INSV कौंडिन्य ओमान पहुँची | 24 Jan 2026

स्रोत: पीआई बी

INSV कौंडिन्य ने गुजरात के पोरबंदर से अपनी प्रथम समुद्री यात्रा पूर्ण करने के पश्चात ओमान की राजधानी मस्कट स्थित पोर्ट सुल्तान काबूस पहुँचा। यह घटनाक्रम भारत और ओमान के मध्य साझा समुद्री विरासत को रेखांकित करता है।

  • इस अभियान के दौरान फ्राँस की उपग्रह सेवा प्रदाता कंपनी यूटेलसैट ने अपने वनवेब सैटलाइट कौंसटेलेशन के माध्यम से INSV कौंडिन्य दल को उच्च-गति उपग्रह संपर्क उपलब्ध कराया। 

INSV कौंडिन्य

  • परिचय: INSV कौंडिन्य भारत का पहला सिले हुए पाल वाले से निर्मित से जहाज़ है, जिसका निर्माण प्राचीन टंकाई (Tankai) जहाज़-निर्माण पद्धति से किया गया है। इसका उद्देश्य लगभग 2000 वर्ष पुरानी इस स्वदेशी एवं विस्मृत तकनीक को पुनर्जीवित करना है। 
    • टंकाई (Tankai) जहाज़-निर्माण पद्धति: यह एक प्राचीन जहाज़-निर्माण तकनीक है, जिसमें लकड़ी के तख्तों को नारियल रेशे (Coir) की रस्सियों से सिला जाता है तथा लोहे की कीलों जैसे मेटल फास्टनरों का प्रयोग नहीं किया जाता। यह पद्धति जहाज़ों को लोचशीलता एवं जंग-प्रतिरोधी बनती है।
      • जलरोधकता के लिये कोयर, डैमर रेज़िन और पशु वसा जैसी देशज सामग्रियों का प्रयोग किया जाता है।
      • इस पद्धति में जहाज़ का बाहरी ढाँचा पहले तैयार किया जाता है और उसके बाद भीतर का ढाँचा जोड़ा जाता है। यह पद्धति पश्चिमी जहाज़-निर्माण से भिन्न है, जहाँ पहले अंदर का फ्रेम बनाया जाता है और बाद में बाहरी परत जोड़ी जाती है।
  • डिज़ाइन एवं प्रेरणा: जहाज़ का डिज़ाइन 5वीं शताब्दी की अजंता गुफा चित्रकला में चित्रित नौकाओं पर आधारित है। इसकी संरचना को राजा भोज (9वीं शताब्दी ई.) द्वारा रचित संस्कृत ग्रंथ ‘युक्तिकल्पतरु’ तथा विदेशी यात्रियों के विवरणों से प्रेरणा मिली है।
    • इसमें गंडभेरुंड (कदंब वंश का द्विमुखी गरुड़ प्रतीक), सूर्य-चिह्न, सिंह-याली (पौराणिक सिंह) तथा हड़प्पाकालीन शैली का पाषाण लंगर जैसे प्रतीकात्मक अलंकरण सम्मिलित हैं।
  • ऐतिहासिक महत्त्व: इस जहाज़ का नाम कौंडिन्य पर रखा गया है, जो प्रथम शताब्दी के एक प्रसिद्ध भारतीय समुद्री यात्री माने जाते हैं। कौंडिन्य को मेकांग डेल्टा तक समुद्री यात्रा करने तथा फुनान साम्राज्य (आधुनिक कंबोडिया) की सह-स्थापना का श्रेय दिया जाता है, जिसे दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रारंभिक भारतीयीकृत राज्यों में से एक माना जाता है।

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