राज्यसभा के उपसभापति | 18 Apr 2026

स्रोत: डीडी न्यूज़

ऐतिहासिक रूप से पहली बार, एक नामित सांसद, हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा का उपसभापति बनाया गया है। वे लगातार तीसरे कार्यकाल के लिये निर्विरोध पुनः निर्वाचित हुए हैं।

  • निर्वाचन एवं पद: भारत के संविधान के अनुच्छेद 89(2) के अनुसार, राज्यसभा (राज्यों की परिषद) अपने सदस्यों में से एक को उपसभापति के रूप में निर्वाचित करती है।
    • जब भी यह पद रिक्त होता है, सदन को अपने कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित करने हेतु एक नए उपसभापति का निर्वाचन करना होता है।
    • उपसभापति के निर्वाचन के लिये राज्यसभा का कोई भी सदस्य किसी अन्य सदस्य के नाम का प्रस्ताव रख सकता है।
      • प्रस्तावित उम्मीदवार को निर्वाचित होने की स्थिति में पद ग्रहण करने की सहमति का घोषणा-पत्र प्रस्तुत करना होता है तथा इस प्रस्ताव का समर्थन सदन के किसी अन्य सदस्य द्वारा किया जाना आवश्यक है।
    • उपसभापति तब तक पद धारण करता है जब तक वह राज्यसभा का सदस्य बना रहता है, त्यागपत्र नहीं दे देता है या सदन द्वारा उसे हटा नहीं दिया जाता है।
  • भूमिका और कार्य: वह सभापति (उपराष्ट्रपति) की अनुपस्थिति में सदन की अध्यक्षता करता है और उस अवधि के दौरान सभापति की सभी शक्तियों का प्रयोग करता है।
  • मतदान शक्ति: सभापति की भाँति उपसभापति भी अध्यक्षता करते समय प्रथमदृष्टया मतदान नहीं करता है। वह केवल मतों की समानता की स्थिति में निर्णायक मत का प्रयोग कर सकता है।
  • पद की स्वतंत्रता: वह सभापति के अधीन नहीं होता, बल्कि सीधे राज्यसभा के प्रति उत्तरदायी होता है।
  • सदस्य के रूप में स्थिति: जब सभापति सदन की अध्यक्षता करता है, तब उपसभापति एक सामान्य सदस्य की तरह कार्य करता है तथा वाद-विवाद में भाग लेता है और मतदान करता है।
  • हटाने की प्रक्रिया: उसे राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा, 14 दिन की पूर्व सूचना के साथ, पद से हटाया जा सकता है।
    • उसके पद से हटाने से संबंधित प्रस्ताव पर विचार के दौरान वह सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकता।
  • वेतन एवं भत्ते: उसका वेतन और भत्ते संसद द्वारा निर्धारित किये जाते हैं तथा ये भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं।
  • रिक्ति: यह पद तब रिक्त हो जाता है जब वह सदस्य नहीं रहता, सभापति को त्यागपत्र देकर पद छोड़ देता है या सदन द्वारा पद से हटाया जाता है, जिसके पश्चात् एक नए उपसभापति का निर्वाचन किया जाता है।
  • उपसभापतियों का पैनल: राज्यसभा के नियमों के अनुसार, सभापति सदस्यों में से उपसभापतियों का एक पैनल नामित करता है, जिनमें से कोई भी सभापति और उपसभापति की अनुपस्थिति में सदन की अध्यक्षता कर सकता है।
    • हालाँकि, जब इन दोनों में से किसी भी पद पर रिक्ति हो, तब वे सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते।

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