डूरंड रेखा विवाद | 06 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
ऐतिहासिक रूप से विवादित डूरंड रेखा पर हाल ही में अफगान तालिबान बलों और पाकिस्तानी सैनिकों के बीच सीमा बाड़बंदी, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) की मौजूदगी तथा अफगान शरणार्थियों के निर्वासन को लेकर लगातार टकराव देखे गए हैं।
- तनाव प्रत्यक्ष सैन्य टकराव में बदल गया है, जिसमें पाकिस्तान द्वारा "गज़ब-ए-लिलहक" नामक एक सीमा पार जवाबी अभियान शामिल है।
डूरंड रेखा क्या है?
- पृष्ठभूमि: डूरंड रेखा पाकिस्तान और अफगानिस्तान को अलग करने वाली 2,640 किमी. (1,640 मील) लंबी एक पारगम्य सीमा है।
- उत्तर-पूर्व में चीन के पास काराकोरम श्रेणी से दक्षिण-पश्चिम में ईरान के पास रेगिस्तान तक फैली यह सीमा खैबर दर्रा और श्वेत पर्वत सहित महत्त्वपूर्ण भौगोलिक और रणनीतिक विशेषताओं से होकर गुज़रती है।
- उत्पत्ति: यह वर्ष 1893 में एक ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासक सर मार्टिमर डूरंड और तत्कालीन अफगानिस्तान के अमीर अब्दुर रहमान खान के बीच एक समझौते के माध्यम से स्थापित की गई थी।
- उद्देश्य: यह मूल रूप से "ग्रेट गेम" के दौरान ब्रिटिश भारत और अफगान अमीरात के बीच प्रभाव क्षेत्रों का सीमांकन करने के लिये डिज़ाइन की गई थी, जो रूसी साम्राज्य के खिलाफ एक बफर ज़ोन के रूप में कार्य करती थी।
- आंग्ल-अफगान युद्ध: वर्ष 1800 के दशक के दौरान अफगानिस्तान रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण बन गया क्योंकि रूस और ब्रिटिश साम्राज्य मध्य एशिया में प्रभुत्व जमाने के लिये होड़ कर रहे थे।
- अंग्रेज़ों ने वर्ष 1839 में अफगानिस्तान पर आक्रमण किया, लेकिन प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध के दौरान उन्हें पीछे हटना पड़ा।
- उन्होंने वर्ष 1878 में पुनः आक्रमण किया, द्वितीय आंग्ल-अफगान युद्ध जीता और गंडमक की संधि (1879) की, जिसने उन्हें अफगानिस्तान की विदेश नीति पर नियंत्रण दे दिया।
- वर्ष 1893 में, सर हेनरी मार्टिमर डूरंड और अमीर अब्दुर रहमान खान ने डूरंड रेखा बनाने पर सहमति व्यक्त की।
- इसने पश्तून जनजातीय क्षेत्रों को विभाजित किया, बलूचिस्तान को ब्रिटिश भारत के अधीन रखा और रूस एवं ब्रिटेन के बीच एक बफर के रूप में वखान गलियारे की स्थापना की।
- तृतीय आंग्ल-अफगान युद्ध (1919) रावलपिंडी की संधि के साथ समाप्त हुआ, जिसने अफगानिस्तान को अपने विदेशी मामलों पर नियंत्रण बहाल कर दिया और डूरंड रेखा की पुष्टि की।
- अंग्रेज़ों ने वर्ष 1839 में अफगानिस्तान पर आक्रमण किया, लेकिन प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध के दौरान उन्हें पीछे हटना पड़ा।
- वर्ष 1947 के बाद की विरासत: 1947 में भारत के विभाजन के बाद पाकिस्तान को यह सीमा विरासत में मिली।
- हालाँकि, अफगानिस्तान ने ऐतिहासिक रूप से इसे एक अंतर्राष्ट्रीय सीमा के रूप में मान्यता देने से इनकार कर दिया है।
डूरंड रेखा के आसपास विवादों के मूल कारण क्या हैं?
- गैर-मान्यता और पश्तून मुद्दा: यह रेखा मनमाने ढंग से नृजातीय पश्तून और बलूच जनजातियों को विभाजित करती है, परिवारों, भूमि और पारंपरिक प्रवासी मार्गों को अलग करती है।
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अफगानिस्तान ने ऐतिहासिक रूप से भू-क्षेत्रीय दावों को सँजोया है, प्रायः एकीकृत "पश्तूनिस्तान" की वकालत की।
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पाकिस्तान द्वारा एकतरफा सीमा बाड़ लगाना: सीमा पार आतंकवाद, तस्करी और अनियमित आवागमन को रोकने के लिये पाकिस्तान ने वर्ष 2017 में डूरंड रेखा पर बाड़ लगाने के लिये एक बड़ी परियोजना शुरू की।
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अफगान तालिबान इस बाड़ को एक शत्रुतापूर्ण कार्य के रूप में देखता है जो एक अवैध सीमा को औपचारिक बनाता है और पश्तून समुदाय को भौतिक रूप से विभाजित करता है। अफगान बलों ने अक्सर बाड़ों को उखाड़ दिया है, जिससे घातक झड़पें हुई हैं।
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TTP कारक (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान): पाकिस्तान अफगान तालिबान पर TTP को सुरक्षित ठिकाना प्रदान करने का आरोप लगाता है जो एक उग्रवादी संगठन है। यह पाकिस्तान में घातक हमले करता है।
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अफगान तालिबान और TTP के बीच वैचारिक सामंजस्य का अर्थ है कि काबुल ने इस समूह के विरुद्ध निर्णायक सैन्य कार्रवाई लेने में अनिच्छा दिखाई है, जिससे इस्लामाबाद निराश है।
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व्यापार और पारगमन अवरोध बिंदु: पाकिस्तान प्रायः तोरखम और चमन-स्पिन बोल्डक जैसे प्रमुख सीमा पार बिंदुओं को दबाव की रणनीति के रूप में बंद कर देता है।
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चूँकि अफगानिस्तान एक भू-आबद्ध देश है जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिये पाकिस्तानी बंदरगाहों पर अत्यधिक निर्भर है। इससे भारी आर्थिक कठिनाई होती है, साथ ही द्विपक्षीय संबंध और खराब होते हैं।
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भारत के लिये डूरंड रेखा विवाद के क्या निहितार्थ हैं?
- पाकिस्तान का रणनीतिक पतन: बढ़ते पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव और सीमा पार झड़पें भारत के खिलाफ एक बफर के रूप में अफगान तालिबान का उपयोग करने की पाकिस्तान की लंबे समय से चली आ रही रणनीति को कमज़ोर करती हैं, जो भारत के इस दावे को मज़बूत करती हैं कि उग्रवादी प्रॉक्सी का समर्थन करने का परिणाम विपरीत होता है।
- पाकिस्तान के लिये टू-फ्रंट चैलेंज: डूरंड रेखा के साथ बढ़ते सैन्यीकरण से पाकिस्तान को अपनी पश्चिमी सीमा पर सैन्य और खुफिया संसाधनों को डायवर्ट करने के लिये मजबूर होना पड़ता है, जिससे संभावित रूप से भारत के पश्चिमी फ्रंट पर दबाव कम होता है।
- भारत के लिये अधिक राजनयिक स्थान: तनावपूर्ण पाकिस्तान-तालिबान संबंध भारत के लिये राजनयिक पहुँच, मानवीय सहायता और अफगानिस्तान के साथ संबंधों का विस्तार करने के अवसर खोलते हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद का उदय: सीमा अस्थिरता इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत और TTP जैसे समूहों को मज़बूत कर सकती है, जिससे क्षेत्रीय आतंकवाद और कट्टरपंथ का खतरा बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
डूरंड रेखा विवाद दक्षिण एशियाई भूराजनीति को नया आकार दे रहा है। हालाँकि यह भारत के खिलाफ पाकिस्तान के रणनीतिक लाभ को कम कर सकता है, क्षेत्रीय अस्थिरता और उग्रवादी विस्तार प्रमुख जोखिम बने हुए हैं, जिसके लिये भारत को अपनी सीमाओं की रक्षा करने और मध्य एशिया में कनेक्टिविटी परियोजनाओं की सुरक्षा की आवश्यकता है।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न: डूरंड रेखा दक्षिण एशिया की सबसे विवादास्पद औपनिवेशिक सीमाओं में से एक बनी हुई है। इस विवाद की ऐतिहासिक जड़ों और समकालीन निहितार्थों का परीक्षण कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1.डूरंड रेखा क्या है?
डूरंड रेखा पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच 2,640 किमी. की एक सीमा है, जिसे 1893 में सर मार्टिमर डूरंड और अफगान अमीर अब्दुर रहमान खान द्वारा ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान का सीमांकन करने के लिये स्थापित किया गया था।
2. अफगानिस्तान डूरंड रेखा को मान्यता क्यों नहीं देता है?
अफगानिस्तान का तर्क है कि इस रेखा ने मनमाने ढंग से पश्तून और बलूच जनजातीय समुदायों को विभाजित किया, जिससे पश्तूनिस्तान की लंबे समय से चली आ रही मांग में वृद्धि हुई।
3. तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) इस विवाद में क्या भूमिका निभाता है?
TTP उग्रवादी अफगान क्षेत्र से संचालित होते हैं और पाकिस्तान में हमले करते हैं, जिससे इस्लामाबाद अफगान तालिबान पर सुरक्षित ठिकाना प्रदान करने का आरोप लगाता है।
4. पाकिस्तान ने डूरंड रेखा पर बाड़ लगाना क्यों शुरू किया?
पाकिस्तान ने आतंकवाद, तस्करी और अवैध घुसपैठ को रोकने के लिये वर्ष 2017 में सीमा पर बाड़ लगाना शुरू किया, लेकिन अफगान तालिबान इसका विरोध करते हैं और सीमा को अवैध बताते हैं।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स
प्रश्न. निम्नलिखित देशों पर विचार कीजिये: (2022)
- अज़रबैजान
- किरगिज़स्तान
- ताजिकिस्तान
- तुर्कमेनिस्तान
- उज़्बेकिस्तान
उपर्युक्त में से किनकी सीमाएँ अफगानिस्तान के साथ लगती हैं?
(a) केवल 1, 2 और 5
(b) केवल 1, 2 3 और 4
(c) केवल 3, 4 और 5
(d) 1, 2, 3, 4 और 5
उत्तर: (c)
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