डुगोंग | 24 Jan 2026

स्रोत: टीएच

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) ने तमिलनाडु के तंजावुर ज़िले के मनोरा में प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय डुगोंग संरक्षण केंद्र के डिजाइन में बड़े बदलाव की सिफारिश की है।

डुगोंग

  • परिचय: डुगोंग एक विशालकाय समुद्री स्तनधारी जीव है जिसकी पूंछ डॉल्फिन जैसी होती है। यह 10 फीट तक लंबा और लगभग 420 किलोग्राम तक भारी हो सकता है। इसे समुद्री गाय और समुद्र का किसान भी कहा जाता है।
  • पर्यावास और आहार: डुगोंग पूर्णतः शाकाहारी होते हैं तथा मुख्यतः समुद्री घास के मैदानों पर निर्भर रहते हैं। ये प्रायः खाड़ियों और लैगून जैसे उथले तथा उष्ण तटीय जल क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहाँ जल की गहराई सामान्यतः 10 मीटर से कम होती है। 
  • भारत में वितरण: कच्छ की खाड़ी, मन्नार की खाड़ी - पाक खाड़ी और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पाया जाता है। 
  • व्यवहार एवं प्रजनन: ये दीर्घायु (70 वर्ष तक) वाले जीव होते हैं, आमतौर पर अकेले या छोटे जोड़ों में रहते हैं। इनका प्रजनन चक्र धीमा होता है, ये 9-10 वर्ष की आयु में परिपक्व होते हैं और हर 3-5 वर्ष में ही बच्चे को जन्म देते हैं।
  • संरक्षण स्थिति: IUCN रेड लिस्ट में इसे सुभेद्य प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, CITES के परिशिष्ट-I (अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर प्रतिबंध) और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत इसे संरक्षित किया गया है।

समुद्री घास

  • समुद्री घास एक जल के नीचे उगने वाला फूलदार पौधा और एक महत्त्वपूर्ण आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र है जो समुद्र तल को स्थायित्व प्रदान करता है, मत्स्य पालन में सहयोग करता है, कार्बन को अवशोषित करता है तथा समुद्री जीवन को आश्रय प्रदान करता है। 
  • भारत के सबसे बड़े घास के मैदान, जो मन्नार की खाड़ी और पाक की खाड़ी (तमिलनाडु) में पाए जाते हैं, ये 13 से अधिक प्रजातियों के साथ इसकी उच्चतम विविधता का मूल स्थान हैं, जबकि लक्षद्वीप, कच्छ, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में आबादी सीमित है और संकट की स्थिति में है।

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