फूड वेस्ट इंडेक्स रिपोर्ट 2024 | 03 Apr 2024

प्रिलिम्स के लिये:

फूड वेस्ट इंडेक्स रिपोर्ट 2024, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP), सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP), सतत् विकास लक्ष्य (SDG) 12.3

मेन्स के लिये:

फूड वेस्ट इंडेक्स रिपोर्ट 2024, फूड लॉस एंड वेस्ट: वर्तमान परिदृश्य, कारण, समाधान हेतु पहल

स्रोत: द हिंदू 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (United Nations Environment Programme- UNEP) और यूनाइटेड किंगडम स्थित गैर-लाभकारी संगठन WRAP (वेस्ट एंड रिसोर्सेज़ एक्शन प्रोग्राम) द्वारा संयुक्त रूप से फूड वेस्ट इंडेक्स रिपोर्ट 2024 जारी की गई, जिसके अनुसार भोजन की बर्बादी की ट्रैकिंग तथा निगरानी करने के लिये डेटा बुनियादी ढाँचे में विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण करने की आवश्यकता है।

  • WRAP एक गैर-लाभकारी संगठन है जो जलवायु कार्रवाई करता है। यह जलवायु संकट के कारणों से निपटने और ग्रह को एक संधारणीय बनाने हेतु समग्र विश्व में कार्य करता है।
  • यह रिपोर्ट भोजन की बर्बादी (Food Waste) को मानव खाद्य आपूर्ति शृंखला से हटाए गए भोजन और संबंधित अखाद्य हिस्सों के रूप में परिभाषित करती है।
  • फसलों और पशुधन की कोई भी मात्रा जो मानव-खाद्य वस्तुएँ हैं, जो बिक्री स्तर के बिंदु के अतिरिक्त "प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से कटाई के बाद/पशुधन पशु उत्पादन/आपूर्ति शृंखला से पूरी तरह से बाहर निकल जाती हैं", को "फूड लॉस" कहा जाता है।

नोट:

फूड वेस्ट इंडेक्स रिपोर्ट वर्ष 2030 (SDG 12.3) तक भोजन की बर्बादी को आधा करने में राष्ट्र स्तरीय प्रगति की निगरानी करती है। SDG 12 का लक्ष्य सतत् उपभोग और उत्पादन पैटर्न सुनिश्चित करना है।

  • यह पहली बार वर्ष 2021 में प्रकाशित की गई थी। वर्तमान रिपोर्ट हालिया और बड़े डेटासेट पर आधारित है तथा समग्र विश्व में बर्बाद होने वाले भोजन के पैमाने पर एक अपडेट प्रदान करती है एवं  साथ ही समाधान के रूप में सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से बहु-हितधारक सहयोग पर ध्यान केंद्रित करती है।

रिपोर्ट से संबंधित प्रमुख बिंदु क्या हैं?

  • भोजन की बर्बादी का स्तर:
    • वर्ष 2022 में विश्व के विभिन्न क्षेत्रों ने 1.05 बिलियन टन भोजन बर्बाद किया यानी खुदरा, खाद्य सेवा और घरेलू स्तर पर उपभोक्ताओं को उपलब्ध भोजन का पाँचवाँ हिस्सा (19%) बर्बाद हुआ।
    • खाद्य और कृषि संगठन (Food and Agricultural Organization-FAO) के अनुमान के अनुसार, यह फसल के बाद से लेकर खुदरा बिक्री तक, आपूर्ति शृंखला में लुप्त/नष्ट हो जाने वाले विश्व के 13% भोजन के अतिरिक्त है। 
  • खाद्य अपशिष्ट और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन:
    • खाद्य हानि और अपशिष्ट वैश्विक ग्रीनहाउस गैस (Global Greenhouse Ga- GHG) उत्सर्जन का 8-10% अर्थात् विमानन क्षेत्र से कुल उत्सर्जन का लगभग 5 गुना उत्पन्न करते हैं।
      • यह तब होता है जब मानवता का एक तिहाई हिस्सा खाद्य असुरक्षा का सामना करता है।
  • खाद्य अपशिष्ट में कम असमानता:
    • फूड वेस्ट इंडेक्स रिपोर्ट- 2021 जारी होने के बाद से, डेटा कवरेज में महत्त्वपूर्ण विस्तार हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप औसतन प्रति व्यक्ति घरेलू खाद्य अपशिष्ट में असमानताओं में उल्लेखनीय कमी आई है।
    • उच्च-आय, उच्च-मध्यम आय और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में, घरेलू फूड वेस्ट के औसत स्तर में प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष केवल 7 किलोग्राम का अंतर देखा गया है।
  • तापमान और खाद्य अपशिष्ट सहसंबंध:
    • ऐसा प्रतीत होता है कि गर्म देशों में प्रति व्यक्ति घरेलू भोजन की बर्बादी संभवतः अधिक ताज़े खाद्य पदार्थों के सेवन के परिणामस्वरूप ज़्यादा होती है जिसमें बड़ी मात्रा में अनुपयुक्त घटक शामिल होते हैं और सुदृढ़ कोल्ड चेन की कमी होती है।
    • उच्च मौसमी तापमान, अत्यधिक गर्मी की घटनाएँ और अनावृष्टि भोजन को सुरक्षित रूप से संग्रहित करना, संसाधित करना, परिवहन करना तथा बेचना अधिक चुनौतीपूर्ण बना देता है, जिससे प्रायः भोजन की एक बड़ी मात्रा बर्बाद हो जाती है या नष्ट हो जाती है।
  • शहरी-ग्रामीण असमानताएँ:
    • मध्यम आय वाले देशों में शहरी और ग्रामीण आबादी के बीच भिन्नता दिखाई देती है, ग्रामीण क्षेत्रों में आम तौर पर भोजन की कम बर्बादी होती है।
    • संभावित स्पष्टीकरणों में ग्रामीण क्षेत्रों में बचे हुए खाद्य पदार्थों को पालतू जानवरों, पशुओं के चारे और घरेलू खाद में अधिक उपयोग करना शामिल है।
  • प्रगति को ट्रैक करने के लिये पर्याप्त प्रणाली का अभाव:
    • कई निम्न और मध्यम आय वाले देशों में वर्ष 2030 तक भोजन की बर्बादी को आधा करने के सतत् विकास लक्ष्य 12.3 को पूरा करने के लिये प्रगति को ट्रैक करने हेतु पर्याप्त प्रणालियों का अभाव है, विशेष रूप से खुदरा तथा खाद्य सेवाओं में।
    • वर्तमान में, केवल चार G-20 देशों (ऑस्ट्रेलिया, जापान, यूके, यूएस) और यूरोपीय संघ के पास वर्ष 2030 तक प्रगति को ट्रैक करने के लिये खाद्य अपशिष्ट अनुमान उपयुक्त हैं।
  • डेटा भिन्नता और उपराष्ट्रीय अनुमान:
    • भारत, इंडोनेशिया और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में भोजन की बर्बादी के संबंध में केवल उपराष्ट्रीय अनुमान हैं, जो व्यापक राष्ट्रीय डेटा में अंतर को उजागर करते हैं।
    • रिपोर्ट बताती है कि इस भिन्नता के लिये खाद्य अपशिष्ट परिदृश्य के स्पष्ट आँकड़ों के अधिक समावेशी अध्ययन की आवश्यकता है।

खाद्य अपशिष्ट सूचकांक रिपोर्ट 2024 की प्रमुख सिफारिशें क्या हैं?

  • G20 देशों की भागीदारी:
    • घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य अपशिष्ट के संबंध में जागरूकता तथा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये वैश्विक उपभोक्ता रुझानों पर अपने प्रभाव का लाभ उठाते हुए, सतत् विकास लक्ष्य (SDG) 12.3 को प्राप्त करने के लिये G20 देशों को अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं नीति विकास में अग्रणी भूमिका निभाने हेतु प्रोत्साहित करना।
  • सार्वजनिक निजी भागीदारी को बढ़ावा देना:
    • भोजन की बर्बादी और जलवायु तथा जल तनाव पर इसके प्रभावों को कम करने के लिये सार्वजनिक निजी भागीदारी (Public Private Partnerships- PPP) को अपनाने को प्रोत्साहित करें, लक्ष्य-माप-अधिनियम दृष्टिकोण के माध्यम से एक साझा लक्ष्य को सहयोग करने तथा वितरित करने हेतु सरकारों, क्षेत्रीय एवं उद्योग समूहों को एक साथ लाना।
  • खाद्य अपशिष्ट सूचकांक का उपयोग:
    • खाद्य अपशिष्ट को लगातार मापने के लिये खाद्य अपशिष्ट सूचकांक का उपयोग करने हेतु देशों का समर्थन, मज़बूत राष्ट्रीय आधार रेखाएँ विकसित करना और SDG 12.3 की दिशा में प्रगति को ट्रैक करना। इसमें विशेष रूप से खुदरा और खाद्य सेवा क्षेत्रों में व्यापक खाद्य अपशिष्ट डेटा संग्रह की कमी को संबोधित करना शामिल है।
  • प्रतिनिधि राष्ट्रीय खाद्य अपशिष्ट अध्ययन का संचालन:
    • डेटा में भिन्नता को संबोधित करने और व्यक्तिगत तथा प्रणालीगत दोनों स्तरों पर भोजन की बर्बादी से प्रभावी ढंग से निपटने के लिये भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया एवं मैक्सिको जैसे प्रमुख देशों में प्रतिनिधि राष्ट्रीय खाद्य अपशिष्ट अध्ययन की आवश्यकता पर प्रकाश डालना।
  • सभी क्षेत्रों में सहयोगात्मक प्रयास:
    • वर्ष 2030 तक वैश्विक खाद्य बर्बादी को आधा करके SDG 12.3 हासिल करने के लिये सटीक माप, नवीन समाधान और सामूहिक कार्रवाई के महत्त्व पर ज़ोर देते हुए, खाद्य बर्बादी को कम करने के प्रयासों में सहयोग करने हेतु सरकारों, शहरों, खाद्य व्यवसायों, शोधकर्त्ताओं से आग्रह करने की आवश्यकता है।

खाद्य हानि और बर्बादी से संबंधित प्रमुख प्रयास क्या हैं?

  • संवैधानिक प्रावधान:
    • यद्यपि भारतीय संविधान में भोजन के अधिकार के संबंध में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, लेकिन संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित जीवन के मौलिक अधिकार की व्याख्या मानवीय गरिमा के साथ जीने के अधिकार को शामिल करने के लिये की जा सकती है, जिसमें भोजन और अन्य बुनियादी आवश्यकताओं का अधिकार शामिल हो सकता है।
  • बफर स्टॉक/सुरक्षित भंडार: 
    • भारतीय खाद्य निगम (FCI) का मुख्य कार्य न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खाद्यान्न की खरीद और विभिन्न स्थानों पर उसके गोदामों में भंडारण करना है। इसके बाद आवश्यकतानुसार यहाँ से राज्य सरकारों को खाद्यान की आपूर्ति की जाती है।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (NFSA): 
    • यह खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण का कल्याणकारी से अधिकार-आधारित दृष्टिकोण में परिवर्तित होने का प्रतीक है।
    • NFSA 75% ग्रामीण आबादी और 50% शहरी आबादी को निम्नलिखित योजना के तहत कवर करता है:
      • अंत्योदय अन्न योजना: इसके अंतर्गत सबसे निर्धन लोग शामिल हैं, इन्हें प्रतिमाह प्रति परिवार 35 किलोग्राम खाद्यान्न प्रदान किया जाता है।
      • प्राथमिकता वाले परिवार (PHH): PHH श्रेणी के अंतर्गत आने वाले परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रतिमाह 5 किलोग्राम खाद्यान्न प्रदान किया जाता है।

प्रश्न. भुखमरी की समस्या से जूझने के बावजूद, वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थों की बर्बादी होती है। आपूर्ति शृंखला में खाद्य पदार्थों की बर्बादी के कारणों का विश्लेषण कीजिये और अधिक सतत् खाद्य प्रणाली के लिये व्यावहारिक समाधान सुझाइये।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स:

प्रश्न. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अधीन बनाए गए उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2018)

  1. केवल वे ही परिवार सहायता प्राप्त खाद्यान्न लेने की पात्रता रखते हैं जो "गरीबी रेखा से नीचे" (बी.पी.एल.) श्रेणी में आते हैं।
  2. परिवार में 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र की सबसे अधिक उम्र वाली महिला ही राशन कार्ड निर्गत किये जाने के प्रयोजन से परिवार का मुखिया होगी।
  3. गर्भवती महिलाएँ एवं दुग्ध पिलाने वाली माताएँ गर्भावस्था के दौरान और उसके छः महीने बाद तक प्रतिदिन 1600 कैलोरी वाला राशन घर ले जाने की हक़दार हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2
(c) केवल 1 और 3
(d) केवल 3

उत्तर: (b)


मेन्स:

प्रश्न. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? खाद्य सुरक्षा विधेयक ने भारत में भूख और कुपोषण को दूर करने में किस प्रकार सहायता की है? (2021)