संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार | 01 Feb 2023

प्रिलिम्स के लिये:

UNSC, UNSC की सदस्यता, संयुक्त राष्ट्र का शांति मिशन, मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (Universal Declaration of Human Rights- UDHR)

मेन्स के लिये:

UNSC के कामकाज से संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) अपने "वर्तमान स्वरूप" में "पंगु" और "निष्क्रिय" हो गई है क्योंकि यह रूस-यूक्रेन युद्ध पर कोई निर्णय लेने में अक्षम रही है।

संयुक्त राष्ट्र में सुधार में बाधाएँ:

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा हमेशा से विभाजित सी रही है। 193 देशों में वार्ता समूह की संख्या 5 है और वे केवल एक-दूसरे को संतुलित करने का कार्य कर रहे हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में सुधार सुनिश्चित करने के लिये महासभा का कामकाज़ उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना कि UNSC के स्थायी सदस्य का।
  • संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में सुधार को लेकर इसके स्थायी सदस्यों में बीते काफी समय से ही उत्साह की कमी देखी गई, लेकिन वे सभी इस बात पर सहमत हुए हैं कि सुरक्षा परिषद में बदलाव लाना आवश्यक है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद:

  • सुरक्षा परिषद की स्थापना वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर द्वारा की गई थी।
    • यह संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक है।
  • UNSC में सदस्यों की संख्या 15 हैं: 5 स्थायी सदस्य (P5) और 10 गैर-स्थायी सदस्य 2 वर्ष की अवधि के लिये चुने जाते हैं।
    • 5 स्थायी सदस्य हैं: संयुक्त राज्य अमेरिका, रूसी संघ, फ्राँस, चीन और यूनाइटेड किंगडम।
  • भारत ने UNSC में सात बार गैर-स्थायी सदस्य के रूप में कार्य किया है और जनवरी 2021 में 8वीं बार पुनः अस्थायी सदस्य के रूप में चुना गया है।

Unity-Security-council

UNSC से संबंधित मुद्दे:

  • पर्याप्त प्रतिनिधित्त्व का अभाव:
    • कई वक्ताओं द्वारा यह तर्क दिया जाता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद कम प्रभावी है क्योंकि यह कम प्रतिनिधिक है। 54 देशों के महाद्वीप अफ्रीका की अनुपस्थिति इसमें सर्वाधिक प्रासंगिक है।
    • वर्तमान वैश्विक मुद्दे जटिल और परस्पर संबद्ध हैं। भू-राजनीतिक एवं भू-आर्थिक रूप से महत्त्वपूर्ण देशों के प्रतिनिधित्त्व की कमी के कारण विश्व के एक बड़े भाग के लोग विश्व के सर्वोच्च सुरक्षा शिखर सम्मेलन में अपनी राय अभिव्यक्त करने से वंचित हैं।
    • इसके अलावा यह चिंता का विषय है कि भारत, जर्मनी, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका जैसे विश्व स्तर पर महत्त्वपूर्ण देशों का UNSC के स्थायी सदस्यों की सूची में प्रतिनिधित्त्व नहीं है।
  • वीटो पावर का दुरुपयोग:
    • कई विशेषज्ञों के साथ-साथ अधिकांश देशों द्वारा वीटो पावर की सदैव आलोचना की गई है जो इसे ‘विशेषाधिकार प्राप्त देशों के स्व-चयनित क्लब’ और गैर-लोकतांत्रिक व्यवस्था के रूप में देखते हैं। P5 देशों में से किसी की भी असंतुष्टि की स्थिति में परिषद आवश्यक निर्णय लेने में सक्षम नहीं है।
    • यह वर्तमान वैश्विक सुरक्षा वातावरण के लिये उपयुक्त नहीं है कि यह निर्णय लेने वाली विशिष्ट या अभिजात संरचनाओं द्वारा निर्देशित हो।
  • P5 देशों के बीच भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता:
    • स्थायी सदस्यों के बीच भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ने वैश्विक मुद्दों से निपटने के लिये एक प्रभावी तंत्र का विकास करने की UNSC की राह को अवरुद्ध कर रखा है।
    • P5 सदस्य देशों के रूप में वर्तमान वैश्विक व्यवस्था को देखें तो इनमें से तीन देश- संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन ऐसे देश हैं जो कुछ वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दों के केंद्र बिंदु हैं जैसे- ताइवान मुद्दा और रूस-यूक्रेन युद्ध का मुद्दा
  • राज्य की संप्रभुता के लिये खतरा:
    • अंतर्राष्ट्रीय शांति स्थापना और संघर्ष समाधान के प्रमुख अंग के रूप में UNSC शांति बनाए रखने तथा संघर्ष के प्रबंधन हेतु ज़िम्मेदार है। इसके निर्णय (जिन्हें संकल्प कहा जाता है) महासभा के विपरीत सभी सदस्य देशों पर बाध्यकारी होते हैं।
    • इसका अर्थ यह है कि प्रतिबंध लगाने जैसी कार्रवाई कर यदि आवश्यक हो तो किसी भी राज्य की संप्रभुता का अतिक्रमण किया जा सकता है।

आगे की राह

  • UNSC का लोकतंत्रीकरण:
    • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में P5 और अन्य देशों के बीच शक्ति असंतुलन को तत्काल दूर करने की आवश्यकता है ताकि परिषद को अधिक लोकतांत्रिक बनाया जा सके और अंतर्राष्ट्रीय शांति, सुरक्षा एवं व्यवस्था को नियंत्रित करने में इसकी वैधता बढ़ाई जा सके।
  • UNSC का विस्तार:
    • शांति और सुरक्षा के लिये वैश्विक शासन की बदलती आवश्यकताओं को देखते हुए UNSC में महत्त्वपूर्ण सुधारों की आवश्यकता है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिये जटिल और उभरती चुनौतियों से बेहतर ढंग से निपटने हेतु अपनी स्थायी तथा गैर-स्थायी सीटों का विस्तार करना शामिल है।
  • समान प्रतिनिधित्त्व:
    • UNSC में सभी क्षेत्रों का समान प्रतिनिधित्त्व राष्ट्रों पर इसकी शासन शक्ति और अधिकार के विकेंद्रीकरण के लिये महत्त्वपूर्ण है।
    • UNSC की निर्णय लेने की प्रक्रियाओं का विकेंद्रीकरण इसे एक अधिक प्रतिनिधित्त्व, सहभागी निकाय के रूप में स्थापित करेगा।
  • भारत की भूमिका:
    • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के वर्तमान गैर-स्थायी सदस्य के रूप में भारत UNSC में सुधार के प्रस्तावों के व्यापक सेट वाले एक संकल्प का मसौदा तैयार कर सकता है।
    • सितंबर 2022 में भारत ने UN महासभा के मौके पर न्यूयॉर्क में दो अलग-अलग समूहों G-4 और L-69 की बैठक की मेज़बानी करते हुए UNSC में सुधार पर ज़ोर दिया।
    • जैसा कि भारत ग्लोबल साउथ का नेतृत्त्व करता है, उसे UNSC में अपनी शांति और सुरक्षा चिंताओं को स्पष्ट कर "ग्लोबल साउथ" में अपने पारंपरिक भागीदारों के साथ मज़बूती से पुनः जुड़ने की आवश्यकता है।

 UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न: 

प्रिलिम्स:

प्रश्न. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 5 स्थायी सदस्य होते हैं और शेष 10 सदस्य महासभा द्वारा कितनी अवधि के लिये चुने जाते हैं? (2009)

(a) 1 वर्ष
(b) 2 वर्ष
(c) 3 वर्ष
(d) 5 वर्ष

उत्तर: (b)


प्रश्न. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता लेने हेतु भारत के सामने आने वाली बाधाओं पर चर्चा कीजिये। (2015)

स्रोत: द हिंदू