AI वारफेयर के युग में भारत की सुरक्षा | 11 Mar 2026
प्रिलिम्स के लिये: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डीपफेक, इंडियाAI मिशन, इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026, सर्वम AI, भारतजेन परम2, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, बौद्धिक संपत्ति, सेमीकंडक्टर, डिजिटल लिटरेसी।
मेन्स के लिये: राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता के शस्त्रीकरण से उत्पन्न खतरे, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के शस्त्रीकरण के युग में राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिये भारत द्वारा आवश्यक कदम।
चर्चा में क्यों?
रक्षा, निगरानी और भू-राजनीति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते उपयोग ने 'AI संप्रभुता' (AI Sovereignty) पर विमर्श को तेज़ कर दिया है, जो भारत जैसे देशों के लिये राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता के रूप में इसके महत्त्व को रेखांकित करता है।
सारांश
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) राष्ट्रीय सुरक्षा के परिदृश्य को रूपांतरित कर रही है, जिसके परिणामस्वरूप रणनीतिक लाभ के साथ-साथ गंभीर खतरे भी उत्पन्न हो रहे हैं। भारत को स्वायत्त हथियारों, साइबर हमलों, दुष्प्रचार और जैविक हथियारों से संबंधित खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
- अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिये, भारत को स्वदेशी एआई क्षमताओं का निर्माण करना होगा, डेटा अवसंरचना को सुरक्षित करना होगा, नियामक ढाँचे स्थापित करने होंगे और मज़बूत रक्षा के लिये वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा देना होगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रोत्साहन देने के लिये AI का उपयोग किस प्रकार तेज़ी से बढ़ रहा है ?
- सैन्य सटीकता में वृद्धि: घातक अभियानों के लिये सैन्य सटीकता बढ़ाने हेतु AI को सीधे युद्ध संचालन में शामिल किया जा रहा है। उदाहरण: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाने वाले ऑपरेशन रोरिंग लायन में अमेरिकी सेना द्वारा एंथ्रोपिक के क्लाउड मॉडल का उपयोग, हमास आतंकवादियों को ट्रैक करने के लिये AI उपकरण ‘वेयर इज़ डैडी?’ का उपयोग, जिसका उद्देश्य संपार्श्विक क्षति को कम करना है।
- C4ISR प्रणाली को मज़बूत करना: सैन्य तंत्र के आधुनिकीकरण में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, विशेषरूप से कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर, इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकोनिसेंस (C4ISR) प्रणालियों के एकीकरण एवं सुदृढ़ीकरण में। AI विशाल डेटा को संसाधित (प्रोसेस) करके निर्णय लेने की प्रक्रिया को गति प्रदान करता है। इसके माध्यम से भविष्यसूचक विश्लेषण संभव हो पाता है, जिससे शत्रु की गतिविधियों का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
- समुद्री क्षेत्र की जागरूकता के लिये, यह उपग्रह और जहाज़ के डेटा का विश्लेषण करके तस्करी या अवैध मत्स्य संग्रहण में शामिल ‘डार्क शिप्स’ की पहचान करता है।
- असममित खतरों का सामना: गैर-राज्य अभिकर्त्ताओं से उत्पन्न असममित खतरों का सामना करने के लिये आंतरिक सुरक्षा हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। एक बड़ी चिंता यह है कि सस्ती और स्वायत्त हथियार प्रणालियाँ, जैसे कि AI-संचालित ड्रोन, आतंकवादियों की विनाशकारी क्षमता को काफी बढ़ा सकती हैं। इस खतरे का सामना करने के लिये, AI-आधारित ड्रोन-रोधी और निगरानी प्रणालियों का विकास आवश्यक हो गया है।
- राष्ट्रीय अवसंरचना की सुरक्षा को बढ़ाना: AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) विद्युत ग्रिड और नेटवर्क में विसंगतियों का पता लगाकर सक्रिय साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करता है, AI-संचालित वीडियो विश्लेषण संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर सैन्य अड्डों एवं परमाणु सुविधाओं जैसे महत्त्वपूर्ण और संवेदनशील स्थलों की भौतिक सुरक्षा को मज़बूत बनाता है।
- दुष्प्रचार से मुकाबला और सामाजिक एकता की सुरक्षा: सूचना युद्ध के क्षेत्र में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एक दोधारी तलवार के रूप में कार्य करती है। सुरक्षा एजेंसियाँ समन्वित दुष्प्रचार अभियानों और बॉट नेटवर्क का पता लगाने के साथ-साथ 'डीपफेक' की पहचान करने वाले एल्गोरिद्म विकसित करने के लिये AI का उपयोग करती हैं, ताकि सार्वजनिक संवाद और विश्वास की अखंडता को संरक्षित किया जा सके।
AI सॉवरेनिटी
- परिचय: AI सॉवरेनिटी से तात्पर्य किसी देश के अपने AI इकोसिस्टम जैसे कम्प्यूट इन्फ्रास्ट्रक्चर, डेटा, एल्गोरिद्म और गवर्नेंस पर स्वतंत्र नियंत्रण से है। इसका उद्देश्य तकनीक को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, सुरक्षा आवश्यकताओं और सामरिक हितों के अनुरूप बनाना है।
- भारत की नीतिगत प्राथमिकता: मार्च 2026 तक, AI सॉवरेनिटी भारत का प्रमुख नीतिगत केंद्र बन गया। यह 'इंडिया AI मिशन' द्वारा संचालित है और अमेरिका-चीन AI प्रतिद्वंद्विता के बीच 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में प्रमुखता से उभरा है।
- बुनियादी ढाँचा: भारत ने 'इंडिया AI कम्प्यूट पोर्टल' के माध्यम से नेशनल कम्प्यूट कैपेसिटी को 58,000 से अधिक GPU तक बढ़ा दिया है। निजी क्षेत्र के प्रमुख सहयोगियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज (7 वर्षों में 110 बिलियन डॉलर) और अडाणी समूह (वर्ष 2035 तक नवीकरणीय ऊर्जा आधारित AI डेटा सेंटर के लिये 100 बिलियन डॉलर) शामिल हैं।
- स्वदेशी मॉडल: भारत सर्वम AI और भारतजेन परम 2 जैसे बहुभाषी क्षमता वाले डोमेस्टिक 'फाउंडेशनल मॉडल' को बढ़ावा दे रहा है, जो डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) के साथ एकीकरण पर बल देते हैं।
- भारत का व्यावहारिक दृष्टिकोण: भारत पूर्णतः आत्मनिर्भर हार्डवेयर की बजाय एप्लीकेशन-आधारित रणनीति अपना रहा है। इसमें घरेलू डेटा उपयोग और बहुभाषी मॉडलों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। भारत वैश्विक कंपनियों (जैसे- NVIDIA, ओपन AI, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट) के साथ साझेदारी का लाभ उठाते हुए स्थानीय बुनियादी ढाँचे का निर्माण कर रहा है, साथ ही अपनी स्वदेशी क्षमताओं को भी विकसित कर रहा है।
और पढ़ें: सर्वम AI और भारत में सॉवरेन AI
AI का वेपनाइजेशन भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये कैसे खतरा है?
- सैन्य प्रभुत्व को खतरा: AI असममित युद्ध (Asymmetric warfare) को सक्षम बनाता है, जिससे विरोधी देश स्वचालित घातक आयुध प्रणालियाँ (LAWS), ड्रोन समूह और हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की AI-एडवांस एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल (A2/AD) रणनीतियों के माध्यम से भारत की पारंपरिक सैन्य बढ़त को चुनौती दे सकते हैं। इसके अतिरिक्त, नियंत्रण रेखा (LoC) और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सिस्टम की तकनीकी खराबी एस्केलेशन डायनामिक्स के कारण अनजाने में संघर्ष बढ़ने का जोखिम उत्पन्न करती है।
- उदाहरण: वर्ष 2026 की शुरुआत में, चीन ने प्रदर्शित किया कि एक अकेली सैनिक टोही और आक्रामक मिशनों को स्वायत्त सहयोग के साथ 200 से अधिक ड्रोनों का समूह नियंत्रित कर सकता है। यह भारत की रक्षा रणनीति को जटिल बना सकता है।
- AI-सक्षम साइबर खतरा: विरोधी देश पावर ग्रिड (व्यापक स्तर पर ब्लैकआउट करना), वित्तीय प्रणाली (बैंकों को असमर्थ बनाना) और डिफेंस नेटवर्क (सीक्रेट चुराना या संकट के दौरान कमांड को बाधित करना) पर अनुकूलित साइबर हमलों के लिये AI का उपयोग कर सकते हैं।
- उदाहरण: मई 2025 में पाकिस्तानी सेना ने भारत पर ‘आयरन वॉल’ कोडनेम से एक साइबर हमला किया, जिससे एक बड़ा पावर ग्रिड विफल हो गया और 23 राज्यों में विद्युत व्यवस्था ठप हो गई।
- सूचना का शस्त्रीकरण: डीपफेक और दुष्प्रचार का उपयोग सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाने, संस्थानों में विश्वास को कम करने और भारत के विशाल चुनावों में मतदान को प्रभावित करने के लिये किया जा सकता है, जो देश की लोकतांत्रिक और सामाजिक स्थिरता के लिये खतरा है।
- उदाहरण: वर्ष 2024 के आम चुनावों में, राजनेताओं के AI-जनरेटेड डीपफेक का उपयोग दुष्प्रचार फैलाने के लिये किया गया था, जिससे सांप्रदायिक विभाजन गहरा गया और संपूर्ण भारत में हिंसा भड़क उठी।
- आर्थिक संप्रभुता को खतरा: AI-संचालित साइबर-जासूसी भारत के तेज़ी से बढ़ते फार्मा, अंतरिक्ष और IT क्षेत्रों से बौद्धिक संपदा (IP) की बड़े पैमाने पर चोरी को सक्षम बनाती है। इसके अतिरिक्त विरोधी देश आपूर्ति शृंखलाओं का मानचित्रण और शस्त्रीकरण करने के लिये AI का उपयोग कर सकते हैं, जिससे रक्षा उत्पादन को पंगु बनाने हेतु महत्त्वपूर्ण निर्भरताओं की पहचान कर उन्हें बाधित किया जा सके।
- चीनी राज्य-समर्थित तत्त्वों, जैसे- APT41, ने प्रोप्राइटरी ड्रग फार्मूला की चोरी करने के उद्देश्य से भारतीय तथा बहुराष्ट्रीय औषधि कंपनियों को निशाना बनाया है, जिनमें मधुमेह और मोटापे के उपचार से संबंधित दवाएँ भी शामिल हैं।
- AI-संचालित बायोवेपन: सिंथेटिक बायोलॉजी के साथ AI का संगम एक उभरता विनाशकारी जोखिम बन गया है। विरोधी देश या गैर-राज्य अभिकर्त्ता जेनरेटिव AI मॉडल का उपयोग नवीन रोगजनकों, विषाक्त पदार्थों या जीन-एडिटिंग पेलोड को डिज़ाइन करने के लिये कर सकते हैं, जो मौजूदा वैक्सीन को दरकिनार कर सकते हैं या विशिष्ट नृजातीय जनसंख्या को लक्षित कर सकते हैं।
- डेटा पॉइजनिंग: अदृश्य पूर्वाग्रह या 'बैकडोर' प्रविष्ट करके, विरोधी देश महत्त्वपूर्ण तंत्रों को एक निर्णायक क्षण में विफल कर सकते हैं। उदाहरण: एक फेशियल रिकग्निशन सिस्टम का किसी ज्ञात आतंकवादी की पहचान करने में विफल होना, या बिना हैकिंग के किसी भी दृश्य संकेत के एक स्वायत्त वाहन द्वारा किसी बाधा का अनुचित वर्गीकरण करना।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वेपनाइजेशन के युग में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने हेतु किन कदमों की आवश्यकता है?
- स्वदेशी रक्षा AI इकोसिस्टम का निर्माण: भारत को एक मज़बूत रक्षा AI एजेंसी (DAIA) की आवश्यकता है, जो नौकरशाही को पार कर AI एकीकरण का नेतृत्व कर सके। इसे समयबद्ध राष्ट्रीय रक्षा AI मिशनों के साथ समर्थित किया जाना चाहिये, जैसे कि प्रोजेक्ट ड्रोना (AI-संचालित ड्रोन स्वार्म), प्रोजेक्ट कवच (महत्त्वपूर्ण अवसंरचना के लिये साइबर सुरक्षा) और प्रोजेक्ट नेत्रा (वास्तविक समय युद्धक्षेत्र निगरानी)।
- राष्ट्र की ‘AI बैकबोन’ की सुरक्षा: भारत को एल्गोरिद्म प्रशिक्षण के लिये सुरक्षा-संबंधित लेबल वाला राष्ट्रीय सुरक्षित डेटा सेट तैयार करना होगा। इसके लिये स्वदेशी AI अवसंरचना में समानांतर निवेश की आवश्यकता है, जिसमें घरेलू रूप से डिज़ाइन किये गए सेमीकंडक्टर्स तथा उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग केंद्र शामिल हैं, जो पूरी तरह भारत में स्थित हों, ताकि संवेदनशील रक्षा अनुप्रयोगों को सुरक्षित रूप से प्रोसेस किया जा सके।
- अवसंरचना की मज़बूती: विरोधियों को रोकने हेतु भारत को विश्वसनीय आक्रामक साइबर क्षमताएँ विकसित करनी होंगी। विशेषरूप से सरकार को सभी नई महत्त्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं (जैसे- पावर प्लांट, ग्रिड) के लिये ‘AI-सुरक्षित’ डिज़ाइन मानक लागू करना अनिवार्य करना चाहिये, ताकि उनकी मज़बूती सुनिश्चित हो सके।
- संज्ञानात्मक सुरक्षा: अपने सामाजिक ताने-बाने की रक्षा के लिये भारत को एक राष्ट्रीय संज्ञानात्मक सुरक्षा केंद्र स्थापित करना चाहिये। इसके कार्यक्षेत्र में रियल-टाइम डीपफेक पहचान, बॉट नेटवर्क्स को निष्क्रिय करना और AI-जनित भ्रामक सूचना से नागरिकों को सुरक्षित रखने हेतु बड़े पैमाने पर डिजिटल साक्षरता अभियान चलाना शामिल होगा।
- मज़बूत विनियामक ढाँचा: घातक स्वायत्त हथियार प्रणालियों (LAWS) और AI-संचालित साइबर युद्ध के लिये व्यापक दिशा-निर्देश तैयार करना, जिसमें परमाणु-संपन्न दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ने के जोखिमों को रोकने हेतु मानवीय निगरानी पर ज़ोर दिया गया हो।
निष्कर्ष
AI का वेपनाइजेशन भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये एक अहम चुनौती प्रस्तुत करता है, जो उसकी सैन्य बढ़त, सामाजिक एकता और आर्थिक संप्रभुता को खतरे में डालती है। इन कमज़ोरियों को रणनीतिक ताकत में बदलने हेतु स्वदेशी AI विकास, मज़बूत साइबर रक्षा, संज्ञानात्मक सुरक्षा उपायों तथा वैश्विक कूटनीतिक सहयोग को शामिल करने वाली एक व्यापक रणनीति आवश्यक है।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. AI संप्रभुता की अवधारणा की समीक्षा कीजिये। यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का केंद्रीय स्तंभ क्यों बनती जा रही है और इसे हासिल करने में भारत को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है? |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. AI संप्रभुता क्या है?
AI संप्रभुता का अर्थ है कि एक राष्ट्र के पास AI अवसंरचना, डेटा, एल्गोरिद्म और शासन पर स्वतंत्र नियंत्रण हो, ताकि तकनीकी विकास को राष्ट्रीय सुरक्षा तथा रणनीतिक हितों के अनुरूप बनाया जा सके।
2. आधुनिक युद्ध में C4ISR सिस्टम क्या हैं?
C4ISR (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशंस, कंप्यूटर्स, इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही) प्रणालियाँ वास्तविक समय के डेटा विश्लेषण, स्थितिजन्य जागरूकता और सैन्य निर्णय लेने की प्रक्रिया में सुधार के लिये AI सहित उन्नत तकनीकों को एकीकृत करती हैं।
3. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये किस प्रकार खतरा उत्पन्न करती है?
AI स्वायत्त हथियार, साइबर हमले, डीपफेक भ्रामक सूचना अभियान और डेटा पॉइज़निंग को सक्षम बना सकता है, जो महत्त्वपूर्ण अवसंरचना, लोकतांत्रिक प्रक्रियाएँ तथा सैन्य संचालन को प्रभावित कर सकते हैं।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. विकास की वर्तमान स्थिति में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता निम्नलिखित में से किस कार्य को प्रभावी रूप से कर सकती है? (2020)
- औद्योगिक इकाइयों में विद्युत की खपत कम करना
- सार्थक लघु कहानियों और गीतों की रचना
- रोगों का निदान
- टेक्स्ट से स्पीच (Text-to-Speech) में परिवर्तन
- विद्युत ऊर्जा का बेतार संचरण
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1,2, 3 और 5
(b) केवल 1,3 और 4
(c) केवल 2,4 और 5
(d) 1,2,3,4 और 5
उत्तर: (b)
मेन्स
प्रश्न. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की अवधारणा का परिचय दीजिये। AI क्लिनिकल निदान में कैसे मदद करता है? क्या आप स्वास्थ्य सेवा में AI के उपयोग में व्यक्ति की निजता को कोई खतरा महसूस करते हैं? (2023)
