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वैवाहिक बलात्कार:महिलाओं के लिये एक अपमान | 01 Sep 2021 | भारतीय समाज

यह एडिटोरियल दिनांक 31/08/2021 को ‘द हिंदू’ में प्रकाशित ‘‘Marital rape: an indignity to women’’ पर आधारित है। इसमें वैवाहिक बलात्कार के गैर-अपराधीकरण (non-criminalisation of marital rape) से संबंधित समस्याओं की चर्चा की गई है और आगे की राह सुझाई गई है।

हाल ही में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा दिये गए एक निर्णय ने वैवाहिक बलात्कार के गैर-अपराधीकरण पर बहस को फिर से शुरू कर दिया है। भले ही महिलाओं की सुरक्षा के लिये आपराधिक कानून में कई संशोधन किये गए हैं, लेकिन भारत में वैवाहिक बलात्कार के गैर-अपराधीकरण की स्थिति महिलाओं की गरिमा और मानवाधिकारों को कमज़ोर करती है।

नवीनतम मामला

वैवाहिक बलात्कार को अपवाद मानने से संबद्ध समस्याएँ

महिलाओं पर वैवाहिक बलात्कार के प्रभाव

आगे की राह 

निष्कर्ष

भारतीय कानून अब पतियों और पत्नियों को पृथक तथा स्वतंत्र कानूनी पहचान प्रदान करते हैं और आधुनिक युग में न्याय प्रणाली प्रकट रूप से महिलाओं की सुरक्षा पर केंद्रित हुई है।

इसलिये यह उपयुक्त समय है कि विधायिका को इस कानूनी दुर्बलता या विसंगति का संज्ञान लेना चाहिये और IPC की धारा 375 (अपवाद 2) को निरस्त कर वैवाहिक बलात्कार को बलात्कार कानूनों के दायरे में लाना चाहिये।

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अभ्यास प्रश्न: बलात्कार की परिभाषा में वैवाहिक बलात्कार को अपवाद के रूप में रखना महिलाओं की गरिमा, समानता और स्वायत्तता के विरुद्ध है। चर्चा कीजिये।