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उपकर विवाद और कैग की रिपोर्ट | 02 Nov 2020 | भारतीय अर्थव्यवस्था

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में भारत में उपकर से जुड़ी व्यवस्था और इसे लेकर केंद्र तथा राज्य सरकारों के बीच गतिरोध व उससे संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

संदर्भ: 

किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मज़बूती के लिये उसमें पारदर्शिता, उत्तरदायित्त्व और परस्पर विश्वास का होना बहुत ही आवश्यक है। भारत जैसी संघीय व्यवस्था में इन मूल्यों का महत्त्व और भी बढ़ जाता है। हालाँकि पिछले कुछ समय से राज्य सरकारों द्वारा केंद्र सरकार पर उनके अधिकारों में हस्तक्षेप और केंद्र की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया जाता रहा है। इसी प्रकार पिछले दिनों भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक या कैग (CAG) द्वारा संसद में प्रस्तुत एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2018-19 में प्राप्त हुए उपकर का लगभग 40% हिस्सा संबंधित उद्देश्य के निर्धारित कोष में हस्तांतरित करने के स्थान पर  भारत की संचित निधि (CFI) में ही रहने दिया गया।

कैग की रिपोर्ट:

उपकर (Cess): 

कर और उपकर में अंतर:

भारत में लागू उपकरों का इतिहास: 

जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर

(GST Compensation Cess) : 

उपकर से जुड़े अन्य मुद्दे: 

चुनौतियाँ:    

आगे की राह:     

अभ्यास प्रश्न: उपकर से आप क्या समझते हैं? हाल के वर्षों में उपकर सार्वजनिक महत्त्व के किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति की बजाय केंद्र सरकार द्वारा अपने राजकोषीय घाटे को कम करने का एक माध्यम बन गया है। चर्चा कीजिये।