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आपदा प्रबंधन अवसंरचना पर अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन | 29 Aug 2019 | आपदा प्रबंधन

चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सहायक सचिवालय कार्यालय सहित आपदा प्रबंधन अवसंरचना पर अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन (International Coalition for Disaster Resilient Infrastructure-CDRI) की स्थापना को कार्योत्तर मंज़ूरी प्रदान कर दी है। इस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री ने 13 अगस्त, 2019 को मंज़ूरी दी थी।

प्रमुख बिंदु

अन्य बातों के अलावा निम्नलिखित पहलों को मंज़ूरी दी गईः

  1. नई दिल्ली में सहायक सचिवालय कार्यालय सहित आपदा प्रबंधन अवसंरचना पर अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन (CDRI) की स्थापना।
  2. सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम (Societies Registration Act), 1860 के अंतर्गत संस्था के रूप में CDRI के सचिवालय की नई दिल्ली में स्थापना ‘CDRI संस्था’ अथवा इससे मिलते-जुलते नाम से उपलब्धता के आधार पर की जाएगी।

3. CDRI को तकनीकी सहायता और अनुसंधान परियोजनाओं का निरंतर आधार पर वित्त पोषण करने, सचिवालय कार्यालय की स्थापना करने तथा बार-बार होने वाले खर्चों के लिये वर्ष 2019-20 से वर्ष 2023-24 तक पाँच वर्ष की अवधि के लिये आवश्यक राशि हेतु भारत सरकार की ओर से 480 करोड़ रुपए (लगभग 70 मिलियन डॉलर) की सहायता को सैद्धांतिक मंज़ूरी देना।
4. चार्टर दस्तावेज़ का समर्थित स्वरूप CDRI के लिये संस्थापक दस्तावेज़ का कार्य करेगा। NDMA द्वारा विदेश मंत्रालय के परामर्श से संभावित सदस्य देशों से जानकारी लेने के बाद इस चार्टर को अंतिम रूप दिया जाएगा।

प्रमुख प्रभावः

आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग, महिलाएँ और बच्चे आपदाओं के प्रभाव की दृष्टि से समाज का सबसे असुरक्षित वर्ग होते हैं तथा ऐसे में आपदा के अनुकूल अवसंरचना तैयार करने के संबंध में ज्ञान और कार्यपद्धतियों में सुधार होने से उन्हें लाभ पहुँचेगा। भारत में पूर्वोत्तर और हिमालयी क्षेत्र भूकंप के खतरे, तटवर्ती क्षेत्र चक्रवाती तूफानों एवं सुनामी के खतरे तथा मध्य प्रायद्वीपीय क्षेत्र सूखे के खतरे वाले क्षेत्र हैं।

नवाचारः

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में प्राकृतिक जोखिम के खतरे से संबंधित सूचना का प्रकाशन होने से लोगों को अपने क्षेत्रों के जोखिम के बारे में समझने का अवसर मिलेगा तथा वे स्थानीय और राज्य सरकारों से जोखिम में कमी लाने तथा उससे निपटने के उपायों की मांग कर सकेंगे।

स्रोत: PIB