भारत ने क्वांटम प्रौद्योगिकी में प्रगति की | 29 Nov 2025
चर्चा में क्यों?
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने IIT बॉम्बे की क्वांटम अनुसंधान प्रयोगशालाओं का दौरा किया तथा संस्थान की नई लिक्विड हीलियम सुविधा का उद्घाटन किया, जो भारत के क्वांटम विज्ञान, क्रायोजेनिक्स और उन्नत सामग्रियों के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
भारत के क्वांटम अनुसंधान में प्रमुख प्रगति क्या है?
- लिक्विड हीलियम सुविधा: यह अत्यंत निम्न तापमान क्वांटम कंप्यूटिंग के लिये स्वदेशी डाइल्यूशन प्रशीतन इकाइयों की नींव रखती है और भारत की क्रायोजेनिक्स, अतिचालकता, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेंसिंग, फोटॉनिक्स, स्वास्थ्य सेवा (जैसे MRI) तथा हरित ऊर्जा में क्षमताओं को बढ़ाती है।
- क्वांटम कंप्यूटिंग अत्यंत निम्न तापमान (–272°C से नीचे) पर चलने वाले डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर पर निर्भर करती है और लिक्विड हीलियम सुविधा स्वदेशी इकाइयों को संभव बनाती है, जो भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिये महत्त्वपूर्ण है।
- हीलियम अपने निम्न क्वथनांक (-268.93°C) पर लिक्विड हीलियम में परिवर्तित होता है, जिससे अतिचालकता, सुपरफ्लुइडिटी और क्वांटम कंप्यूटिंग के लिये आवश्यक क्रायोजेनिक परिस्थितियाँ बनती हैं जो क्वांटम अनुसंधान हेतु अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।
- QMagPI (पोर्टेबल मैग्नेटोमीटर): QMagPI भारत का पहला पोर्टेबल मैग्नेटोमीटर है, जो अल्ट्रा-लो नैनोटेस्ला (nT) के चुंबकीय क्षेत्रों को मापता है। यह रक्षा, सामरिक क्षेत्रों, खनिज अन्वेषण और अनुसंधान के लिये उपयोगी है, जिससे भारत इस तकनीक वाले कुछ चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है।
- क्वांटम डायमंड माइक्रोस्कोप (QDM): IIT बॉम्बे द्वारा विकसित भारत का पहला स्वदेशी QDM नैनोस्केल 3D मैग्नेटिक फील्ड इमेजिंग की सुविधा प्रदान करता है। AI/ML एकीकरण के साथ यह न्यूरोसाइंस, सामग्री अनुसंधान और नेक्स्ट-जेनरेशन चिप टेस्टिंग को आगे बढ़ाता है, जिससे भारत की तकनीकी नेतृत्व क्षमता मज़बूत होती है।
- क्यू-कॉन्फोकल प्रणाली: क्यू-कॉन्फोकल प्रणाली, एक स्वदेशी रूप से विकसित कॉन्फोकल माइक्रोस्कोप है, जो रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज़ (ROS) जैसी अंतःकोशिकीय परिवर्तनों का पता लगाता है, जिससे कैंसर के प्रारंभिक चरण में निदान में सहायता मिलती है।
- कॉन्फोकल माइक्रोस्कोप एक उन्नत ऑप्टिकल उपकरण है, जो पिनहोल का उपयोग करके फोकस से बाहर की रोशनी को रोकता है, जिससे अधिक स्पष्टता और बेहतर कंट्रास्ट वाले तीव्र, उच्च-रिज़ॉल्यूशन चित्र प्राप्त होते हैं।
क्वांटम प्रौद्योगिकी क्या है?
- परिचय: क्वांटम प्रौद्योगिकी उन उन्नत तकनीकों के समूह को संदर्भित करती है जो क्वांटम यांत्रिकी के विशिष्ट सिद्धांतों जैसे सुपरपोज़िशन, एंटैंगलमेंट और क्वांटम टनलिंग का उपयोग करती हैं, ताकि ऐसे कार्य किये जा सकें जो पारंपरिक तकनीकों से असंभव या अत्यंत अलाभकारी हों।
- मुख्य सिद्धांत:
- सुपरपोज़िशन (Superposition): क्वांटम पार्टिकल (जैसे इलेक्ट्रॉन या फोटॉन) मापे जाने तक एक साथ अनेक अवस्थाओं में मौजूद रह सकते हैं।
- एंटैंगलमेंट (Entanglement): दो या अधिक क्वांटम पार्टिकल आपस में इस तरह से जुड़े हो सकते हैं कि एक पार्टिकल की अवस्था तुरंत दूसरे को प्रभावित करती है, भले ही वे दूरी पर हों।
- क्वांटम टनलिंग और कोहेरेंस (Quantum Tunneling & Coherence): पार्टिकल ऊर्जा अवरोधों को पार कर सकते हैं और अपनी सूक्ष्म क्वांटम अवस्था को बनाए रख सकते हैं, जिससे अत्यंत सटीक गणना एवं संवेदन संभव हो पाता है।
- परंपरागत बनाम क्वांटम कंप्यूटिंग: परंपरागत कंप्यूटिंग में सूचना को ‘बिट्स’ या ‘1’ और ‘0’ में प्रोसेस किया जाता है, यह प्रणाली चिरसम्मत भौतिकी का अनुसरण करती है।
- इसके विपरीत, क्वांटम कंप्यूटर क्यूबिट्स (क्वांटम बिट्स) का उपयोग करते हैं, जो परमाणु-स्तर के क्वांटम व्यवहार और प्रायिकता-आधारित सिद्धांतों का पालन करते हैं। इसी कारण वे ऐसे कार्य कर सकते हैं जो पारंपरिक, निर्धारक (Deterministic) प्रणालियों की क्षमता से परे होते हैं।
- अनुप्रयोग:
- फार्मास्यूटिकल्स: क्वांटम कंप्यूटर आणविक व्यवहार का अनुकरण कर सकते हैं, जिससे जीवनरक्षक औषधियों और उपचारों के विकास को गति प्रदान की जा सकती है। यह प्रोटीन फोल्डिंग के अध्ययन में सहायता करता है तथा अल्ज़ाइमर और पार्किंसंस जैसे रोगों के उपचार में इसके संभावित अनुप्रयोग हैं।
- आपदा प्रबंधन: क्वांटम अनुप्रयोगों से सुनामी, सूखा, भूकंप और बाढ़ का पूर्वानुमान अधिक संभव हो सकता है। क्वांटम प्रौद्योगिकी के माध्यम से जलवायु परिवर्तन से संबंधित आँकड़ों के एकत्रीकरण को बेहतर तरीके से सुव्यवस्थित किया जा सकता है।
- सुरक्षित संचार: चीन के मिसियस जैसे क्वांटम उपग्रह अत्यंत सुरक्षित संचार संभव बनाते हैं, जो सैन्य उपयोग और साइबर सुरक्षा के लिये महत्त्वपूर्ण है।
- क्वांटम क्रिप्टोग्राफी: यह सैद्धांतिक रूप से अभाजनीय एंक्रिप्शन बनाकर साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ बनाती है तथा संवेदनशील डेटा को भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों की डिक्रिप्शन क्षमताओं से सुरक्षित रखती है।
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन: यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य क्वांटम टेक्नोलॉजी के अनुसंधान, विकास और अनुप्रयोग को प्रोत्साहित करना है। यह मिशन वित्तीय वर्ष 2023–24 से 2030–31 तक संचालित होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्वांटम टेक्नोलॉजी क्या है?
क्वांटम तकनीक क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों—जैसे सुपरपोज़िशन, एंटैंगलमेंट और टनलिंग—का उपयोग करती है, ताकि ऐसे कार्य किये जा सकें जो पारंपरिक (क्लासिकल) तकनीकों की क्षमता से परे हों।
2. क्यू-कॉन्फोकल सिस्टम हेल्थकेयर में कैसे योगदान देता है?
यह कोशिकाओं के भीतर होने वाले परिवर्तनों—जैसे रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज़ (ROS) का पता लगाती है, जिससे कैंसर के शुरुआती चरण में निदान और बीमारियों पर शोध संभव हो पाता है।
3. राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) क्या है?
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया (2023–24 से 2030–31 तक) यह कार्यक्रम रणनीतिक और वैज्ञानिक क्षेत्रों में क्वांटम अनुसंधान, विकास और अनुप्रयोगों को बढ़ावा देता है।
सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. ‘क्यूबिट (Qubit)’ शब्द का उल्लेख निम्नलिखित में से कौन-से एक प्रसंग में होता है? (2022)
(a) क्लाउड सेवाएँ
(b) क्वांटम संगणन
(c) दृश्य प्रकाश संचार प्रौद्योगिकियाँ
(d) बेतार संचार प्रौद्योगिकियाँ
उत्तर: (b)
