ट्रांसजेंडर हेल्थकेयर के लिये विशेषज्ञ पैनल | 03 Feb 2026

स्रोत: द हिंदू 

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से संबंधित स्वास्थ्य देखभाल के मुद्दों पर तकनीकी और नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान करने के लिये चिकित्सा विशेषज्ञों की एक बहु-विषयक समिति का गठन किया है।

  • सरकार ने स्वीकार किया है कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को हाॅर्मोनल, शारीरिक और मनोवैज्ञानिक विभिन्नताओं के कारण अलग-अलग स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताएँ होती हैं।
  • यह विशेषज्ञ पैनल लोक स्वास्थ्य नीति को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 एवं 21 के तहत गरिमा, समता और गैर-भेदभाव के संवैधानिक मूल्यों के साथ संरेखित करता है।
  • यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के जेन कौशिक बनाम भारत संघ मामले, 2025 में दिये गए निर्देश का अनुसरण करता है, जहाँ एक ट्रांसवूमन के खिलाफ कार्यस्थल पर भेदभाव के आरोपों के बाद एक सलाहकार समिति का गठन किया गया था।
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में ट्रांसजेंडर आबादी लगभग 4.88 लाख है, जिसमें उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में सबसे अधिक संख्या है।

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिये सुधारों की समय-सीमा:

  • निर्वाचन आयोग के निर्देश (2009): निर्वाचन आयोग ने निर्वाचन पंजीकरण फॉर्म में "अन्य" के विकल्प को शामिल किया जिससे ट्रांससेक्सुअल व्यक्तियों को अपनी लैंगिक पहचान के रूप में पुरुष, महिला अथवा अन्य का चयन करने की अनुमति मिली।
  • सुप्रीम कोर्ट का निर्णय (2014): नेशनल लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी बनाम भारत संघ मामले, 2014 में सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रांसजेंडर लोगों को "थर्ड जेंडर" के रूप में मान्यता दी, इसे एक मानवाधिकार मुद्दे के रूप में रेखांकित किया।
  • विधायी प्रयास: ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 को ट्रांसजेंडर अधिकारों की सुरक्षा के लिये अधिनियमित किया गया।

और पढ़ें: ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक, 2019