i-ऑन्कोलॉजी AI प्रोजेक्ट | 20 Feb 2024

प्रिलिम्स के लिये:

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, प्रगत संगणन विकास केंद्र, सुपर कंप्यूटर, जीनोमिक डेटा, जीनोमिक अनुक्रमण, नेशनल कैंसर ग्रिड, राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस

मेन्स के लिये:

चिकित्सा विज्ञान, वैज्ञानिक नवाचारों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अनुप्रयोग

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

चर्चा में क्यों?

चिकित्सा नवाचार में अग्रणी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दिल्ली के शोधकर्त्ताओं ने “i-ऑन्कोलॉजी AI प्रोजेक्ट” नामक एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)-संचालित मॉडल विकसित किया है जिसमें एक सुपर कंप्यूटर एकीकृत किया गया है। यह मॉडल ऑन्कोलॉजिस्टों को कैंसर के उपचार के संबंध में निर्णय लेने में सहायता करेगा।

i-ऑन्कोलॉजी AI प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?

  • परिचय:
    • i-ऑन्कोलॉजी AI प्रोजेक्ट AIIMS, दिल्ली और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC), पुणे तथा इलेक्‍ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त प्रयसों द्वारा विकसित किया गया है। यह भागीदारी कैंसर के निदान दक्षता लाने हेतु चिकित्सा अनुसंधान और कंप्यूटेशनल विज्ञान को एक साथ लाती है।
    • इसका उद्देश्य AI का उपयोग कर कैंसर के उपचार की सटीकता और प्रभावकारिता बढ़ाना है और साथ ही आनुवंशिक प्रोफाइल, नैदानिक ​​इतिहास और उपचार परिणामों को शामिल करने वाले व्यापक डेटासेट का विश्लेषण कर आनुवंशिकी तथा कैंसर चिकित्सा की जटिल परस्पर क्रिया को उजागर करना है।
  • कार्य पद्धति:
    • सी-डैक के साथ विकसित यह प्लेटफॉर्म रक्त परीक्षण, लैब रिपोर्ट, स्कैन एवं रोगी के रिकॉर्ड सहित कैंसर से संबंधित विभिन्न डेटा को संग्रहीत करने के साथ-साथ विश्लेषण भी करता है।
    • उन्नत एल्गोरिदम का उपयोग करते हुए, AI-सक्षम प्लेटफॉर्म डॉक्टरों को व्यापक जीनोमिक डेटा विश्लेषण के आधार पर उपचार निर्णय लेने में सहायता करता है, जिससे रोगियों के लिये उपचार योजना तैयार करने में सहायता प्राप्त होती है।
      • हज़ारों कैंसर रोगियों के नैदानिक डेटा एवं जीनोमिक संरचना का अध्ययन करके चिकित्सीय परिणामों में सुधार करते हुए उपचार की सिफारिशें कर सकता है।
    • यह उपकरण विशेष रूप से तब सहायक होता है जब सीमित संसाधन उपलब्ध होते हैं क्योंकि यह चिकित्सकों को अधिक केंद्रित उपचार निर्णय लेने के साथ स्वास्थ्य सेवा वितरण में सुधार करने में मदद करता है।
      • प्लेटफॉर्म नैदानिक निर्णय लेने के लिये एक उपयोगी उपकरण है, लेकिन यह चिकित्सकों का स्थान नहीं ले सकता है। यह स्कैन तथा रिपोर्ट में असामान्यताओं की स्वचालित रूप से पहचान करके काम करता है।
  • ब्रेस्ट तथा डिम्बग्रंथि कैंसर पर ध्यान देना:
    • भारत में महिलाओं में ब्रेस्ट तथा डिम्बग्रंथि कैंसर की व्यापकता को देखते हुए, i-ऑन्कोलॉजी, AI का प्रारंभिक अनुप्रयोग इन कैंसर का शीघ्र पता लगाने पर केंद्रित है।
  • प्रभाव:
    • i-ऑन्कोलॉजी,AI प्लेटफॉर्म ब्रेस्ट एवं डिम्बग्रंथि के कैंसर का शीघ्र पता लगाने के साथ उपचार के माध्यम से कैंसर रोगियों के परिणामों तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है।
    • यह स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों की दक्षता के साथ उत्पादकता को बढ़ाकर एवं संसाधन उपयोग को अनुकूलित करके कैंसर देखभाल के बोझ तथा लागत को भी कम करता है। इसके अतिरिक्त यह आगे के विश्लेषण एवं विकास के लिये मूल्यवान अंतर्दृष्टि और डेटा प्रदान करके कैंसर अनुसंधान के साथ नवाचार में भी योगदान देता है।

जीनोमिक डेटा

  • जीनोमिक डेटा के संदर्भ किसी जीव के जीनोम की संरचना एवं उसकी कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी से होता है।
  • यह चिकित्सा अनुसंधानकर्त्ताओं एवं डॉक्टरों के लिये एक शक्तिशाली उपकरण है। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिलती है कि DNA में भिन्नताएँ हमारे स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करती हैं।
  • जीनोमिक अनुक्रमण के माध्यम से, वे एक रोगी की आनुवंशिक संरचना को समझते हैं और जीन में परिवर्तन का पता लगाते हैं। ये परिवर्तन यह समझने के लिये महत्त्वपूर्ण हैं कि कैंसर जैसी बीमारियाँ किस प्रकार विकसित होती हैं

वैश्विक कैंसर परिदृश्य

  • कैंसर रोगों का एक जटिल समूह है जो शरीर में असामान्य कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि और प्रसार के रूप में पहचाना जाता है।
    • ये कोशिकाएँ, जिन्हें कैंसर कोशिकाएँ कहा जाता है, स्वस्थ ऊतकों और अंगों पर आक्रमण कर उन्हें नष्ट कर सकती हैं।
  • एक स्वस्थ शरीर में, कोशिकाएँ विनियमित रूप से बढ़ती हैं, विभाजित होती हैं व नष्ट हो जाती हैं, लेकिन कैंसर के मामले में, आनुवंशिक उत्परिवर्तन इस सामान्य कोशिका चक्र को बाधित करते हैं, जिससे अनियंत्रित वृद्धि होती है और  ट्यूमर का निर्माण हो सकता है।
  • ग्लोबल कैंसर ऑब्ज़र्वेटरी (GLOBOCAN) के वर्ष 2020 के अनुमान के अनुसार विश्व भर में 19.3 मिलियन कैंसर के मामले सामने आए हैं, जिसमें भारत, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद तीसरे स्थान पर है।
  • लैंसेट के एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2040 तक भारत में कैंसर के मामलों में 57.5% की वृद्धि होगी, जो 2.08 मिलियन तक पहुँच जाएगी। अकेले वर्ष 2022 में, कैंसर से, मुख्य रूप से देर से पता चलने के कारण भारत में 8 लाख से अधिक मौतें हुईं, जिसके परिणामस्वरूप जीवित रहने की दर केवल 20% थी।

कैंसर के उपचार से संबंधित सरकारी पहल क्या हैं?

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स:

प्रश्न 1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2010)

  1. टैक्सस ट्री प्राकृतिक रूप से हिमालय में पाया जाता है। 
  2. टैक्सस ट्री रेड डेटा बुक में सूचीबद्ध है। 
  3. "टैक्सोल" नामक दवा टैक्सस ट्री से प्राप्त की जाती है और पर्किंसंस रोग के निवारण हेतु प्रभावी है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)


प्रश्न. विकास की वर्तमान स्थिति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) निम्नलिखित में से किस कार्य को प्रभावी रूप से कर सकती है? (2020)

  1. औद्योगिक इकाइयों में विद्युत की खपत कम करना  
  2. सार्थक लघु कहानियों और गीतों की रचना  
  3. रोगों का निदान  
  4. टेक्स्ट-टू-स्पीच में परिवर्तन  
  5. विद्युत ऊर्जा का बेतार संचरण

नीचे दिये गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1, 2, 3 और 5
(b) केवल 1, 3 और 4
(c) केवल 2, 4 और 5
(d) 1, 2, 3, 4 और 5

उत्तर: (b)


प्रश्न.1 अनुप्रयुक्त जैव-प्रौद्योगिकी में शोध तथा विकास-संबंधी उपलब्धियाँ क्या हैं? ये उपलब्धियाँ समाज के निर्धन वर्गों के उत्थान में किस प्रकार सहायक होंगी? (2021)

प्रश्न. 2 नैनोटेक्नोलॉजी से आप क्या समझते हैं और यह स्वास्थ्य क्षेत्र में कैसे मदद कर रही है? (2020)