सरकार ने RoDTEP लाभों की पूर्ण बहाली की | 25 Mar 2026
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने निर्यातकों को बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाने के लिये निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों में छूट (RoDTEP) योजना के लाभों को पूर्णतः बहाल कर दिया है।
- पूर्व में, वैश्विक व्यापार अस्थिरता के बीच RoDTEP दरों को आधा कर दिया गया था, जिस पर निर्यातकों ने सख्त आलोचना की। हालाँकि, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण निर्यातों को इस कटौती से छूट दी गई थी।
RoDTEP योजना
- परिचय: वर्ष 2021 में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा शुरू की गई एक प्रमुख निर्यात प्रोत्साहन योजना है। इसने पूर्ववर्ती मर्चेंडाइज़ एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (MEIS) का स्थान लिया।
- उद्देश्य: इसका उद्देश्य निर्यातित वस्तुओं के निर्माण एवं वितरण के दौरान लगने वाले निहित उन केंद्रीय, राज्य एवं स्थानीय शुल्कों, करों और उपकरों की क्षतिपूर्ति करना है, जिन्हें किसी अन्य मौजूदा तंत्र (जैसे– GST इनपुट टैक्स क्रेडिट या ड्यूटी ड्रॉबैक) के तहत वापस नहीं किया जाता।
- यह अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में भारतीय वस्तुओं की लागत प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ाता है, जिससे निर्यातकों के लिये समान अवसर (लेवल प्लेइंग फील्ड) सुनिश्चित होता है।
- WTO अनुरूपता: MEIS को प्रत्यक्ष सब्सिडी होने के आधार पर विश्व व्यापार संगठन (WTO) में चुनौती दी गई थी। इसके विपरीत, RoDTEP एक प्रोत्साहन योजना के बजाय शुल्क छूट (ड्यूटी रिमिशन) योजना के रूप में कार्य करता है, जिससे यह पूर्णतः WTO के अनुरूप बनता है।
- छूट हस्तांतरणीय इलेक्ट्रॉनिक ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स (e-scrips) के रूप में जारी की जाती है, जिनका उपयोग आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी के भुगतान के लिये किया जा सकता है।
- यह छूट सामान्यतः निर्यातित वस्तुओं के फ्रेट ऑन बोर्ड (FOB) मूल्य का लगभग 0.5% से 4.3% तक होता है, जो उत्पाद क्षेत्र के अनुसार भिन्न होता है।
- दायरा: इसमें ऐसे अंतर्निहित कर शामिल होते हैं, जैसे– मंडी कर, ईंधन पर वैट (VAT), कोयला उपकर, ईंधन पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क, विद्युत शुल्क तथा अन्य स्थानीय उपकर, जिन्हें अन्यत्र वापस नहीं किया जाता।
- पात्रता: यह अधिकांश निर्यातित वस्तुओं पर लागू होती है (8,500 से अधिक टैरिफ लाइनों को कवर करती है)। कुछ श्रेणियाँ (जैसे– निर्यात नीति के तहत प्रतिबंधित वस्तुएँ) इससे बाहर रखी गई हैं।
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