भारत-जापान CEPA बैठक | 07 Mar 2026
भारत–जापान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) के तहत सातवीं संयुक्त समिति की बैठक टोक्यो में आयोजित की गई, जिसमें समझौते के क्रियान्वयन से संबंधित मुद्दों की समीक्षा और द्विपक्षीय आर्थिक सहभागिता बढ़ाने पर चर्चा की गई।
- चर्चाओं में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश, व्यापारिक माहौल में सुधार और कैमरून के याउंडे में होने वाले विश्व व्यापार संगठन (WTO) के आगामी 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (मार्च 2026) की तैयारियों सहित व्यापक मुद्दों को शामिल किया गया।
भारत-जापान CEPA
- परिचय: भारत-जापान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA), जो अगस्त 2011 में लागू हुआ था, एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय व्यापार समझौता है। इसके अंतर्गत वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, प्राकृतिक व्यक्तियों की आवाजाही (पेशेवरों का आना-जाना), निवेश, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), सीमा शुल्क प्रक्रियाएँ और व्यापार से जुड़े अन्य महत्त्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।
- शुल्क उन्मूलन: इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच व्यापार होने वाले 94% से अधिक वस्तुओं पर 10 वर्षों की अवधि में कस्टम ड्यूटी समाप्त करने का प्रावधान है।
भारत-जापान आर्थिक संबंध
- द्विपक्षीय व्यापार का आयतन: वर्ष 2023–24 में कुल व्यापार लगभग USD 22.85 बिलियन था। जापान से भारत के लिये निर्यात USD 17.69 बिलियन और भारत से जापान हेतु निर्यात USD 5.15 बिलियन था, जिससे भारत के लिये व्यापक व्यापार घाटा दर्शाया गया।
- व्यापार हिस्सेदारी रैंकिंग: भारत जापान के कुल व्यापार में 18वें स्थान पर है (1.4% हिस्सेदारी), जबकि जापान भारत के कुल व्यापार (2.1% हिस्सेदारी) में 17वें स्थान पर है।
- FDI प्रवाह: वर्ष 2000 से दिसंबर 2024 तक भारत में जापानी FDI का संचयी आँकड़ा लगभग USD 43.2 बिलियन है, जिससे जापान भारत में FDI के लिये 5वाँ सबसे बड़ा स्रोत देश बन गया है।
- जापानी FDI का क्षेत्रीय वितरण: जापानी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) मुख्यतः ऑटोमोबाइल, विद्युत उपकरण, दूरसंचार, रसायन, वित्तीय सेवाएँ (बीमा) और फार्मास्यूटिकल्स में केंद्रित है।
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