NCBC के अध्यक्ष की नियुक्ति | 01 Apr 2026
चर्चा में क्यों?
निरंजन ज्योति ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) की अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया है, जबकि किरण उमेश महाले ने आयोग की सदस्य के रूप में कार्यभार सँभाला है।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) क्या है?
- परिचय: NCBC एक संवैधानिक निकाय है, जो सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) के कल्याण और संरक्षण के लिये समर्पित है।
- प्रारंभ में 1993 में एक संवैधानिक निकाय के रूप में स्थापित यह आयोग 2018 के 102वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन से गुज़रा, जिसने इसे संवैधानिक दर्जा प्रदान किया।
- संवैधानिक आधार: आयोग को अपनी शक्तियाँ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338B के अंतर्गत प्राप्त हैं। यह राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (अनुच्छेद 338) और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (अनुच्छेद 338A) के साथ कार्य करता है।
- संरचना: NCBC में कुल 5 सदस्य होते हैं- एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य। इन सभी की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर एवं मुहर सहित वारंट के माध्यम से की जाती है।
- सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों से संबंधित सभी प्रमुख नीतिगत मामलों पर सरकार के लिये NCBC से परामर्श करना अनिवार्य कर दिया गया है।
- यह अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिये उपलब्ध तंत्र के समान एक अधिक सशक्त शिकायत निवारण व्यवस्था प्रदान करता है।
- इसके अतिरिक्त, सदस्यों के कार्यकाल और सेवा की शर्तों का निर्धारण करने का संवैधानिक अधिकार राष्ट्रपति के अधीन होता है।
- सदस्यों की योग्यता:
- अध्यक्ष: अध्यक्ष की नियुक्ति सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) से संबंधित प्रतिष्ठित सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्त्ताओं में से की जाती है। वे ऐसे व्यक्ति होने चाहिये, जिनके व्यक्तित्व और सेवा का रिकॉर्ड पिछड़े वर्गों में विश्वास उत्पन्न करता हो।
- उपाध्यक्ष एवं सदस्य: उपाध्यक्ष और अन्य तीन सदस्यों में से कम-से-कम दो का संबंध सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों से होना अनिवार्य है।
- महिला प्रतिनिधित्व: आयोग में कम-से-कम एक सदस्य महिला होना आवश्यक है।
- कार्यकाल और सेवा-शर्तें: कार्यालय की अवधि और सेवा-शर्तें (वेतन, भत्ते आदि) राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित की जाती हैं।
- अध्यक्ष और सदस्य कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से 3 वर्ष की अवधि के लिये सेवा करते हैं। सदस्य आमतौर पर दो से अधिक कार्यकाल के लिये नियुक्ति के पात्र नहीं होते हैं।
- 102वें संशोधन का महत्त्व: वर्ष 2018 से पहले NCBC की भूमिका अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की केंद्रीय सूची में जातियों को शामिल या बाहर करने की अनुशंसा तक सीमित थी। नए संवैधानिक ढाँचे के अंतर्गत:
- प्रमुख कार्य:
- जाँच: संविधान या किसी अन्य कानून के तहत पिछड़े वर्गों के लिये प्रदान किये गए संरक्षण उपायों से संबंधित सभी मामलों की निगरानी और जाँच करना।
- पूछताछ: पिछड़े वर्गों के अधिकारों और संरक्षण उपायों के अभाव से संबंधित विशिष्ट शिकायतों की जाँच करना।
- सलाहकार: इन वर्गों के सामाजिक-आर्थिक विकास में भाग लेना और उन पर सलाह देना तथा उनकी प्रगति का मूल्यांकन करना।
- रिपोर्टिंग: उन संरक्षण उपायों के कामकाज के बारे में राष्ट्रपति को वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करना।
- सिविल न्यायालय की शक्तियाँ: मामलों की जाँच करते समय या शिकायतों की पूछताछ करते समय NCBC के पास वाद का विचारण करते समय सिविल न्यायालय को निम्नलिखित शक्तियाँ हैं, अर्थात् :-
- भारत के किसी भी भाग से किसी व्यक्ति को समन करना और हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना;
- किसी दस्तावेज को प्रकट और पेश करने की अपेक्षा करना;
- शपथपत्रों पर साध्य ग्रहण करना;
- किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रति की अपेक्षा करना;
- संबंधित संवैधानिक संशोधन: अनुच्छेद 342A को NCBC की संवैधानिक स्थिति (102वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2018) के साथ जोड़ा गया था, जो राष्ट्रपति को विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों को निर्दिष्ट करने का अधिकार देता है।
- वर्ष 2021 में हुए 105वें संशोधन अधिनियम के बाद राज्य सरकारों को राज्य की सूचियों (OBC) की पहचान करने और उन्हें बनाए रखने की शक्ति स्पष्ट रूप से बहाल कर दी गई थी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. NCBC को संवैधानिक दर्जा देने वाला कौन-सा संवैधानिक संशोधन था?
वर्ष 2018 में हुए 102वें संविधान संशोधन अधिनियम के अंतर्गत अनुच्छेद 338B को जोड़ा गया, जिससे NCBC एक वैधानिक निकाय से पूर्ण संवैधानिक इकाई में परिवर्तित हो गया।
2. NCBC की संरचना और कार्यकाल कैसे निर्धारित किया जाता है?
इसमें पाँच सदस्य (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और तीन अन्य) होते हैं जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है, जो उनके कार्यकाल और सेवा शर्तों का भी निर्धारण करते हैं।
3. 105वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2021 का क्या प्रभाव था?
इसने स्पष्ट रूप से राज्य सरकारों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की अपनी राज्य-विशिष्ट सूचियों की पहचान और रखरखाव की शक्ति बहाल कर दी।
4. NCBC के पास कौन-सी अर्द्ध-न्यायिक शक्तियाँ हैं?
शिकायतों की जाँच करते समय NCBC के पास एक सिविल न्यायालय के अधिकार होते हैं, जिसमें गवाहों को बुलाना, दस्तावेज़ पेश करना और शपथ पत्र पर साक्ष्य प्राप्त करना शामिल है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रश्न. भारत के निम्नलिखित संगठनों/निकायों पर विचार कीजिये: (2023)
- राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग
- राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग
- राष्ट्रीय विधि आयोग
- राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग
उपर्युक्त में से कितने संवैधानिक निकाय हैं?
(a) केवल एक
(b) केवल दो
(c) केवल तीन
(d) सभी चार
उत्तर: (a)