अस्पताल में भर्ती होने के बाद कोविड-19 रोगियों की मृत्यु दर | 29 Aug 2023

प्रिलिम्स के लिये:

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, कोविड-19

मेन्स के लिये:

स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों का कोविड-19 के बाद की मृत्यु दर को कम करने में योगदान

स्रोत: डाउन टू अर्थ

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (Indian Council of Medical Research- ICMR) द्वारा किये गए एक नए अध्ययन में पूर्व कोविड-19 से संक्रमित रोगियों की अस्पताल में भर्ती होने के बाद की मृत्यु दर पर प्रकाश डाला गया है।

  • यह अध्ययन रोगियों की संवेदनशीलता पर प्रकाश डालता है तथा सहरुग्णता (एक ही समय में एक से अधिक बीमारियाँ), उम्र और टीकाकरण जैसे अन्य कारकों के गहन मूल्यांकन के माध्यम से मृत्यु दर के जोखिम को कम करने के लिये स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को हल करने की आवश्यकता पर ज़ोर देता है।

अध्ययन के प्रमुख बिंदु:

  • मृत्यु दर और प्रतिभागी जनसांख्यिकी:
    • इस अध्ययन में 31 भारतीय चिकित्सा केंद्रों में 14,419 पूर्व कोविड-19 रोगियों की जाँच की गई।
      • अस्पताल से वापस आने के एक वर्ष बाद इन रोगियों की मृत्यु दर 6.5% पाई गई है।
    • इनमें से लगभग 50% मरीज़ों की अस्पताल से छुट्टी मिलने के 28 दिनों के भीतर मृत्यु हो गई।
      • अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद समय बीतने के साथ-साथ मृत्यु का जोखिम भी कम होना पाया गया
    • 60 से अधिक आयु वर्ग के व्यक्तियों (विशेष रूप से कई बीमारियों के कारण) में मृत्यु दर का खतरा अधिक पाया गया।
  • कोविड-19 के बाद की स्वास्थ्य स्थितियों की व्यापकता:
    • 17.1% व्यक्तियों ने कोविड-19 के बाद थकान, साँस लेने में तकलीफ, अनुभूति में बदलाव और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसे लक्षणों की जानकारी दी।
  • मृत्यु दर के विभिन्न कारकों का अध्ययन:
    • इस अध्ययन में केवल कोविड-19 से होने वाली मौतों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय मृत्यु दर में बड़े पैमाने पर योगदान देने वाले सभी कारणों की जाँच की गई।
    • मृत्यु दर के विभिन्न कारकों में सहरुग्णता जैसे अन्य कारक शामिल हैं।
  • टीकाकरण और रोग की गंभीरता:
    • टीकाकरण से कोविड-19 संक्रमण से पहले लगभग 60% सुरक्षा मिलती है।
    • टीका अस्पताल में भर्ती होने के दौरान रोग की गंभीरता को कम करने में योगदान करता है।
  • उच्च मृत्यु दर जोखिम भेद्यता:
    • मृत्यु दर जोखिम को प्रभावित करने वाले कारकों में सहरुग्णता, आयु और लिंग जैसे कारक शामिल हैं।
    • एक सहरुग्ण स्थिति वाले मरीज़ की मृत्यु की संभावना 9 गुना अधिक होती है।
    • पुरुषों ने 1.3 गुना अधिक जोखिम का सामना किया तथा 60 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के लोगों को 2.6 गुना अधिक जोखिम का सामना करना पड़ा।
    • यह अध्ययन मृत्यु दर जोखिम को कम करने के लिये सहरुग्णता के प्रबंधन के महत्त्व को रेखांकित करता है।
  • बच्चों की संवेदनशीलता:
    • 0 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों को चार सप्ताह और एक वर्ष के फॉलो-अप के मध्य 5.6 गुना अधिक मृत्यु के जोखिम का सामना करना पड़ा।
      • अस्पताल में भर्ती होने के बाद पहले चार सप्ताह के दौरान यह जोखिम 1.7 गुना अधिक होता है।
    • कैंसर और किडनी विकार जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं वाले बच्चों की मृत्यु की संभावना अधिक होती है।
  • अध्ययन की सीमाएँ:
    • इस अध्ययन में दीर्घ अवधि तक रहने वाले कोविड लक्षणों की जाँच शामिल नहीं थी।
    • इस अध्ययन में पोस्ट कोविड स्थिति (PCC) में उपयोग की गई परिचालन परिभाषा न तो  विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization- WHO) और न ही संयुक्त राज्य अमेरिका की राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी, जिसे सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन कहा जाता है द्वारा प्रदान की गई परिभाषाओं से सटीक मेल खाती है। 
      • पोस्ट कोविड स्थिति (PCC) के लिये WHO की परिभाषा के अनुसार, हमें तीन महीने तक इंतज़ार करना होगा और फिर जाँच करनी होगी कि क्या लक्षण दो महीने तक बने रहते हैं, यह कहती है कि लंबे समय तक कोविड के लक्षण प्रारंभिक संक्रमण के बाद तीन महीने तक बने रहते हैं।
      • लॉन्ग कोविड-19, जैसा कि रोग नियंत्रण केंद्र (CDC) द्वारा परिभाषित किया गया है, में कोविड-19 संक्रमण के बाद की विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएँ शामिल हैं, जो संक्रमण के कम-से-कम चार सप्ताह बाद शुरू होती हैं। हालाँकि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने अध्ययन में केवल चार सप्ताह (उसके बाद नहीं) की अवधि में लक्षणात्मक मूल्यांकन किया।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR):

  • ICMR जैव चिकित्सा अनुसंधान के संचालन, समन्वय और प्रचार के लिये भारत में शीर्ष निकाय है।
  • ICMR की स्थापना वर्ष 1911 में इंडियन रिसर्च फंड एसोसिएशन (IRFA) के रूप में की गई थी और वर्ष 1949 में इसका नाम बदलकर ICMR कर दिया गया।
  • ICMR को भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के माध्यम से वित्तपोषित किया जाता है।
  • इसका अधिदेश समाज के लाभ के लिये चिकित्सा अनुसंधान का संचालन, समन्वय और कार्यान्वयन करना है; चिकित्सा नवाचारों को उत्पादों/प्रक्रियाओं में बदलना तथा उन्हें सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में पेश करना है।
  • ICMR विभिन्न स्वास्थ्य अनुसंधान परियोजनाओं और कार्यक्रमों पर WHO, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) आदि जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ भी सहयोग करता है।
  • ICMR ने विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से जैव चिकित्सा अनुसंधान में मानव संसाधन विकास एवं क्षमता निर्माण का भी समर्थन किया है।

 UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न 

मेन्स: 

प्रश्न. कोविड-19 महामारी ने भारत में वर्ग असमानताओं एवं गरीबी को गति दे दी है। टिप्पणी कीजिये। (2020)