विनियामकीय सैंडबॉक्स के लिये व्यापक रूपरेखा | 15 Mar 2024

प्रिलिम्स के लिये:

भारतीय रिज़र्व बैंक, विनियामकीय सैंडबॉक्स, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023, फिनटेक 

मेन्स के लिये:

नए वित्तीय नवाचारों के जोखिमों के आकलन में विनियामकीय सैंडबॉक्स का महत्त्व।

स्रोत: बिज़नेस स्टैण्डर्ड

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक ने विनियामकीय सैंडबॉक्स के विभिन्न चरणों को पूरा करने की समय-सीमा को पिछले 7 महीनों से बढ़ाकर 9 महीने कर दिया है।

विनियामकीय सैंडबॉक्स (RS) क्या है?

  • पृष्ठभूमि: 
    • भारतीय रिज़र्व बैंक ने फिनटेक के विस्तृत पहलुओं के साथ उसके निहितार्थों की निगरानी करने एवं रिपोर्ट करने हेतु वर्ष 2016 में एक अंतर-नियामक कार्य समूह की स्थापना की, ताकि नियामक ढाँचे की समीक्षा की जा सके और साथ ही तेज़ी से विकसित हो रहे फिनटेक परिदृश्य की गतिशीलता पर प्रतिक्रिया दी जा सके।
    • रिपोर्ट में एक अच्छी तरह से परिभाषित स्थान और अवधि के भीतर एक विनियामकीय सैंडबॉक्स के लिये एक उपयुक्त ढाँचे को प्रस्तुत करने की सिफारिश की गई है, जहाँ वित्तीय क्षेत्र नियामक दक्षता बढ़ाने, जोखिमों का प्रबंधन करने तथा उपभोक्ताओं के लिये नए अवसर सृजित करने हेतु आवश्यक नियामक मार्गदर्शन प्रदान करेगा।       
  • परिचय: 
    • विनियामकीय सैंडबॉक्स एक नियंत्रित नियामक वातावरण में नए उत्पादों अथवा सेवाओं के प्रत्यक्ष रूप से हुए परीक्षण को संदर्भित करता है जिसके लिये नियामक परीक्षण के सीमित उद्देश्य हेतु कुछ नियामक छूट की अनुमति दे भी सकते हैं और नहीं भी।
    • विनियामकीय सैंडबॉक्स एक महत्त्वपूर्ण उपकरण है जो अधिक गतिशील, साक्ष्य-आधारित नियामक वातावरण को सक्षम बनाता है जो उभरती प्रौद्योगिकियों से सीखते हुए उनके साथ-साथ विकसित होता है।
    • यह विनियामक, वित्तीय सेवा प्रदाताओं और ग्राहकों को उनके जोखिमों की निगरानी तथा नियंत्रण करते हुए नए वित्तीय नवाचारों के लाभों एवं जोखिमों पर साक्ष्य एकत्र करने के लिये क्षेत्र परीक्षण करने में सक्षम बनाता है। 
  • उद्देश्य:
    • विनियामकीय सैंडबॉक्स का उद्देश्य वित्तीय सेवाओं में उत्तरदायी नवाचार को बढ़ावा देकर दक्षता को प्रोत्साहन प्रदान करना और उपभोक्ताओं को लाभ पहुँचाना है।
    • यह विनियामक को संबद्ध पारितंत्र के साथ जुड़ने और नवाचार-सक्षम अथवा नवाचार-उत्तरदायी नियमों को विकसित करने के लिये एक संरचित अवसर प्रदान कर सकता है जो प्रासंगिक, अल्प लागत वाले वित्तीय उत्पादों की डिलीवरी की सुविधा प्रदान करता है।
  • लक्षित आवेदक:
    • विनियामकीय सैंडबॉक्स में प्रवेश के लिये लक्षित आवेदकों में फिनटेक, बैंक और वित्तीय सेवा व्यवसायों के साथ साझेदारी करने वाली अथवा उन्हें सहायता प्रदान करने वाली कंपनियाँ शामिल हैं।

भारत में विनियामकीय सैंडबॉक्स का अंगीकरण:

  • फिनटेक फोकस: भारतीय रिज़र्व बैंक ने वर्ष 2019 में पहला विनियामकीय सैंडबॉक्स कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
    • यह RBI की देखरेख में नियंत्रित वातावरण में नवीन वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के लाइव परीक्षण की सुविधा प्रदान करता है।
  • विषयगत कॉहोर्ट्स: RBI सैंडबॉक्स विषयगत कॉहोर्ट्स के आधार पर संचालित होता है। प्रत्येक कॉहोर्ट खुदरा भुगतान, सीमा पारीय लेन-देन अथवा MSME ऋण जैसे विशिष्ट क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करता है।
    • विनियामकीय सैंडबॉक्स से संबंधित प्रमुख घटक:
      • विनियामकीय सैंडबॉक्स कॉहोर्ट्स: वित्तीय समावेशन, भुगतान और ऋण, डिजिटल KYC आदि पर ध्यान केंद्रित करने वाले विषयगत कॉहोर्ट्स पर आधारित।
      • विनियामक छूट: RBI द्वारा कुछ छूट प्रदान की जा सकती हैं जिनमें चलनिधि आवश्यकताएँ, बोर्ड संरचना, वैधानिक प्रतिबंध आदि शामिल हैं।
      • विनियामकीय सैंडबॉक्स परीक्षण से अपवर्जन: सांकेतिक नकारात्मक सूची में क्रेडिट रजिस्ट्री, क्रिप्टोकरेंसी, प्रारंभिक सिक्का प्रस्ताव/पेशकश (Initial Coin Offerings) आदि शामिल हैं।
  • टेलीकॉम सैंडबॉक्स: सरकार ने "मिलेनियम स्पेक्ट्रम रेगुलेटरी सैंडबॉक्स" पहल शुरू की। इसमें एक स्पेक्ट्रम रेगुलेटरी सैंडबॉक्स (SRS) और वायरलेस टेस्ट जोन (WiTe ज़ोन) शामिल हैं।
    • इन पहलों का उद्देश्य दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के लिये नियमों को सरल बनाना और तकनीकी प्रगति के लिये नए स्पेक्ट्रम बैंड की खोज करना है।

विनियामकीय सैंडबॉक्स से संबंधित लाभ और चुनौतियाँ क्या हैं?

  • लाभ:
    • विनियामक अंतर्दृष्टि: नियामक उभरती प्रौद्योगिकियों के लाभों और जोखिमों तथा उनके निहितार्थ पर प्रत्यक्ष अनुभवजन्य साक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं, जिससे वे संभावित नियामक परिवर्तनों पर विचारशील दृष्टिकोण अपना सकें।
    • वित्तीय प्रदाताओं के लिये समझ: मौजूदा वित्तीय सेवा प्रदाता अपनी समझ में सुधार कर सकते हैं कि नई वित्तीय प्रौद्योगिकियाँ कैसे काम कर सकती हैं, संभावित रूप से उन्हें अपनी व्यावसायिक योजनाओं के साथ ऐसी नई प्रौद्योगिकियों को उचित रूप से एकीकृत करने में मदद मिल सकती है।
    • लागत प्रभावी व्यवहार्यता परीक्षण: RS के उपयोगकर्त्ताओं के पास बड़े और अधिक महँगे रोल-आउट की आवश्यकता के बिना उत्पाद की व्यवहार्यता का परीक्षण करने की क्षमता है।
    • वित्तीय समावेशन क्षमता: फिनटेक ऐसे समाधान प्रदान करते हैं जो संभावित रूप से महत्त्वपूर्ण तरीके से वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ा सकते हैं।
    • नवप्रवर्तन के लिये महत्त्वपूर्ण क्षेत्र: जिन क्षेत्रों को संभावित रूप से RS से बल मिल सकता है उनमें माइक्रोफाइनेंस, संभावित रूप से नवीन लघु बचत, प्रेषण, मोबाइल बैंकिंग और अन्य डिजिटल भुगतान शामिल हैं।
  • चुनौतियाँ:
    • लचीलापन और समय की कमी: नवप्रवर्तकों को सैंडबॉक्स प्रक्रिया के दौरान लचीलेपन और समय के साथ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे संभावित रूप से अनुकूलन तथा त्वरित पुनरावृत्ति करने की उनकी क्षमता प्रभावित हो सकती है।
    • केस-दर-केस प्राधिकरण: व्यक्तिगत आधार पर अनुकूलित प्राधिकरण और नियामक छूट हासिल करना एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है, जिसमें अक्सर व्यक्तिपरक मूल्यांकन शामिल होता है, जिसके परिणामस्वरूप प्रयोग में देरी हो सकती है।
    • कानूनी छूट पर सीमाएँ: RBI या उसका नियामक सैंडबॉक्स कानूनी छूट की पेशकश नहीं कर सकता है, जो प्रयोग करते समय कानूनी जोखिमों को कम करने की चाह रखने वाले नवप्रवर्तकों को सीमित कर सकता है।
    • सैंडबॉक्स के बाद विनियामक स्वीकृतियाँ: सफल सैंडबॉक्स परीक्षण के बाद भी, प्रयोगकर्त्ताओं को अपने उत्पाद, सेवाओं या प्रौद्योगिकी को व्यापक अनुप्रयोग के लिये अनुमति देने से पहले नियामक अनुमोदन की आवश्यकता हो सकती है, जिससे संभावित रूप से बाज़ार में आने का समय बढ़ सकता है।

आगे की राह 

  • नवप्रवर्तकों पर समय और प्रशासनिक बोझ को कम करने के लिये सैंडबॉक्स प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की दिशा में काम करें। इसमें आवेदन प्रक्रियाओं को सरल बनाना और भागीदारी के लिये स्पष्ट दिशा-निर्देश प्रदान करना शामिल हो सकता है।
  • निर्णय लेने के लिये स्पष्ट मानदंड प्रदान करके और यह सुनिश्चित करके कि निर्णय लगातार तथा निष्पक्ष रूप से किये जाएँ, मामले-दर-मामले प्राधिकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाएँ।
  • सैंडबॉक्स में भाग लेने वाले नवप्रवर्तकों के लिये व्यापक शिक्षा और सहायता प्रदान करें, जिसमें नियामक आवश्यकताओं तथा संभावित कानूनी मुद्दों पर मार्गदर्शन शामिल है।
  • प्रयोग के दौरान उत्पन्न होने वाले कानूनी मुद्दों, जैसे उपभोक्ता हानि, के समाधान के लिये रूपरेखा विकसित करने हेतु कानूनी विशेषज्ञों के साथ सहयोग करें। इसमें नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिये सुरक्षा उपायों को लागू करना शामिल हो सकता है।
  • यह सुनिश्चित करने के लिये कि सफल प्रयोग तेज़ी से व्यापक अनुप्रयोग के लिये आगे बढ़ सकें, सैंडबॉक्स परीक्षण के बाद विनियामक अनुमोदन प्राप्त करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करें। इसमें सिद्ध नवाचारों हेतु फास्ट-ट्रैक अनुमोदन तंत्र स्थापित करना शामिल हो सकता है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)  

प्रिलिम्स:

प्रश्न. भारत के संदर्भ में निम्नलिखित पर विचार कीजिये: (2010)

  1. बैंकों का राष्ट्रीयकरण
  2. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का गठन
  3. बैंक शाखाओं द्वारा गाँव को गोद लेना

उपर्युक्त में से किसे भारत में "वित्तीय समावेशन" प्राप्त करने के लिये उठाया गया कदम माना जा सकता है?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)