योजना का वित्तपोषण इस प्रकार है: विशेष श्रेणी वाले राज्य– 80:20, सामान्य श्रेणी वाले राज्य– 70:30, केंद्रीय एजेंसियाँ– 50:50।
    • इस योजना में विशेष श्रेणी वाले राज्यों (मणिपुर, मेघालय और उत्तराखंड) के लिये ऋण राशि का 90% केंद्रीय अनुदान देने की भी व्यवस्था है।
  • चरण: 
    • चरण I (2012–21): 7 राज्यों में 223 बांधों के लिये पुनर्वास कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिससे बुनियादी सुरक्षा प्रोटोकॉल और दिशानिर्देश स्थापित हुए।
    • चरण II एवं III (2021–31): वर्तमान में चल रहे ये चरण 19 राज्यों में 736 बांधों को लक्षित करते हैं, जिसमें जलवायु सहनशीलता, उन्नत निगरानी और सतत राजस्व सृजन पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है।

बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021

  • यह अधिनियम बड़े बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बांध विफलता आपदाओं को रोकने के लिये निरीक्षण, निगरानी, संचालन और रखरखाव का एक व्यापक ढाँचा स्थापित करता है।
  • बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 चार स्तरों की संस्थागत व्यवस्था का प्रावधान करता है: केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति (NCDS) और राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) की स्थापना, राज्य स्तर पर राज्य बांध सुरक्षा समिति तथा राज्य बांध सुरक्षा संगठन की स्थापना।
  • अधिनियम के तहत, बांधों के स्वामी बांधों के सुरक्षित निर्माण, संचालन और रखरखाव के लिये ज़िम्मेदार हैं। उन्हें नियमित निरीक्षण हेतु बांध सुरक्षा इकाइयाँ स्थापित करनी होंगी, विशेष रूप से मानसून एवं आपदाओं के दौरान। इसके अलावा आपातकालीन कार्ययोजना, जोखिम मूल्यांकन एवं विशेषज्ञ सुरक्षा मूल्यांकन तैयार करना आवश्यक है ताकि बांधों की विफलताओं को रोका जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (DRIP) का उद्देश्य क्या है?
DRIP का उद्देश्य भारत में बांधों की संरचनात्मक सुरक्षा, संचालन की दक्षता और संस्थागत क्षमता को बढ़ाना है, जिसे विश्व बैंक और AIIB के सहयोग से लागू किया जा रहा है।

2. भारत के लिये जलाशय तलछट क्यों चिंता का विषय है?
तलछट से जलाशय की भंडारण क्षमता घटती है, बांध की दक्षता कमज़ोर होती है और दीर्घकालिक जल सुरक्षा तथा बाढ़ नियंत्रण पर खतरा उत्पन्न होता है।

3. बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के तहत कौन-सा संस्थागत ढाँचा स्थापित किया गया है?
इसमें राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण और केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय समिति, साथ ही राज्य बांध सुरक्षा संगठन तथा राज्य समितियाँ स्थापित की गई हैं।

4. ICDS 2026 भारत में बांध सुरक्षा में कैसे योगदान देता है?
यह तलछट प्रबंधन, बाढ़ पूर्वानुमान, जोखिम मूल्यांकन और आपातकालीन तैयारी में सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देता है, जिससे बांध सुरक्षा मज़बूत होती है।

5. भारत की जल सुरक्षा के लिये DRIP क्यों महत्त्वपूर्ण है?
6,600 से अधिक बड़े बांधों के साथ DRIP यह सुनिश्चित करता है कि पुराने बुनियादी ढाँचे का सुरक्षित संचालन और जलवायु सहनशीलता बनी रहे, जो सिंचाई, विद्युत और पीने के पानी के लिये महत्त्वपूर्ण है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)

प्रिलिम्स

प्रश्न. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये: (2022)

जलाशय

राज्य

1. घाटप्रभा

तेलंगाना

2. गांधी सागर

मध्य प्रदेश

3. इंदिरा सागर 

आंध्र प्रदेश

4. मैथोन

छत्तीसगढ़

उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित नहीं  हैं?

  1. केवल एक युग्म 
  2. केवल दो युग्म
  3. केवल तीन युग्म 
  4. सभी चारों युग्म

उत्तर: C


प्रश्न. टिहरी जलविद्युत परिसर निम्नलिखित में से किस नदी पर स्थित है? (2008)

(a) अलकनंदा

(b) भागीरथी

(c) धौलीगंगा

(d) मंदाकिनी

उत्तर: (b)


मेन्स

प्रश्न. मान लीजिये कि भारत सरकार एक ऐसी पर्वतीय घाटी में एक बांध का निर्माण करने की सोच रही है, जो जंगलों से घिरी है और यहाँ नृजातीय समुदाय रहते हैं। अप्रत्याशित आकस्मिकताओं से निपटने के लिये सरकार को कौन-सी तर्कसंगत नीति का सहारा लेना चाहिये? (2018)