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शहरी सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता | 13 Aug 2021 | भारतीय समाज

यह एडिटोरियल 11/08/2021 को ‘द हिंदू’ में प्रकाशित ‘‘An urban jobs safety net’’ लेख पर आधारित है। इसमें कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय शहरी रोज़गार के समक्ष पेश चुनौतियों और उपायों के संबंध में चर्चा की गई है।

महामारी के दौरान विश्व भर की सरकारों को जीवन की रक्षा बनाम आजीविका की रक्षा के कठिन विकल्प का सामना करना पड़ा। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की अप्रैल, 2021 की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ रिपोर्ट के अनुसार, चीन के अतिरिक्त शेष लगभग सभी देशों ने पिछले साल आर्थिक संकुचन का सामना किया। इसके साथ ही, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 3.3% की कमी दर्ज़ की गई है।   

भारत की जीडीपी में 8% की गिरावट आई है। ‘सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी’ के आकलन के अनुसार, भारत में बेरोज़गारी दर अप्रैल 2020 में 23.5% के शीर्ष स्तर पर पहुँच गई थी जिसमें फिर सुधार के साथ फरवरी 2021 में यह 6.9% के स्तर पर आ गई।  

आर्थिक मंदी के इस परिदृश्य में आजीविका के नुकसान को न्यूनतम रखना एक प्रमुख चुनौती है। परंपरागत रूप से, समकालीन वास्तविकताओं को देखते हुए सरकारें इस मुद्दे को क्षेत्र विशेष के प्रति दृष्टिकोण के माध्यम से संबोधित करती रही हैं, लेकिन अब आवश्यकता है कि इसे ग्रामीण-शहरी दृष्टिकोण से देखा जाए।

शहरी भारत के समक्ष विद्यमान सामाजिक सुरक्षा की समस्याएँ

शहरी क्षेत्रों पर ध्यान देने की आवश्यकता

आगे का रास्ता

निष्कर्ष

भारत की भविष्योन्मुखी शहरी रणनीति को शहरी प्रशासन, शहरी निर्धनों की आजीविका सुरक्षा, सार्वजनिक सेवाओं की आपूर्ति, अंतर-सरकारी स्थानांतरण और क्षमता निर्माण में सुधार की ओर प्रेरित होना चाहिये।

India-Urbanization

अभ्यास प्रश्न: ‘शहरी क्षेत्र देश के विकास इंजन होते हैं।’ इस कथन के आलोक में शहरी क्षेत्र के लोगों के लिये आजीविका सुरक्षा की आवश्यकता पर चर्चा कीजिये।