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भारतीय कृषि क्षेत्र और पर्यावरण | 12 Oct 2021 | जीव विज्ञान और पर्यावरण

यह एडिटोरियल 11/10/2021 को ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित “A Carbon Policy for the Farm” लेख पर आधारित है। इसमें जलवायु परिवर्तन में भारत के योगदान की चर्चा की गई है, साथ ही इस बात पर भी विचार किया गया है कि भारत अपनी कृषि व्यवस्था में परिवर्तन लाकर किस प्रकार आगे और क्षति को सकता है।

संदर्भ

जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल’ (Intergovernmental Panel on Climate Change- IPCC) की छठी आकलन रिपोर्ट में मानव जाति के लिये ‘कोड रेड’ जारी करते हुए कहा गया है कि पृथ्वी का 1.5 डिग्री सेल्सियस गर्म होना अपरिहार्य है।

यद्यपि वैश्विक स्तर पर ‘पर्यावरणीय स्वास्थ्य’ को महत्त्व दिया जा रहा है, लेकिन रिकवरी की गति उतनी तीव्र नहीं है जिस गति से क्षरण हो रहा है।

भारत के संदर्भ में, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र ऊर्जा क्षेत्र एवं विनिर्माण क्षेत्र के बाद ग्रीनहाउस गैस का तीसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक है।  

कृषि क्षेत्र पर व्यापक रूप से निर्भर होने के कारण, भारत को अपनी कृषि व्यवस्था में कुछ महत्त्वपूर्ण परिवर्तन लाने एवं खेती एवं पशुधन प्रबंधन के कार्बन-कुशल तरीकों को अपनाने की आवश्यकता है। 

भारत: जलवायु परिवर्तन एवं कृषि

Agriculture

कार्बन-कुशल कृषि की ओर

निष्कर्ष

अभ्यास प्रश्न: भारत के ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (NDCs) की पूर्ति में कृषि क्षेत्र द्वारा प्रस्तुत बाधाओं की चर्चा कीजिये।