भारत रणनीतिक तेल भंडार जारी करने की IEA की पहल में नहीं होगा शामिल | 10 Mar 2026
भारत ने मध्य पूर्व के बढ़ते संघर्ष के कारण अस्थिर हुए वैश्विक तेल बाज़ारों को नियंत्रित करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) द्वारा प्रस्तावित रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) जारी करने की पहल में शामिल न होने का निर्णय लिया है।
- पृष्ठभूमि: प्रमुख उत्पादकों द्वारा आपूर्ति में कटौती और ईरान पर अमेरिका-इज़रायल युद्ध के कारण शिपिंग में व्यवधान की आशंकाओं के चलते कच्चे तेल की कीमतें 119 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुँच गईं।
- तर्क: सरकार 'भारत प्रथम' नीति के तहत तर्क देती है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना बाज़ार हस्तक्षेप से अधिक महत्त्वपूर्ण है। भारत का रणनीतिक भंडार केवल घरेलू आपूर्ति में वास्तविक व्यवधानों से सुरक्षा के लिये है, न कि वैश्विक कीमतों की अस्थिरता को नियंत्रित करने के साधन के रूप में।
- IEA की सदस्यता स्थिति: भारत अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का एक सहयोगी सदस्य है, न कि पूर्ण सदस्य। इस सदस्यता स्थिति के कारण एजेंसी द्वारा समन्वित स्टॉक रिलीज़ (भंडार जारी करने) के आह्वान का पालन करने के लिये भारत बाध्यकारी रूप से प्रतिबद्ध नहीं है।
- पूर्व भागीदारी: यह 2021 की उस पहल से अलग है, जब भारत ने अमेरिका के नेतृत्व में अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) से लगभग 5 मिलियन बैरल तेल जारी करके वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को स्थिर करने में सहयोग किया था।
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार
- परिचय: SPR आपातकालीन कच्चे तेल के भंडार हैं जिन्हें सरकारें पेट्रोलियम आपूर्ति में व्यवधान को कम करने के लिये बनाए रखती हैं। IEA के सदस्य देशों को तेल का ऐसा भंडार रखना अनिवार्य है, जो नेट आयात के कम-से-कम 90 दिनों के बराबर हो।
- भारत के विशेष पेट्रोलियम भंडार (SPR) का प्रबंधन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन भारतीय रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार लिमिटेड (ISPRL) द्वारा किया जाता है ।
- वर्तमान SPR क्षमता: भारत, जो विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है, के पास वर्तमान में लगभग 5.33 मिलियन टन की रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण (SPR) क्षमता है। ये भंडार केवल 80 प्रतिशत ही भरे हुए हैं।
- भारत के परिचालन रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) विशाखापत्तनम (1.33 MMT), मंगलुरु (1.5 MMT) और पाडुर (2.5 MMT) में स्थित 3 भूमिगत रॉक कैवर्न (चट्टानी गुफा) स्थलों पर स्थित हैं, जो लगभग 9.5 दिनों की कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं।
- सरकार ने SPR विस्तार को मंज़ूरी दे दी है, जिसमें पाडुर (कर्नाटक) में 2.5 MMT और चंडीखोल (ओडिशा) में 4 MMT की सुविधा जोड़ना शामिल है। भविष्य के स्थलों, जैसे– बीकानेर (सॉल्ट कैवर्न/नमक की गुफा), मंगलुरु, राजकोट या बीना (मध्य प्रदेश) पर योजना बनाई जा रही है।
- कुल ऊर्जा बफर: रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPRs) तेल कंपनियों द्वारा रखे गए वाणिज्यिक इन्वेंट्री (commercial inventories) के पूरक के रूप में कार्य करते हैं। वर्तमान में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का संयुक्त भंडार (जिसमें रिफाइनरियों, बंदरगाहों और फ्लोटिंग स्टोरेज का स्टॉक शामिल है) भारत के लिये लगभग 74 दिनों का कुल बफर प्रदान करता है।
|
और पढ़ें: भारत के लिये IEA की पूर्ण सदस्यता |