IMF की भूमिका की समीक्षा | 20 Oct 2021

प्रीलिम्स के लिये:

विश्व बैंक समूह, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस रिपोर्ट

मेन्स के लिये:

IMF की भूमिका एवं कोटा सुधार

चर्चा में क्यों?

हाल ही में विश्व बैंक समूह और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की 2021 की वार्षिक बैठकों की पृष्ठभूमि में प्रमुख विशेषज्ञों ने IMF की भूमिका की समीक्षा करने की आवश्यकता का सुझाव दिया है।

  • उभरते बाजारों के वैश्विक उत्पादन या जीडीपी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की निरंतर प्रवृत्ति के साथ कोटा प्रणाली की समीक्षा की आवश्यकता है।
  • इसके अलावा विश्व बैंक द्वारा अपनी ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस रिपोर्ट को बंद करने के बाद डेटा प्रमाणिकता बनाए रखने की आवश्यकता है।
  • द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्वव्यापी संकट से जूझ रहे देशों के पुनर्निर्माण में सहायता के लिये विश्व बैंक के साथ आईएमएफ की स्थापना की गई थी। दोनों संगठनों की स्थापना के संबंध में अमेरिका के ब्रेटन वुड्स में आयोजित एक सम्मेलन में सहमति व्यक्त की गई थी, इसलिये उन्हें ब्रेटन वुड्स जुड़वाँ (Bretton Woods Twins) के रूप में जाना जाता है।

प्रमुख बिंदु

  • आईएमएफ सुधारों की आवश्यकता:
    • कोटा सुधार: 
      • IMF की कोटा प्रणाली ऋण हेतु धन के सृजन के लिये बनाई गई थी।
      • प्रत्येक आईएमएफ सदस्य देश के लिये एक कोटा या योगदान निर्धारित किया जाता है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था में देश के सापेक्ष आकार को दर्शाता है। प्रत्येक सदस्य का कोटा उसकी सापेक्ष मतदान शक्ति के साथ-साथ ऋण लेने की क्षमता को भी निर्धारित करता है।
        • इस प्रकार नियम बनाने और संशोधन करने में विकसित/अमीर देशों को  अधिक प्रतिनिधित्व का अवसर मिलता है।
        • यह एक ऐसी समस्या को जन्म देता है जहाँ आर्थिक रूप से विकसित देशों का प्रतिनिधित्व कम हो जाता है क्योंकि उनकी मतदान शक्ति कम हो जाती है। जैसे- ब्रिक्स देश।
      • कोटा विशेष आहरण अधिकार (SDR), IMF खाता की एक इकाई है।
        • SDR,  IMF के सदस्यों का स्वतंत्र रूप से प्रयोग योग्य मुद्राओं पर एक संभावित दावा है। इन मुद्राओं के लिये SDR का आदान-प्रदान किया जा सकता है।
      • आईएमएफ का बोर्ड ऑफ गवर्नर्स एक नियमित अंतराल (पाँच वर्ष से अधिक नहीं) पर कोटा की सामान्य समीक्षा करता है ।

पूर्व में किये गए कोटा सुधार:

  • वर्ष 2010 में आईएमएफ के कोटा और शासन सुधारों का मसौदा तैयार किया गया था; जो अंततः वर्ष 2016 में प्रभावी हुए।
  • इन सुधारों ने 6% से अधिक कोटा शेयरों को अमेरिका एवं यूरोपीय देशों से उभरते और विकासशील देशों में स्थानांतरित कर दिया।
  • इसके तहत भारत का वोटिंग अधिकार 0.3% बढ़कर 2.3% से 2.6% हो गया और चीन का वोटिंग अधिकार 2.2% बढ़कर 3.8% से 6% हो गया।
    • वर्तमान में भारत के पास SDR कोटा का 2.75% और आईएमएफ में 2.63% वोट हैं।

Roles-of-Quotas

  • अनुच्छेद IV परामर्श का पुनर्गठन: अनुच्छेद IV परामर्श के तहत आईएमएफ आमतौर पर प्रत्येक वर्ष अपने सदस्यों के साथ द्विपक्षीय चर्चा करता है और इसके कर्मचारी एक रिपोर्ट तैयार करते हैं।
    • अनुच्छेद IV परामर्श सबसे शक्तिशाली साधन/उपकरण है और इसको नई तकनीकों एवं सार्वजनिक डेटा तक पहुँच स्थापित करके और अधिक उपयोगी बनाने के लिये पुनर्गठित और गति प्रदान करने की आवश्यकता है।

प्रस्तावित सुधार

  • सुधार कोटा प्रणाली: कोटा सुधार विशेष रूप से विकासशील देशों की बढ़ती क्षमताओं के संबंध में परिवर्तित आर्थिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करेगा।
    • उदाहरण के लिये ब्रिक्स देशों का कोटा बढ़ना चाहिये और यूरोपीय संघ के देशों का कोटा कम होना चाहिये।
    • साथ ही यह महत्त्वपूर्ण है कि नया कोटा फॉर्मूला क्रय शक्ति समता (Purchasing Power Parities- PPP), GDP को अधिक महत्त्व देता है ताकि उभरते बाज़ारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की वास्तविक आर्थिक ताकत को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित किया जा सके।

क्रय शक्ति समता (PPP)

  • PPP व्यापक आर्थिक विश्लेषण द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक लोकप्रिय मीट्रिक है जो "माल की टोकरी (Basket of Goods)" दृष्टिकोण के माध्यम से विभिन्न देशों की मुद्राओं की तुलना करता है।
  • PPP अर्थशास्त्रियों को देशों के बीच आर्थिक उत्पादकता और जीवन स्तर की तुलना करने की अनुमति देता है।
  • कुछ देश PPP को प्रतिबिंबित करने के लिये अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आँकड़ों को समायोजित करते हैं।
  • कम आय वाले देशों की मदद करना: IMF को कम आय वाले देशों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिये और अन्य विकासशील देशों के बाज़ार में धन जुटाने की गतिविधियों का समर्थन करना चाहिये, क्योंकि इसकी अनुच्छेद IV परामर्श रिपोर्ट का उपयोग क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों द्वारा किया जाता है जिससे भारत जैसे देशों की फंड जुटाने की क्षमता प्रभावित होती है।
    • भारत सहित अधिकांश एशियाई देश अब अपने विदेशी मुद्रा भंडार की मज़बूती के आधार पर स्वयं ही धन जुटा सकते हैं और संकट की स्थिति का सामना करने के लिये इन्हें अतीत की तरह IMF के पास जाने की आवश्यकता नहीं है।
  • प्रबंधन सुधार: IMF में प्रबंधन प्रणाली को संशोधित किया जाना चाहिये।
    • IMF और विश्व बैंक समूह में एक अनौपचारिक व्यवस्था है कि IMF का प्रमुख यूरोपीय होना चाहिये और विश्व बैंक का प्रमुख अमेरिकी होना चाहिये।
    • इस पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है और IMF को इस पर वास्तव में पुनर्विचार करना चाहिये।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस