16वें वित्त आयोग द्वारा राजकोषीय संघवाद को नया आकार मिलना | 15 Sep 2023

यह एडिटोरियल 14/09/2023 को ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित ‘‘THE NEW SHARING’’ लेख पर आधारित है। इसमें राजकोषीय हस्तांतरण तंत्र के सामने मौजूद चुनौतियों की चर्चा की गई है और और आगामी 16वें वित्त आयोग के लिये विचारार्थ विषयों के संबंध में सुझाव दिया गया है।

प्रिलिम्स के लिये:

वित्त आयोग, GST, GST परिषद, ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज अंतरण, इनपुट टैक्स क्रेडिट, अनुच्छेद 275, GST मुआवजा

मेन्स के लिये:

101वाँ संविधान संशोधन अधिनियम और उसका प्रभाव; राजकोषीय संघवाद की चुनौतियाँ, 16वें वित्त आयोग के लिये संदर्भ की शर्तें (TOR)। 

जल्द ही गठित किये जा रहे 16वें वित्त आयोग (SFC) को भारत में राजकोषीय संघवाद (fiscal federalism) के बदले हुए परिदृश्य के मद्देनजर कर-साझाकरण सिद्धांतों (tax-sharing principles) का पुनः परीक्षण करने का कार्य-दायित्व सौंपा जाना चाहिये। विचारार्थ विषय (Terms of Reference- ToR) संबंधित अप्रत्यक्ष करों के संग्रहण और विलय करने के मामले में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की अधिकारिता के संयोजन पर आधारित होने चाहिये। 

101वाँ संविधान संशोधन:

  • वर्ष 2016 का 101वाँ संविधान संशोधन राजकोषीय दृष्टिकोण से वर्ष 1951 में प्रथम वित्तीय आयोग के गठन के बाद से अब तक का सबसे दूरगामी परिवर्तन है जो अप्रत्यक्ष कराधान के मामले में केंद्र और राज्यों को समवर्ती शक्तियाँ प्रदान करता है। 
  • इस संशोधन ने 1 जुलाई 2017 से भारत में एक राष्ट्रीय वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया। 
  • GST अप्रत्यक्ष करों की समवर्ती प्रणाली पर आधारित है, जहाँ प्रत्येक लेनदेन पर केंद्रीय और राज्य GST अधिरोपित होता है। 
  • अंतर-राज्य लेनदेन के साथ ही आयात पर एक एकीकृत GST लगाया जाता है। 
  • इसके साथ, एक उपभोग-आधारित कराधान प्रणाली ने उत्पादन-आधारित प्रणाली को प्रतिस्थापित कर दिया है। 

इस संशोधन के प्रभाव:

  • उस राज्य में अप्रत्यक्ष करों का संग्रह जहाँ वस्तुओं या सेवाओं का उपभोग किया जाता है, न कि उस राज्य में जहाँ उनका उत्पादन किया जाता है – यह संघवाद की ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज दोनों गतिशीलताओं को बदल देता है। 
  • पूर्व में केंद्रीय बिक्री कर वस्तुओं की उत्पत्ति या स्रोत पर आधारित था, जिसका अर्थ यह था कि कर का बोझ समृद्ध और विनिर्माण राज्यों से उपभोक्ता राज्यों की ओर स्थानांतरित कर दिया जाता था, जिससे क्षैतिज असंतुलन उत्पन्न हो गया था। 
  • हालाँकि अब सीमा-पार व्यापार के लिये गंतव्य सिद्धांत (destination principle) के साथ, अधिक समृद्ध और औद्योगिक राज्यों की कीमत पर गरीब और उपभोक्ता राज्यों को लाभ प्राप्त हो रहा है। 
  • उदाहरण के लिये, वस्तुओं एवं सेवाओं के अंतर-राज्य आपूर्ति के दौरान वसूल किया जाने वाला IGST अब गंतव्य राज्य में स्थानांतरित कर दिया गया है। स्रोत के सिद्धांत से गंतव्य के सिद्धांत की ओर यह कदम राज्यों के बीच शक्ति संतुलन को पुनःसामंजित कर रहा है। 

राजकोषीय संघवाद के लिये प्रमुख चुनौतियाँ: 

  • संघीय राजकोषीय हस्तांतरण प्रणाली (federal fiscal transfer system) अभी भी क्षेत्राधिकार पृथक्करण के सिद्धांतों के लिये डिज़ाइन की गई है (और उन पर आधारित है), जो स्रोत-आधारित कर युग के लिये प्रासंगिक है। इसका वितरण मानदंड भी पूर्व की व्यवस्था पर आधारित है। 
  • कार्यान्वित कर व्यवस्था और कर साझेदारी के सिद्धांतों एवं मानदंडों के बीच का संबंध-विच्छेद राजकोषीय संघीय प्रणाली के लिये हानिकारक है तथा संघवाद की राजनीतिक अर्थव्यवस्था में दोष रेखाएँ उत्पन्न कर सकता है।  

बेहतर हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिये 16वें वित्त आयोग का क्या कार्य-दायित्व : 

  • कर-साझाकरण सिद्धांतों का पुनः परीक्षण करना: 16वें वित्त आयोग (SFC) को भारत के बदलते राजकोषीय संघवाद के संदर्भ में कर-साझाकरण सिद्धांतों की समीक्षा करने के लिये निर्देशित किये जाने की आवश्यकता है। इसके विचारार्थ विषय संघ और राज्यों द्वारा अप्रत्यक्ष कर आधार के समेकन पर आधारित होने चाहिये। 
  • अप्रत्यक्ष करों की सांविधिक साझेदारी को रि-डिज़ाइन करना: परिवर्तनों के लिये आवश्यक है कि ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज दोनों तरह के अप्रत्यक्ष करों की सांविधिक साझेदारी का पुनः परीक्षण किया जाए और उसे रि-डिज़ाइन किया जाए। 
    • ऊर्ध्वाधर अंतरण: नई प्रणाली के साथ लंबवत साझाकरण के सिद्धांत को संरेखित करने के लिये, विभाज्य पूल को पुनर्परिभाषित करने के साथ शुरुआत करना महत्त्वपूर्ण है। उदाहरण के लिये SFC द्वारा एकल वस्तु एवं सेवा कर दर (IGST) को पूरी तरह से पूल का हिस्सा बनाने के तौर-तरीके निर्दिष्ट करने की आवश्यकता होगी। 
      • अभी तक केवल इनपुट टैक्स क्रेडिट रहित IGST ही राज्यों के साथ साझा किया जाता है। क्रेडिट-इन-ट्रांज़िशन अनसेटल्ड IGST को विभाज्य पूल में शामिल किये जाने के लिये एक मानक आधार होना चाहिये। 
      • यह निपटान की आवृत्ति पर भी लागू होता है, जिसे निर्धारित करने की आवश्यकता है क्योंकि इससे राज्य सरकारों के लिये नकदी प्रवाह की बहुत-सी समस्याएँ पैदा हो गई हैं। 
    • क्षैतिज अंतरण: राज्यों के बीच विभाज्य पूल के वितरण के मानदंडों पर पुनर्विचार करना होगा। मौजूदा मानदंड, विशेष रूप से अनुदान को समकारी करने के लिये, उत्पादन-आधारित कर प्रणाली में विकसित हो गए हैं। उपभोग-आधारित कर प्रणाली के लिये इसे फिर से डिज़ाइन करने की आवश्यकता है। 
      • उत्पादन से उपभोग में परिवर्तन से कर राजस्व के वितरण के साथ-साथ समकारी अनुदान की आवश्यकता, प्रकृति और वितरण में महत्त्वपूर्ण अंतर आएगा। 
      • राज्यों के क्रम में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन होने की संभावना है क्योंकि प्रति व्यक्ति आय के आधार पर उनकी रैंकिंग प्रति व्यक्ति उपभोग के आधार पर उनकी रैंकिंग से काफी भिन्न है। 
  • संग्रहण लागत की गणना और आवंटन के लिये एक पद्धति की अनुशंसा करना: GST की नई व्यवस्था—जहाँ संघ और राज्य दोनों समान कर एकत्र करते हैं, के परिणामस्वरूप कर संग्रह की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि और व्यापक भिन्नता उत्पन्न हुई है। यह लागत 7 से 10 प्रतिशत तक देखी गई है। 
    • इसलिये, SFC को अप्रत्यक्ष करों को संग्रहित करने की लागत की गणना और आवंटन के लिये एक पद्धति की सिफ़ारिश करने का कार्य सौंपा जाना चाहिये। 
    • इसके अतिरिक्त, उन्हें इन करों को कम करने और उनकी संग्रह दक्षता में सुधार करने के तरीके भी सुझाने चाहिये। 
  • अनुदान तंत्र को रि-डिज़ाइन करना: वर्ष 1935 में ब्रिटिश बैंकर ओटो निमेयर (Otto Niemeyer) द्वारा परिकल्पित और अनुच्छेद 275 के तहत बनाए रखे गए ‘अंतर-भरण’ दृष्टिकोण (gap-filling approach) को GST परिषद द्वारा लाये गए मुआवजा कानून के आलोक में रि-डिज़ाइन किया जाना चाहिये। 
    • GST मुआवजा अनुदान 31 मार्च, 2026 तक बढ़ाए जाने के साथ, उसके बाद का वित्तीय वर्ष SFC अवार्ड के लिये आधार वर्ष होगा जो वर्ष 2027 से 2032 तक प्रभावी रहेगा। 
    • यह बिल्कुल स्पष्ट है कि प्रत्येक राज्य मुआवजा योजना के विस्तार की मांग करेगा। इसलिये, मुआवजे की आवश्यकता की जाँच करने के लिये SFC को निर्देश देना या आदेश देना उचित होगा, यह देखते हुए कि इसका मूल उद्देश्य ‘GST की ओर संक्रमण से हुई हानि की भरपाई करना’ था। 
    • पिछले छह वर्षों के दौरान GST के राजस्व प्रदर्शन के आलोक में मुआवजा योजना की आवश्यकता, व्यवहार्यता और वांछनीयता की समीक्षा करना महत्त्वपूर्ण है। 
    • राज्यों को पहले से जारी किये गए मुआवजे के अलावा GST मुआवजा उपकर संग्रह के शेष को करों के विभाज्य पूल में आवंटित करने के लिये स्पष्ट सिद्धांत स्थापित करना महत्त्वपूर्ण है। 
  • संघीय वित्त की नई संस्थागत संरचना: संघीय वित्त की नई संस्थागत संरचना में, GST परिषद और वित्त आयोग के बीच एक औपचारिक संबंध होना चाहिये क्योंकि वे विभाज्य का आकार तय करते हैं और इसे वितरित करते हैं। SFC को इस बात की जाँच करनी चाहिये कि GST परिषद उस अवधि के दौरान अपने अवार्ड के कार्यान्वयन की निगरानी के लिये राजकोषीय परिषद के रूप में कैसे कार्य कर सकती है जब यह परिचालन में नहीं हो। 

निष्कर्ष:

ध्यान देने योग्य महत्त्वपूर्ण बात यह है कि SFC को वैचारिक, पद्धतिगत और परिचालनात्मक रूप से अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। इसे प्राप्त करने के लिये, इसके विचारार्थ विषय ऐसे हों जो न केवल उसे ऐसा करने की अनुमति दें और इसमें उसकी सहायता करें, बल्कि इसे इस उद्देश्य के लिये प्रोत्साहित और निर्देशित भी करें। 

अभ्यास प्रश्न: राज्यों के लिये बेहतर संसाधन आवंटन और राजकोषीय स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिये भारत के राजकोषीय संघवाद में सुधार की आवश्यकता है। इस आलोक में, उन सुधारों को लाने के लिये 16वें वित्त आयोग के विचारार्थ विषयों के बारे में चर्चा कीजिये। 

https://www.youtube.com/watch?v=IqKfFNMaiOc&t=33s

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा पिछले वर्ष के प्रश्न (PYQ)  

प्रिलिम्स:

प्रश्न. निम्नलिखित मदों पर विचार कीजिये: (2018)

  1. छिलका उतरा हुआ अनाज
  2.  मुर्गी के अंडे पकाए हुए
  3.  संसाधित और डिब्बाबंद मछली
  4.  विज्ञापन सामग्री युक्त समाचार पत्र

उपर्युक्त मदों में से कौन-सा/से GST (वस्तु और सेवा कर) के अंतर्गत छूट प्राप्त है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1, 2 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4

उत्तर: c


प्रश्न. 'वस्तु एवं सेवा कर (GST)' को लागू करने के सबसे संभावित लाभ क्या हैं/हैं? (2017)

  1. यह कई प्राधिकरणों द्वारा एकत्र किये गए विभिन्न करों की जगह लेगा और इस प्रकार भारत में एकल बाज़ार स्थापित करेगा।
  2.  यह भारत के 'चालू खाता घाटा' को काफी कम कर देगा और इसे अपने विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने में सक्षम बनाएगा।
  3.  यह भारत की अर्थव्यवस्था के विकास और आकार में अत्यधिक वृद्धि करेगा एवं निकट भविष्य में इसे चीन से आगे निकलने में सक्षम बनाएगा।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)


प्रश्न: स्थानीय स्वशासन को एक अभ्यास के रूप में सर्वोत्तम रूप से समझाया जा सकता है। (2017)

(a) संघवाद
(b) लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण
(c) प्रशासनिक प्रतिनिधिमंडल
(d) प्रत्यक्ष लोकतंत्र

उत्तर: (b)


प्र. निम्नलिखित में से कौन-सी भारतीय संघवाद की विशेषता नहीं है? (2017)

(a) भारत में एक स्वतंत्र न्यायपालिका है।
(b) शक्तियों को केंद्र और राज्यों के बीच स्पष्ट रूप से विभाजित किया गया है।
(c) संघ की इकाइयों को राज्य सभा में असमान प्रतिनिधित्व दिया गया है।
(d) यह संघबद्ध इकाइयों के बीच एक समझौते का परिणाम है।

उत्तर: (a)