IMF द्वारा वैश्विक विकास के अनुमान में कटौती | 16 Apr 2026

स्रोत: द हिंदू

हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपने वैश्विक विकास के अनुमान में कटौती की और चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण विश्व अर्थव्यवस्था एक अधिक प्रतिकूल परिदृश्य की ओर बढ़ रही है, जो आधुनिक समय में सबसे बड़ा ऊर्जा संकट उत्पन्न कर सकता है।

  • परिचय: यह संशोधन ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि और तेल आपूर्ति में व्यवधान, विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य में चल रहे संघर्ष के कारण प्रेरित है।
    • संघर्ष के बगैर IMF मज़बूत प्रौद्योगिकी निवेश, कम ब्याज दरों और राजकोषीय समर्थन द्वारा समर्थित विकास को 0.1 प्रतिशत अंक बढ़ाकर ~3.4% कर देता है
    • हालाँकि वर्ष 2026 के लिये वैश्विक विकास में अब लगभग 20 आधार अंकों की कटौती कर ~3.1% की गई, मुद्रास्फीति के कम होने से पहले बढ़ने की उम्मीद है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के अधिक प्रतिकूल रूप से प्रभावित होने की संभावना है।
  • विकास परिदृश्य: IMF ने संघर्ष के विकसित होने के तरीके के आधार पर तीन परिदृश्यों की रूपरेखा तैयार की– "कमज़ोर, बदतर और गंभीर"।
    • आधारभूत (संदर्भ) परिदृश्य: एक अल्पकालिक संघर्ष, जिसमें वर्ष 2026 में तेल की कीमतें औसतन ~$82 प्रति बैरल रहेंगी, हालाँकि यह वर्तमान ब्रेंट क्रूड लेवल (~$96) से काफी नीचे है।
    • प्रतिकूल परिदृश्य: लंबे संघर्ष के तहत वर्ष 2026 में वैश्विक विकास गिरकर ~2.5% (2025 में 3.4% से) हो सकता है, जिसमें तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के आसपास रहेंगी।
    • सबसे खराब परिदृश्य: वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी के करीब पहुँच सकती है, जिसमें तेल की कीमतें $110 (2026) और $125 (2027) तक पहुँच सकती हैं।
  • भारत का दृष्टिकोण: भारत की विकास दर ~6.5% अनुमानित है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद सापेक्ष लचीलेपन को दर्शाती है।
  • वर्तमान रुझान: IMF ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही प्रतिकूल परिदृश्य की ओर बढ़ रही है और निरंतर व्यवधानों एवं अनिश्चितताओं के कारण अनुमान पहले ही अप्रचलित हो सकता है।

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