वित्त वर्ष 2025-26 में स्टार्टअप इंडिया की रिकॉर्ड वृद्धि | 20 Apr 2026

स्रोत: पीआईबी

हाल ही में सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 55,200 से अधिक स्टार्टअप को मान्यता दी है, जो स्टार्टअप इंडिया पहल की शुरुआत के बाद से किसी एक वर्ष में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की सर्वाधिक संख्या है, जो इनोवेशन, फंडिंग और रोज़गार में मज़बूत वृद्धि को दर्शाता है।

  • मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की कुल संख्या 2.23 लाख के पार पहुँच गई है, जिनसे 23.36 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोज़गार सृजित हुए हैं।
  • वित्त वर्ष 2025-26 में स्टार्टअप को मान्यता मिलने में 51.6% की बढ़ोतरी हुई, जबकि रोज़गार में 36.1% की बढ़ोतरी हुई।

स्टार्टअप इंडिया पहल

  • परिचय: वर्ष 16 जनवरी, 2016 को प्रारंभ की गई इस योजना का मुख्य लक्ष्य उद्यमियों को प्रोत्साहित करना, स्टार्टअप इकोसिस्टम को सुदृढ़ बनाना और भारत को रोज़गार पाने वाली अर्थव्यवस्था के स्थान पर रोज़गार प्रदाता अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करना है
    • उद्यमियों द्वारा स्थापित स्टार्टअप एक नवीन या नवनिर्मित कंपनी है, जिसका उद्देश्य बाज़ार में नया उत्पाद या सेवा प्रदान करना, मौजूदा व्यवस्था में बदलाव करना अथवा पूरी तरह से नए बाज़ार का निर्माण करना है।
    • स्टार्टअप इंडिया पहल का कार्यान्वयन उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) के अंतर्गत एक समर्पित स्टार्टअप इंडिया टीम द्वारा किया जाता है।
  • प्रमुख लक्ष्य: इसका उद्देश्य नियमों को सरल बनाकर और संस्थापकों को सहायता प्रदान कर नवाचार व उद्यमिता को बढ़ावा देना है। साथ ही, यह निवेश के अवसरों को सुगम बनाने और व्यापक स्तर पर रोज़गार उत्पन्न कर निरंतर आर्थिक प्रगति सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।
  • प्रमुख योजनाएँ और सहायक स्तंभ:
    • स्टार्टअप्स के लिये फंड ऑफ फंड्स (FFS): स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लान के तहत DPIIT की एक प्रमुख पहल, जिसका प्रबंधन स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) द्वारा किया जाता है, जिसमें स्टार्टअप्स में निवेश करने वाले SEBI-पंजीकृत AIF का समर्थन करने के लिये 10,000 करोड़ रुपये का कोष है।
    • स्टार्टअप्स के लिये क्रेडिट गारंटी योजना (CGSS): यह योजना पात्र वित्तीय संस्थानों के माध्यम से स्टार्टअप्स को बिना किसी गारंटी के ऋण उपलब्ध कराती है और इसका संचालन नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (NCGTC) द्वारा किया जाता है।
    • स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम (SISFS): इसके अंतर्गत 945 करोड़ रुपये का कोष निर्धारित किया गया है जिसके माध्यम से यह योजना प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट, प्रोटोटाइपिंग और बाज़ार में प्रवेश जैसी प्रारंभिक चरण की आवश्यकताओं के लिये वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
    • स्टार्टअप इंडिया हब: एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म जो स्टार्टअप्स को निवेशकों, सलाहकारों, इनक्यूबेटरों, शैक्षणिक संस्थानों, कॉरपोरेट्स और सरकारी निकायों से जोड़ता है, जिससे भारत के उद्यमशीलता पारिस्थितिक तंत्र में सहयोग संभव हो पाता है।
    • राज्यों का स्टार्टअप रैंकिंग फ्रेमवर्क (SRF): यह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का उनकी स्टार्टअप-अनुकूल नीतियों और कार्यान्वयन के आधार पर मूल्यांकन करता है, जो भारत के उद्यमशीलता इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने के लिये प्रतिस्पर्द्धी संघवाद को बढ़ावा देती है। इस फ्रेमवर्क के तहत, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले, शीर्ष प्रदर्शन करने वाले, अग्रणीय, महत्वाकांक्षी अग्रणीय और उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जो स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और स्टार्टअप प्रशासन में निरंतर सुधार को प्रोत्साहित करते हैं।
    • मेंटरशिप और नेटवर्किंग: मेंटरशिप, एडवाइज़री, असिस्टेंस, रेजिलिएंस और ग्रोथ (MAARG) पोर्टल एवं स्टार्टअप इंडिया इन्वेस्टर कनेक्ट पोर्टल जैसी पहलें संस्थापकों, मेंटरों और निवेशकों के बीच के अंतर को कम करती हैं।

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