शक्सगाम घाटी विवाद | 14 Jan 2026
भारत ने शक्सगाम घाटी में चीन द्वारा की जा रही अवसंरचनात्मक गतिविधियों को अस्वीकार करते हुए, चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के अंतर्गत संचालित परियोजनाओं को अवैध एवं अमान्य घोषित किया तथा यह स्पष्ट किया कि शक्सगाम घाटी भारत का अविभाज्य अंग है।
शक्सगाम घाटी
- परिचय: शक्सगाम घाटी (ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट) काराकोरम पर्वतमाला के पूर्वी भाग में ऊँचाई पर स्थित एक विरल आबादी वाला क्षेत्र है। यह सियाचिन हिमनद के उत्तर में अवस्थित है, जो पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) के हुंजा–गिलगित क्षेत्र का भाग है तथा उत्तर दिशा में चीन के शिनजियांग प्रांत से सीमा साझा करता है।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: वर्ष 1947 से पूर्व यह क्षेत्र जम्मू एवं कश्मीर रियासत का अभिन्न अंग था। वर्ष 1947–48 के भारत–पाक संघर्ष के उपरांत पाकिस्तान ने इसके कुछ भागों पर कब्जा कर लिया तथा 1963 के चीन–पाकिस्तान सीमा समझौते के अंतर्गत शक्सगाम घाटी को चीन को सौंप दिया।
- भारत वर्ष 1963 के इस समझौते को अवैध मानता है, क्योंकि भारत के अनुसार पाकिस्तान को जम्मू–कश्मीर एवं लद्दाख से संबंधित भू-भाग के हस्तांतरण का कोई वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं था।
- वर्तमान प्रशासन: वर्तमान में यह क्षेत्र चीन के प्रशासनिक नियंत्रण में है और शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र के अंतर्गत प्रशासित किया जा रहा है, जहाँ चीन द्वारा CPEC से संबद्ध सड़कों सहित व्यापक अवसंरचनात्मक विकास किया गया है।
- CPEC का प्रमुख उद्देश्य पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को चीन के काशगर (शिनजियांग) से जोड़ना है, जिससे चीन को मलक्का जलडमरूमध्य को बायपास करते हुए एक वैकल्पिक ऊर्जा आपूर्ति मार्ग प्राप्त हो सके।
- रणनीतिक एवं सैन्य महत्त्व: सियाचिन हिमनद के निकट इसकी अवस्थिति पाकिस्तान की सैन्य तैनाती पर निगरानी की सामरिक क्षमता प्रदान करती है, जबकि काराकोरम दर्रे तक पहुँच चीन की सैन्य गतिविधियों पर सतत निगरानी में सहायक सिद्ध होती है।
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