आपदा अनुकूल अवसंरचना पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन | 09 May 2022

प्रिलिम्स के लिये:

सीडीआरआई, आईसीडीआरआई

मेन्स के लिये:

आपदा प्रबंधन

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (International Conference on Disaster Resilient Infrastructure) के चौथे संस्करण के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।   

  • ICDRI आपदा और जलवायु अनुकूलन के लिये आवश्यक बुनियादी ढाँचे पर वैश्विक पहल को मज़बूती प्रदान करने हेतु सदस्य देशों, संगठनों तथा संस्थानों के साथ आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे के लिये गठबंधन (International Coalition for Disaster Resilient Infrastructure-CDRI) हेतु वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन है।

आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे के लिये गठबंधन:

  • यह गठबंधन राष्ट्रीय सरकारों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और कार्यक्रमों, बहुपक्षीय विकास बैंकों तथा वित्तपोषण तंत्र, निजी क्षेत्र आदि की एक बहु-हितधारक वैश्विक भागीदारी है।
  • भारत के प्रधानमंत्री ने 23 सितंबर, 2019 को संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन (UN Climate Action Summit) में अपने भाषण के दौरान CDRI का शुभारंभ किया था।
  • इसका उद्देश्य सतत् विकास के समर्थन में जलवायु और आपदा जोखिमों के लिये नई एवं मौजूदा बुनियादी ढाँचा प्रणालियों की अनुकूलता को बढ़ावा देना है।
  • सदस्य: 22 देश और 7 संगठन।
  • विषयगत क्षेत्र: शासन और नीति, जोखिम की पहचान तथा आकलन, मानक एवं प्रमाणन, क्षमता निर्माण, नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकी, रिकवरी व पुनर्निर्माण, वित्त एवं समुदाय आधारित दृष्टिकोण।
  • CDRI का सचिवालय नई दिल्ली, भारत में स्थित है।

आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे (DRI) तथा जलवायु प्रतिरोधी ढाँचे (CRI) में अंतर:  

  • DRI में भूकंप, भूस्खलन, सुनामी और ज्वालामुखी गतिविधि जैसे भू-भौतिकीय एवं भू-आकृति संबंधी खतरों के कारण आपदा जोखिम को संबोधित करना भी शामिल है। चूँकि अवसंरचना प्रणाली लंबे जीवन चक्र के लिये बनाई गई है, इसलिये यह ज़रूरी है कि DRI ऐसी कम आवृत्ति वाली परंतु उच्च प्रभाव वाली घटनाओं से उत्पन्न जोखिमों को संबोधित करे।  
  • DRI को परमाणु विकिरण, बांँध की विफलता, रासायनिक रिसाव, विस्फोट जैसे तकनीकी खतरों से निपटना होगा जो सीधे जलवायु से जुड़े नहीं हैं।
  • 90% से अधिक आपदाएँ मौसम और जलवायु से संबंधित चरम घटनाओं की अभिव्यक्ति हैं। इसलिये बुनियादी ढाँचे को जलवायु-लचीला बनाना भी इसे आपदा प्रतिरोधी बनाने में योगदान देता है।
  • CRI के कुछ प्रयास बुनियादी ढाँचे जैसे कार्बन फुटप्रिंट को कम करने पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। हालाँकि यह DRI का उपोत्पाद हो सकता है, DRI इन पहलुओं को स्पष्ट रूप से संबोधित नहीं करता है।

आवश्यकता: 

  • आपदा न्यूनीकरण के लिये सेंदाई फ्रेमवर्क (Sendai Framework for Disaster Reduction) सतत् विकास के लिये आपदाओं के कारण महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को होने वाले नुकसान पर प्रकाश डालता है।
  • SFDRR में नुकसान को कम करने से संबंधित चार विशिष्ट लक्ष्य शामिल हैं:
    • वैश्विक आपदा से होने वाली मौतों को कम करना;
    • प्रभावित लोगों की संख्या कम करना;
    • आपदा से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करना; तथा
    • आपदा के कारण महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे में होने वाली क्षति को कम करना।
  • लक्ष्य-4 बुनियादी ढाँचे पर फ्रेमवर्क में निर्धारित अन्य नुकसान में कमी, लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये एक महत्त्वपूर्ण शर्त है।
  • वैश्विक वार्षिक अवसंरचना निवेश आवश्यकता का अनुमान वर्ष 2016-2040 के बीच प्रतिवर्ष 3.7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है। अतः हमारे निवेश की सुरक्षा के लिये यह आवश्यक है कि भविष्य की सभी बुनियादी ढाँचा प्रणालियाँ आपदाओं का सामना करने में सक्षम हों।
  • जलवायु परिवर्तन के कारण द्वीपीय राज्यों के सामने आने वाली चुनौतियाँ CDRI पहल के तहत प्रयासों का केंद्र बिंदु में हैं।
    • COP-26  में 'इन्फ्रास्ट्रक्चर फॉर रेसिलिएंट आइलैंड स्टेट्स'(Infrastructure for Resilient Island States) पहल शुरू की गई थी।

इन्फ्रास्ट्रक्चर फॉर रेसिलिएंट स्टेट्स पहल 

  • भारत ने CDRI के एक हिस्से के रूप में इस पहल की शुरुआत की, जो विशेष रूप से छोटे द्वीपीय विकासशील राज्यों में पायलट परियोजनाओं के क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करेगी। 
  • छोटे द्वीपीय विकासशील राज्य या SIDS जलवायु परिवर्तन से सबसे ज़्यादा खतरे का सामना करते हैं, भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO उनके लिये उपग्रह के माध्यम से चक्रवात, प्रवाल-भित्ति निगरानी, तट-रेखा निगरानी आदि के बारे में समय पर जानकारी प्रदान करने हेतु विशेष डेटा विंडो का निर्माण करेगी।

भारत के लिये महत्त्व:

  • यह भारत को जलवायु कार्रवाई और आपदा न्यूनीकरण पर वैश्विक नेता के रूप में उभरने का एक मंच प्रदान करेगा।
    • CDRI भारत की सॉफ्ट पॉवर को बढ़ाता है, लेकिन इसका अर्थ अर्थशास्त्र की दृष्टि से कहीं अधिक व्यापक है क्योंकि यह आपदा जोखिम में कमी, सतत् विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goal) और जलवायु समझौते के बीच तालमेल तथा स्थायी एवं समावेशी विकास प्रदान करता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का पूरक। 
  • अफ्रीका, एशिया आदि में लचीले बुनियादी ढाँचे के प्रति भारत के समर्थन को सुगम बनाना।
  • इन्फ्रा डेवलपर के लिये ज्ञान, प्रौद्योगिकी और क्षमता विकास तक पहुँच प्रदान करना।
  • भारतीय बुनियादी ढाँचे और प्रौद्योगिकी फर्मों को विदेशों में सेवाओं का विस्तार करने हेतु अवसर प्रदान करना।

स्रोत: पी.आई.बी.