सब्सिडी और जलवायु परिवर्तन | 19 Jun 2023

प्रिलिम्स के लिये:

विश्व बैंक, सकल घरेलू उत्पाद, वायु प्रदूषण, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, जलवायु परिवर्तन

मेन्स के लिये:

सब्सिडी के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव, सब्सिडी से संबंधित चुनौतियाँ 

चर्चा में क्यों? 

विश्व बैंक की एक हालिया रिपोर्ट में कृषि, मत्स्यन और जीवाश्म ईंधन उद्योगों को अकुशल रूप से  सब्सिडी देने पर खरबों डॉलर खर्च किये जाने के हानिकारक प्रभावों पर प्रकाश डाला गया है, जो जलवायु परिवर्तन को बढ़ाता है।

  • इस रिपोर्ट में बताया गया है कि तीन क्षेत्रों में 7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की सब्सिडी दी गई, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के 8% के बराबर है।

प्रमुख बिंदु  

  • जीवाश्म ईंधन सब्सिडी और जलवायु परिवर्तन: 
    • यह रिपोर्ट प्रदूषण फैलाने वाले ईंधनों हेतु प्रोत्साहन को कम करने की सीमित प्रभावशीलता को स्वीकार करती है, क्योंकि ऊर्जा की मांग मूल्य में परिवर्तन के प्रति अत्यधिक उत्तरदायी नहीं है।
    • वर्ष 2021 में देशों ने तेल, गैस और कोयले जैसे प्रदूषणकारी ईंधन की कीमतों को कम करने के उद्देश्य से सब्सिडी पर 577 बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च किये।
      • ये उपाय जीवाश्म ईंधन के अत्यधिक उपयोग को प्रोत्साहित करते हैं और वायु प्रदूषण में योगदान करते हैं, विशेष रूप से उच्च स्वास्थ्य बोझ वाले मध्य-आय वाले देशों के औद्योगीकरण में।
    • इस रिपोर्ट में धन के असमान आवंटन पर प्रकाश डाला गया है, क्योंकि अधिकांश देश वर्ष 2015 के पेरिस समझौते के तहत की गई प्रतिबद्धताओं की तुलना में जीवाश्म ईंधन की खपत को सब्सिडी देने पर छह गुना अधिक खर्च करते हैं।
  • अक्षम कृषि सब्सिडी: 
    • सुलभ डेटा वाले देशों में कृषि क्षेत्र में प्रत्यक्ष सब्सिडी लगभग 635 बिलियन अमेरिकी डॉलर सालाना है, जबकि वैश्विक अनुमान 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है।
      • यह सब्सिडी किसानों को विशिष्ट इनपुट खरीदने या विशेष फसलों की खेती करने हेतु लक्षित करती है।
    • इस रिपोर्ट में प्रकाशित शोध इंगित करता है कि सब्सिडी धनी किसानों के पक्ष में होती है, भले ही कार्यक्रमों को गरीबों को लक्षित करने हेतु डिज़ाइन किया गया हो।
    • पिछले 30 वर्षों में अपर्याप्त सब्सिडी के परिणामस्वरूप जल में सभी नाइट्रोजन प्रदूषण 17% तक बढ़ गया है, जिससे स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है और श्रम उत्पादकता में 3.5% तक की कमी आई है।
  • मत्स्य क्षेत्र में दी जाने वाली सब्सिडी: 
    • मत्स्यिकी क्षेत्र को अनुमानित तौर पर प्रतिवर्ष 35.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर की सब्सिडी प्रदान की जाती है, जिसमें से 22.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर ओवरफिशिंग में चला जाता है।
      • ओवरफिशिंग मत्स्यिकी क्षेत्र के लिये एक महत्त्वपूर्ण कारक है, मछली के स्टॉक में कमी आने और फिशिंग रेंट को कम करने में यह महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
    • मत्स्य पालन को स्थायी रूप से प्रबंधित नहीं किये जाने की स्थिति में सब्सिडी का नकारात्मक प्रभाव और भी अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगता है।
      • शेष मछली स्टॉक को सुरक्षित करने के लिये अतिरिक्त फिशिंग क्षमता को प्रोत्साहित किये बिना सब्सिडी का नए तरीके से उपयोग किया जाना चाहिये।

सब्सिडी के सकारात्मक प्रभाव: 

  • कृषि:  
    • आय में सहायता: सब्सिडी से किसानों को आय में सहायता प्राप्त हो सकती है, इससे उन्हें मूल्य में उतार-चढ़ाव, बाज़ार की अनिश्चितताओं और उत्पादन जोखिमों से निपटने में मदद मिलती है। 
    • उत्पादन में वृद्धि: उर्वरक, बीज और सिंचाई जैसे इनपुट पर सब्सिडी से कृषि उत्पादन में वृद्धि को बढ़ावा मिल सकता है।
      • पोषक तत्त्व आधारित सब्सिडी (NBS) योजना के माध्यम से उर्वरकों के लिये भारत सरकार का समर्थन किसानों को उचित मूल्य पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करता है।
  • मछली पकड़ना: 
    • आधुनिकीकरण और आधारभूत संरचना विकास: मत्स्य पालन क्षेत्र में सब्सिडी मछली पकड़ने की प्रथाओं के आधुनिकीकरण और बुनियादी ढाँचे के विकास में सहायता कर सकती है।
      • इससे उत्पादकता में वृद्धि, सुरक्षा उपायों में सुधार और बेहतर भंडारण सुविधाएँ सुनिश्चित हो सकती हैं।
      • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) का उद्देश्य बुनियादी ढाँचे के विकास सहित विभिन्न हस्तक्षेपों के माध्यम से मछली उत्पादन और मछुआरों के कल्याण को बढ़ाना है।
    • आजीविका सहायता: सब्सिडी विशेष रूप से खराब मौसम और प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों के दौरान मछुआरों को आजीविका सहायता प्रदान कर सकती है।
      • मछुआरों के कल्याण की राष्ट्रीय योजना जैसी योजनाएँ मछुआरों को नावों के निर्माण और मरम्मत, सुरक्षा उपकरणों की आपूर्ति तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिये वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं।
  • जीवाश्म ईंधन:
    • ऊर्जा की पहुँच और सामर्थ्य: LPG (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) एवं मिट्टी तेल जैसे जीवाश्म ईंधन पर सब्सिडी, समाज के कमज़ोर वर्गों के लिये ऊर्जा की पहुँच और सामर्थ्य सुनिश्चित कर सकती है।
      • भारत सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) का उद्देश्य LPG के उपयोग में वृद्धि को प्रोत्साहित करना और वायु प्रदूषण, वनों की कटाई तथा स्वास्थ्य विकारों को कम करना था

सब्सिडी से संबंधित चुनौतियाँ:  

  • राजकोषीय बोझ: सब्सिडी के कारण अक्सर सरकार पर काफी राजकोषीय बोझ पड़ता है।
    • सब्सिडी की लागत के कारण सरकार के वित्त पर दबाव पड़ सकता है और इससे स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढाँचे के विकास जैसे अन्य महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों को संसाधन आवंटित करने की क्षमता पर प्रभाव पड़ने की काफी संभावना होती है।
    • राजकोषीय स्थिरता के साथ सब्सिडी की आवश्यकता को संतुलित करना एक निरंतर चुनौती है।
  • अकुशल लक्ष्यीकरण: लक्षित लाभार्थियों तक सब्सिडी की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करना प्रमुख चुनौतियों में से एक है।
    • अपात्र व्यक्तियों अथवा संस्थाओं द्वारा सब्सिडी का गलत उपयोग करने का भी जोखिम बना रहता है।
    • सब्सिडी का सफल अंतरण हो और सब्सिडी लक्षित प्राप्तकर्त्ताओं को लाभान्वित करे, यह सुनिश्चित करने के लिये लाभार्थी की उचित पहचान तथा लक्ष्यीकरण तंत्र अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
  • बाज़ार संबंधी विकृतियाँ: सब्सिडी से बाज़ार की गतिशीलता पर प्रभाव पड़ सकता है। सब्सिडी के कारण कुछ वस्तुओं का अतिउत्पादन हो सकता है या फिर अधिक खपत भी हो सकती है जिससे बाज़ार में असंतुलन और मूल्य संबंधी विकृतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
    • ये विकृतियाँ इस क्षेत्र की प्रतिस्पर्द्धात्मकता को प्रभावित कर सकती हैं और एक स्थायी तथा बाज़ार उन्मुख कृषि, मत्स्य अथवा ऊर्जा क्षेत्र के विकास में बाधा उत्पन्न कर सकती हैं।
  • पर्यावरणीय प्रभाव: जीवाश्म ईंधन पर सब्सिडी स्वच्छ और अधिक धारणीय ऊर्जा स्रोतों के संक्रमण को हतोत्साहित कर सकती है।
    • वे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को बनाए रख सकते हैं जो पर्यावरण क्षरण, वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन में योगदान दे सकते हैं।

आगे की राह  

  • लक्षित सब्सिडी सुधार:  लक्षित लाभार्थियों तक सब्सिडी की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करने के लिये लक्षित सब्सिडी सुधारों को लागू किये जाने की आवश्यकता है।
  • सब्सिडी में धीरे-धीरे कटौती और युक्तिकरण: राजकोषीय स्थिरता सुनिश्चित करने और बाज़ार संबंधी विकृतियों को कम करने के लिये सब्सिडी को धीरे-धीरे कम करना तथा युक्तिसंगत बनाना।
    • सब्सिडी में पूरी तरह से कटौती के करने बजाय इसके लिये चरणबद्ध दृष्टिकोण का उपयोग किया जा सकता है जिसके तहत संपन्न लोगों के लिये सब्सिडी कम करने पर ध्यान केंद्रित करना प्रमुख विषय रहा है। सब्सिडी से बचत किये गए इस वित्त का उपयोग संबंधित क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे, अनुसंधान और विकास तथा क्षमता निर्माण में किया जा सकता है।
  • स्थायी प्रथाओं को बढ़ावा देना: सब्सिडी के माध्यम से कृषि, मत्स्य पालन और ऊर्जा क्षेत्रों में स्थायी प्रथाओं को अपनाने हेतु प्रोत्साहित किया जाना चाहिये। 
    • इसमें जैविक कृषि तकनीकों, कुशल सिंचाई प्रणालियों, पर्यावरण के अनुकूल मत्स्य पालन के तरीकों और नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के उपयोग के लिये प्रोत्साहन राशि प्रदान करना शामिल हो सकता है।
    • सब्सिडी को नवाचार, उत्पादकता में सुधार और पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करने हेतु डिज़ाइन किया जाना चाहिये।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स:

प्रश्न. भारत में रासायनिक उर्वरकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2020

  1. वर्तमान में रासायनिक उर्वरकों का खुदरा मूल्य बाज़ार-संचालित है और यह सरकार द्वारा नियंत्रित नहीं है। 
  2. अमोनिया जो यूरिया बनाने में काम आता है, प्राकृतिक गैस से उत्पन्न होता है। 
  3. सल्फर जो फॉस्फोरिक अम्ल उर्वरक के लिये कच्चा माल है, तेल शोधन कारखानों का उपोत्पाद है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 
(b) केवल 2 और 3 
(c) केवल 2  
(d) 1, 2 और 3 

उत्तर: (b) 


मेन्स:

प्रश्न. सहायिकियाँ सस्य प्रतिरूप, सस्य विविधता और कृषकों की आर्थिक स्थिति को किस प्रकार प्रभावित करती हैं? लघु और सीमांत कृषकों के लिये फसल बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य एवं खाद्य प्रसंस्करण का क्या महत्त्व है? (2017) 

प्रश्न. प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डी.बी.टी.) द्वारा कीमत सहायिकी का प्रतिस्थापन भारत में सहायिकियों के परिदृश्य का किस प्रकार परिवर्तन कर सकता है? चर्चा कीजिये। (2015) 

प्रश्न. राष्ट्रीय व राजकीय स्तर पर कृषकों को दी जाने वाली विभिन्न प्रकार की आर्थिक सहायताएँ कौन-कौन सी हैं? कृषि आर्थिक सहायता व्यवस्था का उसके द्वारा उत्पन्न विकृतियों के संदर्भ में आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिये। (2013) 

स्रोत: डाउन टू अर्थ