वर्षांत समीक्षा-2022: अंतरिक्ष विभाग | 02 Jan 2023

प्रिलिम्स के लिये:

इसरो, चंद्रयान-2 मिशन, 50वाँ PSLV प्रक्षेपण, वन वेब, प्रक्षेपण यान मार्क 3, IAD, आत्मनिर्भर, उन्नति, युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम।

मेन्स के लिये:

अंतरिक्ष विभाग की प्रमुख उपलब्धियाँ।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत अंतरिक्ष विभाग की वार्षिक समीक्षा, 2022 जारी की गई।

अंतरिक्ष विभाग की प्रमुख उपलब्धियाँ: 

  • प्रमुख मिशन: वर्ष 2014 से अब तक कुल मिलाकर 44 अंतरिक्ष यान मिशन, 42 प्रक्षेपण यान मिशन और 5 प्रौद्योगिकी प्रदर्शक सफलतापूर्वक पूरे किये गए हैं।
    • चंद्रयान-2 मिशन: वर्ष 2019 में चंद्रयान-2 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था।
      • यह अनुसंधान समुदाय के लिये महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक डेटा प्रदान कर रहा है। 
    • 50वाँ PSLV प्रक्षेपण: 
      • दिसंबर 2019 में PSLV-C48/RISAT-22BR1 का प्रक्षेपण वर्कहॉर्स लॉन्च वाहन PSLV का 50वाँ प्रक्षेपण था।
      • RISAT-2BR1 सीमा पर चौबीसों घंटे निगरानी कर घुसपैठ पर रोक लगाएगा।
    • इसरो सिस्टम फॉर सेफ एंड सस्टेनेबल ऑपरेशंस मैनेजमेंट (IS4OM): 
      • जुलाई 2022 में विज्ञान मंत्रालय ने इसरो सिस्टम फॉर सेफ एंड सस्टेन्ड ऑपरेशंस मैनेजमेंट (IS4OM) को राष्ट्र को समर्पित किया।
      • यह एक ऐसी सुविधा है जिसकी कल्पना राष्ट्रीय विकास के लिये बाहरी अंतरिक्ष के सतत् उपयोग के लाभों को प्राप्त करते हुए सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु समग्र दृष्टिकोण के साथ की गई है। 
    • प्रक्षेपण यान मार्क 3 (Launch Vehicle Mark- LVM):
      • LVM 3/वन वेब इंडिया-1 मिशन को अक्तूबर 2022 में सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।
      • इस लॉन्च के साथ LVM 3 आत्मनिर्भरता का उदाहरण है और वैश्विक वाणिज्यिक लॉन्च सेवा बाज़ार में भारत की प्रतिस्पर्द्धात्म्कता को बढ़ाता है।
    • इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट (IMAT): 
      • गगनयान कार्यक्रम के हिस्से के रूप में नवंबर 2022 में बबीना फील्ड फायर रेंज (BFFR), झाँसी, उत्तर प्रदेश में क्रू मॉड्यूल डिक्लेरेशन सिस्टम का इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट (IMAT) सफलतापूर्वक किया गया था।
    • इन्फ्लेटेबल एरोडायनामिक डिसेलेरेट:
      • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation- ISRO) ने भविष्य के मिशनों के लिये कई अनुप्रयोगों के साथ एक गेम चेंजर- इन्फ्लेटेबल एरोडायनामिक डिसेलेरेटर (IAD) के साथ नई तकनीक का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया।
      • IAD के पास विभिन्न प्रकार के अंतरिक्ष अनुप्रयोगों जैसे- रॉकेट चरणों की पुनर्प्राप्ति, मंगल या शुक्र पर पेलोड उतारने और मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों के लिये अंतरिक्ष पर्यावास बनाने की बड़ी क्षमता है।
    • ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV)-C54:
      • PSLV-C54 ने नवंबर 2022 में भारत-भूटान सैट (INS-2B) सहित आठ नैनो-उपग्रहों के साथ सफलतापूर्वक EOS-06 उपग्रह लॉन्च किया
      • नए उपग्रह का प्रक्षेपण भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक की भूटान के विकास के लिये ICT और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सहित उन्नत प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की योजना का समर्थन करने के भारत के प्रयासों का हिस्सा है।
  • शैक्षणिक सहायता, क्षमता निर्माण और आउटरीच:
    • अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी ऊष्मायन केंद्र (STIC):
      • वर्ष 2018 से अंतरिक्ष अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये देश के कुछ प्रमुख स्थानों पर अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी ऊष्मायन केंद्र (STIC) स्थापित किये गए हैं।
      •  इस पहल के अंतर्गत वर्तमान में नौ अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सेल (STC) शैक्षणिक संस्थानों में काम कर रहे हैं, छह अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी ऊष्मायन केंद्र (STIC) और छह क्षेत्रीय अंतरिक्ष शैक्षणिक केंद्र (RACS) संचालित हैं। 
    • सतीश धवन अंतरिक्ष विज्ञान केंद्र:
      • हाल ही में सतीश धवन अंतरिक्ष विज्ञान केंद्र की स्थापना इसरो/डीओएस (ISRO/DoS) और केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू द्वारा संयुक्त रूप से की गई थी।
    • इसरो द्वारा यूनिस्पेस नैनोसेटेलाइट असेंबली और प्रशिक्षण:
      • जून 2018 में भारत द्वारा असेंबली एकीकरण और परीक्षण (AIT) पर हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण तथा सैद्धांतिक शोध के संयोजन द्वारा नैनो उपग्रहों के विकास पर क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘इसरो द्वारा यूनिस्पेस नैनोसेटेलाइट असेंबली एवं प्रशिक्षण’ (उन्नति-UNNATI)  की घोषणा की गई।
    • युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम:
      • वर्ष 2019 में इसरो ने सरकार के “जय विज्ञान, जय अनुसंधान” वाले दृष्टिकोण के अनुरूप “युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम” या “युवा विज्ञानी कर्यक्रम” (YUVIKA) नामक एक वार्षिक विशेष कार्यक्रम की शुरुआत की। 
      • कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाह्य अंतरिक्ष के आकर्षक क्षेत्र में युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिये अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विज्ञान और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों पर बुनियादी ज्ञान प्रदान करना है। 
    • स्पेसटेक इनोवेशन नेटवर्क (SpIN):
      • दिसंबर 2022 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और सोशल अल्फा ने स्पेसटेक इनोवेशन नेटवर्क (SpIN) लॉन्च करने के लिये एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये जो बढ़ते अंतरिक्ष उद्यमशीलता पारिस्थितिकी तंत्र के लिये नवाचार और उद्यम विकास हेतु भारत का पहला समर्पित मंच है।
  • सुधार और उद्योगों की भागीदारी में बढ़ोत्तरी:
    • न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL):
      •  वर्ष 2019 में न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) को भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्त्व वाले उपक्रम/ केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (CPSE) के रूप में शामिल किया गया
      • इसका उद्देश्य भारतीय उद्योगों में अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिये उच्च प्रौद्योगिकी विनिर्माण आधार को बढ़ाने और घरेलू तथा वैश्विक खरीदारों की आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के उत्पादों एवं सेवाओं का व्यावसायिक रूप से दोहन करने में सक्षम बनाना है।
      • GSAT-24 संचार उपग्रह जो कि NSIL का पहला मांग संचालित मिशन है, को जून 2022 में फ्रेंच गुयाना के कौरौ से लॉन्च किया गया था।
    • भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्द्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe): 
      • भारतीय अंतरिक्ष अवसंरचना का उपयोग करने के लिये निजी कंपनियों को समान अवसर प्रदान करने हेतु IN-SPACe लॉन्च किया गया था।
      • यह इसरो और अंतरिक्ष से संबंधित गतिविधियों में भाग लेने या भारत के अंतरिक्ष संसाधनों का उपयोग करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के बीच एकल-बिंदु इंटरफेस के रूप में कार्य करता है।
    • भारतीय अंतरिक्ष संघ (ISpA): 
      • ISpA भारतीय अंतरिक्ष उद्योग की सामूहिक अभिव्यक्ति बनेगा। ISpA का प्रतिनिधित्त्व प्रमुख घरेलू और वैश्विक निगमों द्वारा किया जाएगा जिनके पास अंतरिक्ष एवं उपग्रह प्रौद्योगिकियों में उन्नत क्षमताएँ हैं।
    • पहला निजी लॉन्चपैड और मिशन नियंत्रण केंद्र:
      • नवंबर 2022 में पहले निजी लॉन्चपैड और मिशन नियंत्रण केंद्र की स्थापना SDSC, शार के इसरो परिसर में मेसर्स अग्निकुल कॉसमॉस प्राइवेट लिमिटेड, चेन्नई द्वारा की गई।
    • भारतीय अंतरिक्ष नीति- 2022: 
      • भारतीय अंतरिक्ष नीति- 2022 को अंतरिक्ष आयोग द्वारा मंज़ूरी प्रदान की गई। इस नीति के लिये उद्योग समूहों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया, अंतर-मंत्रालयी परामर्श के साथ ही अधिकार प्राप्त प्रौद्योगिकी समूह द्वारा समीक्षा की गई और यह आगे की अनुमोदन प्रक्रिया के अंतर्गत है। 
    • आपदा प्रबंधन: 
      • बाढ़ की निगरानी, बाढ़ग्रस्त राज्यों के बाढ़ ज़ोखिम क्षेत्र एटलस का निर्माण, बाढ़ पूर्व चेतावनी मॉडल का विकास करना, कई दैनिक पहचान और वनाग्नि के प्रसार, चक्रवात ट्रैक (cyclone track) का पूर्वानुमान, भूकंप की तीव्रता तथा भूस्खलन, भूकंप एवं भूस्खलन के कारण हुए नुकसान का आकलन आदि। 
    • कोविड-19 संबंधी सहायता: 
      • कोविड-19 महामारी के दौरान मैकेनिकल वेंटिलेटर और मेडिकल ऑक्सीजन कंसंट्रेटर जैसे उपकरणों को विकसित किया गया तथा प्रौद्योगिकियों को भारतीय उद्योगों में स्थानांतरित किया गया। 

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)  

प्रिलिम्स:

प्रश्न.1 अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के संदर्भ में हाल ही में खबरों में रहा "भुवन" (Bhuvan) क्या है?  (2010)

 (A) भारत में दूरस्थ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये इसरो द्वारा लॉन्च किया गया एक छोटा उपग्रह
 (B) चंद्रयान-द्वितीय के लिये अगले चंद्रमा प्रभाव जाँच को दिया गया नाम
 (C) भारत की 3डी इमेजिंग क्षमताओं के साथ इसरो का एक जियोपोर्टल (Geoportal)
 (D) भारत द्वारा विकसित एक अंतरिक्ष दूरबीन

उत्तर: (C)


प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2016)

इसरो द्वारा प्रक्षेपित मंगलयान:

  1. इसे मंगल ऑर्बिटर मिशन भी कहा जाता है।
  2. इसके कारण अमेरिका के बाद मंगल ग्रह की परिक्रमा करने वाला भारत दूसरा देश बना । 
  3. इसने भारत को अपने अंतरिक्ष यान को अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह की परिक्रमा करने में सफल होने वाला एकमात्र देश बना दिया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)


मेन्स: 

प्रश्न. भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की क्या योजना है और इससे हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम को क्या लाभ होगा?  (2019)

प्रश्न. अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों की चर्चा कीजिये। इस प्रौद्योगिकी का प्रयोग भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास में किस प्रकार सहायक हुआ है? (2016)

स्रोत: पी.आई.बी.