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विवाह की न्यूनतम आयु: इतिहास और वर्तमान | 17 Aug 2020 | भारतीय समाज

प्रिलिम्स के लिये:

विवाह की न्यूनतम आयु, विवाह की न्यूनतम आयु से संबंधित कानून, शिशु मृत्यु दर, मातृत्त्व मृत्यु दर, कुल प्रजनन दर, बाल लिंग अनुपात

मेन्स के लिये:

महिलाओं के लिये विवाह की न्यूनतम आयु में बदलाव की आवश्यकता और बाल विवाह संबंधी मुद्दे

चर्चा में क्यों?

स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं के लिये विवाह की न्यूनतम आयु पर पुनर्विचार करेगी।

प्रमुख बिंदु

समिति का गठन

विवाह की आयु ऐतिहासिक और कानूनी दृष्टिकोण

पुरुषों और महिलाओं की विवाह आयु में अंतर?

न्यूनतम आयु में परिवर्तन की आवश्यकता

भारत में बाल विवाह

  • भारत समेत संपूर्ण विश्व में बाल विवाह एक गंभीर समस्या बना हुआ है, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (United Nations Population Fund-UNFPA) द्वारा इसी वर्ष 2 जुलाई को प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हालाँकि बाल विवाह पर लगभग संपूर्ण विश्व में प्रतिबंध लगा दिया गया था, किंतु फिर भी संपूर्ण विश्व में व्यापक स्तर पर इस प्रथा को अमल में लाया जा रहा है।
  • यूनिसेफ (UNICEF) के एक अनुमान के अनुसार, विश्व भर में लगभग 650 मिलियन लड़कियों का विवाह 18 वर्ष से कम उम्र में भी कम उम्र में कर दिया गया था।
  • यूनिसेफ का अनुमान है कि प्रत्येक वर्ष, भारत में 18 वर्ष से कम उम्र की कम से कम 1.5 मिलियन लड़कियों का बाल विवाह कर दिया जाता है, जिससे भारत विश्व में सबसे अधिक बाल विवाह वाला देश है।
  • भारत में, बाल विवाह के आँकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि बाल विवाह में शामिल होने वाली 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों में 46 प्रतिशत निम्न आय वर्ग से थीं।

निष्कर्ष

उल्लेखनीय है कि महिलाओं के विवाह की उम्र को बढ़ाना महिला सशक्तीकरण और महिला शिक्षा की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम हो सकता है, हालाँकि यह भी आवश्यक है कि नियम बनाने के साथ-साथ उनके कार्यान्वयन पर भी ध्यान दिया जाए, क्योंकि भारत में पहले से ही महिलाओं के विवाह की न्यूनतम सीमा 18 वर्ष तय है, किंतु आँकड़े बताते हैं कि अधिकांश क्षेत्रों में इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है। भारतीय समाज में लड़कियों के प्रति दृष्टिकोण के बदलाव की भी आवश्यकता है, अधिकांश भारतीय घरों में यह विचार काफी प्रचलित है कि लड़कियाँ पराया धन होती हैं, और उन्हें जल्द-से-जल्द विदा करना आवश्यक है, जब तक हम मानसिकता में बदलाव नहीं करेंगे तब तक बाल विवाह को रोकना संभव नहीं होगा।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस