मधुमेह और मोटापा | 11 Apr 2026
मधुमेह और मोटापा गंभीर गैर-संक्रामक रोगों (NCD) के रूप में उभरे हैं, जो इंसुलिन (जो रक्त शर्करा को कम करता है) और ग्लूकागन (जो इसे बढ़ाता है) के बीच हॉर्मोनल असंतुलन के कारण उत्पन्न होते हैं, जिससे दीर्घकालिक प्रणालीगत जटिलताएँ उत्पन्न होती हैं।
- कार्यप्रणाली: अधिक वज़न वाले लोग, मधुमेह से ग्रस्त परिवार तथा आहार में अत्यधिक चीनी का सेवन करने वाले व्यक्तियों में टाइप 2 मधुमेह होने का उच्च जोखिम होता है।
- टाइप 2 मधुमेह में शरीर में इंसुलिन के प्रति प्रतिरोध उत्पन्न हो जाता है या इंसुलिन का उत्पादन अपर्याप्त होता है। जबकि टाइप 1 मधुमेह में इंसुलिन उत्पादन की पूर्ण रूप से कमी हो जाती है, जिसके कारण जीवन भर बाहरी रूप से इंसुलिन लेने की आवश्यकता होती है।

- GLP-1: GLP-1 दवाएँ (ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट) भूख और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने वाले प्राकृतिक हॉर्मोन की नकल करती हैं। इनका मुख्य उपयोग मोटापे एवं टाइप 2 मधुमेह के उपचार में किया जाता है।

- प्रमुख औषधियाँ: इस वर्ग की मुख्य दवाओं में तिरजेपाटाइड, लिराग्लूटाइड, डुलाग्लूटाइड तथा सेमाग्लूटाइड (मौखिक एवं इंजेक्शन) सम्मिलित हैं। इन्हें सामान्यतः प्री-फिल्ड पेन के ज़रिये शरीर में पहुँचाया जाता है।
- भारत का विनियामक ढाँचा: दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने के उद्देश्य से ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने इनके प्रिस्क्रिप्शन को केवल कार्डियोलॉजिस्ट, एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञों तक ही सीमित रखने के निर्देश दिये हैं।
- मार्च 2026 में, DCGI ने भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ सलाह जारी की और अनधिकृत बिक्री पर अंकुश लगाने के लिये ऑनलाइन फार्मेसियों और वेलनेस क्लीनिकों का राष्ट्रव्यापी ऑडिट किया।
- बचाव के उपाय: रोग प्रबंधन के लिये साप्ताहिक 150 मिनट का मध्यम शारीरिक व्यायाम, खान-पान में सुधार (चीनी और संतृप्त वसा की कटौती) तथा तंबाकू के त्याग को अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना गया है।
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