एवियन फ्लू | 09 Jan 2026

स्रोत: द हिंदू 

केरल के कुट्टानाड में एवियन इन्फ्लूएंजा (H5N1) के एक नए प्रकोप ने एक बार फिर से इसकी सदियों पुरानी बतख पालन परंपरा को बाधित कर दिया है, जिससे आजीविका, जैव विविधता और ग्रामीण स्थिरता पर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न हो गई हैं।

  • नवीनतम प्रकोप में पहले ही लगभग 55,000 पक्षियों की मौत हो चुकी है, जबकि अन्य 25,000 को निवारक उपाय के रूप में मारने की तैयारी है।
  • चारा और चेंबल्ली जैसी स्वदेशी बतख की नस्लों को स्थानीय तौर पर विलुप्ति का खतरा है।
  • एवियन इन्फ्लूएंजा A(H5N1): यह अत्यधिक रोगजनक वायरस है, जो मुख्य रूप से पक्षियों के बीच फैलता है हालाँकि स्तनधारियों को भी संक्रमित कर सकता है।
  • इतिहास: सर्वप्रथम 1996 में चीन में पाया गया, तब से यह एक वैश्विक खतरा बन गया है। भारत ने वर्ष 2015 में महाराष्ट्र और गुजरात में अपना पहला प्रकोप दर्ज किया था।
    • पोल्ट्री से परे, H5N1 ने कैलिफोर्निया कोंडर जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों के कारण वन्य पक्षियों में व्यापक स्तर पर मृत्यु दर देखने को मिली है और समुद्री स्तनधारियों, जैसे– सी लायन और डॉल्फिन के साथ-साथ लोमड़ी, प्यूमा और भालू जैसे स्थलीय स्तनधारियों में भी फैल गया है।
  • संचरण: मनुष्यों में एवियन इन्फ्लूएंजा संक्रमण दुर्लभ है, यह मुख्य रूप से संक्रमित पक्षियों या उनके स्राव के सीधे संपर्क में आने से फैलता है, विशेष रूप से पोल्ट्री फार्म आदि में।
    • मानव-से-मानव संचरण अत्यंत दुर्लभ बना हुआ है। वायरस लगातार विकसित हो रहा है और यदि यह उत्परिवर्तित होकर सतत मानव-से-मानव संचरण की अनुमति देता है, तो यह एक वैश्विक महामारी को ट्रिगर कर सकता है। इसलिये H5N1 को WHO अनुसंधान एवं विकास ब्लूप्रिंट के तहत एक प्राथमिकता वाले रोगों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • लक्षण: सामान्य लक्षणों में तेज़ बुखार, खाँसी, गले में खराश और माँसपेशियों में दर्द शामिल हैं।
    • गंभीर मामले श्वसन की विफलता के कारण बढ़ सकते हैं, हालाँकि कुछ संपर्क में आए पक्षियों के स्पर्श करने (लक्षण-रहित) से भी फैलते हैं।
  • उपचार: ओसेल्टामिविर जैसी एंटीवायरल दवाएँ प्रभावी हैं, विशेष रूप से गंभीर या उच्च जोखिम वाले मामलों में शीघ्र राहत पाने के लिये।

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