स्टैगफ्लेशन | 06 Jun 2022

प्रिलिम्स के लिये:

स्टैगफ्लेशन, मुद्रास्फीति, मंदी। 

मेन्स के लिये:

स्टैगफ्लेशन से संबंधित चिंताएंँ और आगे की राह।

चर्चा में क्यों?  

विश्व भर के केंद्रीय बैंक यह सुनिश्चित करने के लिये नीतियांँ बनाने का प्रयास कर रहे हैं कि अमेरिका सहित कुछ उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति को मंदी को ट्रिगर किये बिना नियंत्रित किया जा सके, क्योंकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में स्टैगफ्लेशन की संभावना है। 

स्टैगफ्लेशन: 

  • परिचय: 
    • स्टैगफ्लेशन का अर्थ है कीमतों में एक साथ वृद्धि और आर्थिक विकास की स्थिरता की विशेषता वाली स्थिति। 
      • स्टैगफ्लेशन शब्द नवंबर 1965 में यूनाइटेड किंगडम में कंज़र्वेटिव पार्टी के सांसद इयान मैकलेओड द्वारा गढ़ा गया था। 
    • इसे अर्थव्यवस्था में एक ऐसी स्थिति के रूप में वर्णित किया जाता है जहांँ विकास दर धीमी हो जाती है, बेरोज़गारी का स्तर लगातार ऊंँचा रहता है, फिर भी मुद्रास्फीति या मूल्य स्तर एक ही समय में उच्च रहता है। 
    • यह स्थिति अर्थव्यवस्था के लिये खतरनाक होती है। 
      • आमतौर पर कम विकास की स्थिति में केंद्रीय बैंक और सरकारें मांग पैदा करने के लिये उच्च सार्वजनिक खर्च एवं कम ब्याज दरों के माध्यम से अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने का प्रयास करती हैं। 
      • ये उपाय भी कीमतों को बढ़ाते हैं और मुद्रास्फीति का कारण बनते हैं। इसलिये इन उपकरणों को तब नहीं अपनाया जा सकता है जब मुद्रास्फीति पहले से ही उच्च स्तर पर हो, जिससे कम वृद्धि-उच्च मुद्रास्फीति के जाल से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। 

Stagflation

  • स्टैगफ्लेशन का मुद्दा: 
    • वर्ष 1970 के दशक की शुरुआत और मध्य में जब ओपेक (पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन), जो कि एक कार्टेल की तरह काम करता है, ने आपूर्ति में कटौती करने का फैसला किया और दुनिया भर में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की। 
    • एक ओर तेल की कीमतों में वृद्धि ने उन अधिकांश पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं की उत्पादक क्षमता को बाधित कर दिया, जो तेल पर बहुत अधिक निर्भर थीं, इस प्रकार आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न हुई। दूसरी ओर तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण भी मुद्रास्फीति की स्थिति उत्पन्न होने के साथ ही वस्तुएँ अधिक महंगी हो गईं। 
    • उदाहरण के लिये वर्ष 1974 में तेल की कीमतों में लगभग 70% की वृद्धि हुई और इसके परिणामस्वरूप मुद्रास्फीति में भी वृद्धि देखी गई। 

स्टैगफ्लेशन के संदर्भ में नवीनतम चिंताएँ: 

  • कोविड-19 और उसके बाद के वित्तीय एवं मौद्रिक उपाय: 
    • कोविड-19 महामारी के प्रकोप और वायरस के प्रसार को रोकने के लिये लगाए गए प्रतिबंध दुनिया भर में पहली बड़ी आर्थिक मंदी का कारण बने, परिणामस्वरूप अधिकांश उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में तरलता में पर्याप्त वृद्धि सहित मंदी को दूर करने के लिये किये गए राजकोषीय और मौद्रिक उपायों ने मुद्रास्फीति में तीव्र उछाल को बढ़ावा दिया है। 
  • रूस-यूक्रेन की स्थिति और मास्को पर प्रतिबंध: 
    • फेड और बैंक ऑफ इंग्लैंड केंद्रीय बैंकों में से हैं जिन्होंने बढ़ती कीमतों को कम करने के लिये ब्याज दरों में वृद्धि करना शुरू कर दिया है, रूस द्वारा अपने दक्षिणी पड़ोसी देश पर आक्रमण और मॉस्को पर परिणामी पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद यूक्रेन में चल रहे युद्ध ने परिस्थितियों को और भी जटिल बना दिया है। 
  • आपूर्ति कारक: 
    • संघर्ष के कारण तेल और गैस से लेकर खाद्यान्न, खाद्य तेल एवं उर्वरक तक सभी वस्तुओं की कीमतों में वृद्धिे होने से अधिकारियों को मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिये एक कठिन स्थिति का सामना करना पड़ रहा है जो अब मांग आधारित नहीं है (इसलिये इसे साख/ ऋण को विनियमित करके नियंत्रित किया जा सकता है) और लगभग पूरी तरह से आपूर्ति कारकों पर निर्भर है जिन्हें प्रबंधित करना कहीं अधिक कठिन है। 

आगे की राह : 

  • क्षतिपूर्ति के लिये एक सतत् और समावेशी नीतिगत समर्थन की लंबे समय तक आवश्यकता हो सकती है। 
  • विवेकपूर्ण नीतियों के सामान्यीकरण और सार्वजनिक तथा निजी ऋण के अत्यधिक होने सहित दिवाला ढाँचे एवं पुनर्गठन तंत्र को मज़बूत करने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। 

स्रोत : द हिंदू