भारत का पहला पांडुलिपि मानचित्रण अभियान | 17 Mar 2026
संस्कृति मंत्रालय ने भारत की पांडुलिपि विरासत का मानचित्रण करने के लिये अपनी तरह का पहला तीन माह का राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण शुरू किया है।
- इस अभ्यास का उद्देश्य भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत का डिजिटलीकरण करके बौद्धिक चोरी (Intellectual Piracy) पर अंकुश लगाना है, जिसमें लगभग 1 करोड़ पांडुलिपियों का विश्व का सबसे बड़ा संग्रह शामिल है।
पांडुलिपि मानचित्र सर्वेक्षण
- परिचय: यह सर्वेक्षण देश भर में पांडुलिपियों का पता लगाने और एक समेकित राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के लिये ज़िला स्तर से उच्च स्तर पर आयोजित किया जाएगा।
- एकत्र किये गए डेटा को ज्ञान भारतम मिशन के तहत एक राष्ट्रीय डिजिटल भंडार में संकलित किया जाएगा।
- उद्देश्य: इस पहल का उद्देश्य भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत को संरक्षित, डिजिटाइज़ करना और उसे बढ़ावा देना है, जिससे अनुसंधान के लिये पहुँच में वृद्धि हो और सांस्कृतिक ज्ञान की रक्षा हो सके।
- प्रौद्योगिकी का उपयोग: संस्थानों, संग्रहों और व्यक्तिगत संरक्षकों से प्राप्त पांडुलिपियों को संरक्षण और डिजिटलीकरण आवश्यकताओं के लिये जियोटैग किया जाएगा।
- सर्वेक्षण दल विवरण अपलोड करने के लिये ज्ञान भारतम ऐप का उपयोग करेंगे, जिसके बाद उन्हें व्यापक रूप से सुलभ बनाने के लिये मानकीकृत करते हुए डिजिटलीकरण किया जाएगा।
- नीतिगत संपर्क: यह पहल नई दिल्ली घोषणा (ज्ञान भारतम सम्मेलन) के अनुरूप है और भारत की संस्कृति, साहित्य और चेतना को प्रदर्शित करने के दृष्टिकोण का समर्थन करती है।
- कार्यान्वयन ढाँचा: सर्वेक्षण मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य-स्तरीय समितियों और ज़िलाधिकारी की अध्यक्षता वाली ज़िला-स्तरीय समितियों के माध्यम से आयोजित किया जाएगा।
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