अम्ल वर्षा | 01 Feb 2024

प्रिलिम्स के लिये:

जीवाश्म ईंधन, अम्ल वर्षा, वायु प्रदूषण, फ्लू  गैस डिसल्फराइज़ेशन, पूर्वी एशिया में एसिड डिपोज़िशन मॉनिटरिंग नेटवर्क (Acid Deposition Monitoring Network in East Asia - EANET)।

मेन्स के लिये:

अम्ल वर्षा, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण।

स्रोत: द हिंदू 

चर्चा में क्यों?

अम्ल वर्षा (Acid Rain) एक जटिल पर्यावरणीय समस्या है जिसके कई कारण और व्यापक परिणाम हैं तथा इसकी उत्पत्ति जीवाश्म ईंधन ( Fossil Fuels) में हुई है।

अम्ल वर्षा क्या है?

  • परिचय:
    • अम्ल वर्षा या अम्ल निक्षेप एक व्यापक शब्द है जिसमें सल्फ्यूरिक या नाइट्रिक अम्ल जैसे अम्लीय घटकों के साथ किसी भी प्रकार की वर्षा शामिल होती है जो नम या शुष्क रूप में वायुमंडल से पृथ्वी पर गिरती है।
    • इसमें बारिश, बर्फ, कोहरा, ओले या यहाँ तक कि अम्लीय धूल भी शामिल हो सकती है।
  • अम्ल वर्षा का निर्माण:
    • जब सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) वायुमंडल में जल तथा ऑक्सीजन के साथ क्रिया करते हैं, तो वे क्रमशः सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) एवं नाइट्रिक अम्ल (HNO3 बनाते हैं।
    • ये अम्ल फिर जल की बूंदों में घुल जाते हैं, जिससे अम्ल वर्षा, बर्फ या कोहरा बनता है।
      • अम्ल वर्षा का सामान्य pH (Potential of Hydrogen) लगभग 4.2-4.4 होता है, जो इसे सामान्य वर्षा (जिसका pH लगभग 5.6 होता है) की तुलना में अधिक अम्लीय बनाता है।

  • अम्ल वर्षा के कारण:
    • जीवाश्म ईंधन का दहन: जीवाश्म ईंधन ( Fossil Fuels) के दहन से, विशेष रूप से सल्फर युक्त, सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और उच्च ताप पर, नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) निकलते हैं।
      • जीवाश्म ईंधन का दहन वाहनों में प्रचलित है और यह पर्यावरण प्रदूषकों का एक प्राथमिक स्रोत है।
      • विद्युत संयंत्रों और औद्योगिक प्रक्रियाओं में कोयले के दहन से भी ये पदार्थ उत्सर्जित होते हैं।
    • प्राकृतिक स्रोत: ज्वालामुखी उद्गार और आकाशीय बिजली (Lightning) भी वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड तथा नाइट्रोजन ऑक्साइड की उपस्थिति में योगदान करते हैं।
    • वायु प्रदूषण: वायुमंडल में, प्रदूषक SO2 और NOx रासायनिक क्रिया करते हैं, जिससे सल्फ्यूरिक तथा नाइट्रिक अम्ल बनते हैं।
      • जलवाष्प के साथ मिश्रण कर, वे वर्षण के दौरान अम्लीय वर्षा बनाते हैं।
  • अम्ल वर्षा/निक्षेप:
    • नम निक्षेपण (Wet Deposition): वायुमंडल में क्रिया कर सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक अम्ल वर्षा, बर्फ, कोहरे या ओलों के साथ मिश्रित होकर पृथ्वी पर गिरते हैं।
    • शुष्क निक्षेपण (Dry Deposition): नमी की अनुपस्थिति में शुष्क निक्षेप के रूप में अम्लीय कण और गैसें भी वायुमंडल से संघनित हो जाती हैं।
      • अम्लीय कण और गैसें, सतहों (जल निकायों, वनस्पति, भवनों) पर तेज़ी से जमा हो जाते हैं या वायुमंडलीय परिवहन के दौरान क्रिया करके बड़े कणों का निर्माण करते हैं जो मानव स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होते हैं।

अम्ल वर्षा के क्या प्रभाव हैं?

  • जलीय जीवन पर प्रभाव:
    • अम्ल वर्षा नदियों तथा झीलों जैसे जलाशयों को प्रभावित करती हैं जिससे इन जलाशयों की कुछ प्रजातियों जैसे ट्राउट और मछली के जीवन पर प्रभाव पड़ता है
    • जलाशयों में अम्लता की बढ़ती मात्रा उनके प्रजनन प्रारूप को बाधित करती है जिसके परिणामस्वरूप प्रभावित नदियों तथा झीलों में मछलियों की संख्या में गिरावट आ सकती है।
  • समुद्री जल एवं प्रजातियों के वितरण पर प्रभाव:
    • अम्लता की बढ़ती मात्रा समुद्री जल के pH को परिवर्तित करती है जिससे विभिन्न जीवों के वितरण तथा अस्तित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
    • कवच (Shell) युक्त समुद्री प्रजातियाँ, जैसे- मोलस्क (Mollusks) तथा कुछ प्रकार के प्लवक, विशेष चुनौतियों का सामना करते हैं क्योंकि अम्लीकरण उनके द्वारा सुरक्षात्मक कवच विकसित करने और संरक्षित करने की उनकी क्षमता में बाधा उत्पन्न करते हैं।
  • भौतिक अवसंरचना पर प्रभाव:
    • अम्ल वर्षा भौतिक संरचनाओं तथा स्मारकों के लिये खतरा उत्पन्न करती है जिससे उनकी विकृति तथा रंग खराब होता है।
    • उल्लेखनीय उदाहरणों में ताजमहल शामिल है, जिसका प्रतिष्ठित सफेद संगमरमर अम्ल वर्षा से प्रभावित हुआ है तथा सल्फ्यूरिक एसिड अभिक्रियाओं के कारणवश उसका संगमरमर वर्तमान में हल्के पीले रंग का हो गया है।
      • इसी प्रकार चूना पत्थर अथवा संगमरमर से निर्मित भवन, मूर्तियाँ तथा पुल संक्षारण तथा क्षय के प्रति संवेदनशील होते हैं।
    • अम्ल वर्षा सतहों के क्षरण को और अधिक गति प्रदान करती है जिससे वास्तुशिल्प स्थलों की संरचनात्मक अखंडता प्रभावित होती है।

अम्ल वर्षा शमन उपाय क्या हैं?

  • फ्लू-गैस डी-सल्फराइज़ेशन 
    • कोयला विद्युत संयंत्रों ने सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जन को 90% से अधिक कम करने के लिये फ्लू-गैस डी-सल्फराइज़ेशन जैसी तकनीकों को अपनाया है।
  • ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP):
    • GRAP आपातकालीन उपायों की एक शृंखला है जो दिल्ली-NCR क्षेत्र में एक निश्चित सीमा तक पहुँचने के बाद वायु की गुणवत्ता में होने वाली गिरावट को रोकने के लिये लागू होता है।
    • एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ (2016) मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद वर्ष 2016 में इसे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुमोदित किया गया था और वर्ष 2017 में अधिसूचित किया गया था।
  • BS-VI वाहन
  • वायु गुणवत्ता प्रबंधन हेतु नवीन आयोग
  • वायु गुणवत्ता और मौसम पूर्वानुमान तथा अनुसंधान प्रणाली (Air Quality and Weather Forecasting and Research- SAFAR)
  • राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI)
  • वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग:
    • पूर्वी एशिया एसिड डिपोजिशन मॉनिटरिंग नेटवर्क (Acid Deposition Monitoring Network in East Asia- EANET) तथा अन्य पहलों के माध्यम से संपूर्ण विश्व की सरकारें अम्ल वर्षा को कम करने के लिये सहयोग कर रही हैं।
      • EANET पूर्वी एशियाई देशों की अंतर-सरकारी पहल है जिसका उद्देश्य अम्ल जमाव की निगरानी तथा उसका समाधान करना है जिसमें अम्ल वर्षा भी शामिल है।
      • यह वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड तथा नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे अम्लीय पदार्थों के जमाव एवं पर्यावरण, विशेष रूप से पारिस्थितिक तंत्र व जल निकायों पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित डेटा एकत्र करता है।

  अम्ल और क्षार के बीच क्या अंतर हैं?

विशेषता

अम्ल 

क्षार/भस्म

परिभाषा

प्रोटॉन (H⁺ आयन) का त्याग/दान करते हैं 

Accept protons (H⁺ ions) or donate pairs of electrons प्रोटॉन (H⁺ आयन) ग्रहण करते हैं या इलेक्ट्रॉन युग्म का त्याग/दान करते हैं

पैमाने पर pH मान 

7 से कम (कम pH प्रबल अम्ल को इंगित करता है)

7 से अधिक (उच्च pH प्रबल क्षार/भस्म को इंगित करता है)

आयन का विरचन

जल में घुलने पर हाइड्रोजन आयन (H⁺) उत्पन्न करते हैं

जल में घुलने पर हाइड्रॉक्साइड आयन (OH⁻) उत्पन्न करते हैं

स्वाद

खट्टा

कड़वा

अनुभूति (त्वचा पर)

त्वचा का क्षय हो सकता है और जलन उत्पन्न कर सकता है

फिसलन युक्त और साबुन जैसी अनुभूति 

उदाहरण

हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl), सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄)

सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH), पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH)

आगे की राह  

पर्यावरणीय चुनौतियों और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिये संधारणीय प्रथाओं को लागू करने, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने, हानिकारक पदार्थों के उत्सर्जन से संबंधित सख्त नियमों को लागू करने, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने तथा नवीन प्रौद्योगिकियों में निवेश करने की आवश्यकता है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स:

प्रश्न 1. ताम्र प्रगलन संयंत्रों को लेकर चिंता क्यों है?

  1. वे पर्यावरण में घातक मात्रा में कार्बन मोनोऑक्साइड निर्मुक्त कर सकते हैं। 
  2. कॉपर स्लैग पर्यावरण में कुछ भारी धातुओं के निक्षालन का कारण बन सकता है। 
  3. वे प्रदूषक के रूप में सल्फर डाइऑक्साइड निर्मुक्त कर सकते हैं।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)

व्याख्या:

  • कई अलग-अलग प्रक्रियाएंँ हैं जिनका उपयोग तांँबे के उत्पादन के लिये किया जा सकता है। पारंपरिक प्रक्रियाओं में से एक रेवरबेरेटरी भट्टियों (या अधिक जटिल अयस्कों के लिये इलेक्ट्रिक भट्टियांँ) में गलाने पर आधारित है, जिससे मैट (कॉपर-आयरन सल्फाइड) का उत्पादन होता है। भट्ठी से मैट को कन्वर्टर्स पर चार्ज़ किया जाता है, जहांँ पिघला हुआ पदार्थ हवा की उपस्थिति में लोहे और सल्फर अशुद्धियों (कन्वर्टर स्लैग के रूप में) को हटाने तथा ब्लिस्टर कॉपर बनाने के लिये ऑक्सीकृत होता है।
  • इस प्रक्रिया से उत्सर्जित होने वाले प्रमुख वायु प्रदूषक सल्फर डाइऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर हैं तथा ठोस अपशिष्ट का मुख्य भाग स्लैग छोड़ दिया जाता है। अत: कथन 3 सही है।
  • उत्पादित ताम्र प्रगलन में आर्सेनिक, लेड, कैडमियम, बेरियम, जिंक आदि सहित कई संभावित ज़हरीले तत्त्वों की महत्त्वपूर्ण सांद्रता हो सकती है। स्लैग इन संभावित जहरीले तत्त्वों को प्राकृतिक अपक्षय परिस्थितियों में पर्यावरण में निष्कासित करता है और मृदा, सतही जल एवं भूजल के प्रदूषण का कारण बन सकता है। अत: कथन 2 सही है।
  • चूँकि स्लैग को रासायनिक रूप से निष्क्रिय माना जाता है, इसे सीमेंट के साथ मिलाया जाता है और इसका उपयोग सड़कों तथा रेलरोड बेड के निर्माण के लिये किया जाता है। इसका उपयोग सैंडब्लास्टिंग के लिये भी किया जाता है।
  • ताम्र प्रगलन पर वातावरण में कार्बन मोनोऑक्साइड की घातक मात्रा का निष्कासित नहीं होती है। अतः कथन 1 सही नहीं है।

अतः विकल्प (B) सही उत्तर है।


प्रश्न 2. भट्टी के तेल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. यह तेल रिफाइनरियों का उत्पाद है। 
  2. कुछ उद्योग इसका उपयोग विद्युत उत्पादन करने के लिये करते हैं। 
  3. इसके उपयोग से वातावरण में सल्फर का उत्सर्जन होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)

व्याख्या:

  • भट्टी के तेल/फर्नेस तेल (Furnace Oil) या ईंधन तेल कच्चे तेल के आसवन का एक गहरा चिपचिपा अवशिष्ट उत्पाद है। इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के दहन उपकरणों में ईंधन के रूप में किया जाता है। सल्फर के ऑक्साइड का उत्सर्जन ईंधन तेल की सल्फर सामग्री का प्रत्यक्ष परिणाम है। अत: कथन 1 और 3 सही हैं।
  • भट्टी के तेल का उपयोग:
    • विद्युत उत्पादन के लिये समुद्री इंजन और धीमी गति के इंजन;
    • चाय की पत्तियों को सुखाना;
    • विद्युत उत्पादन के लिये गैस टर्बाइन;
    • उर्वरक निर्माण के लिये फीड स्टॉक;
  • थर्मिक द्रव हीटर और हॉट एयर जनरेटर। अत: कथन 2 सही है।

अतः विकल्प (d) सही उत्तर है।


मेन्स:

प्रश्न 1. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा हाल ही में जारी किये गए संशोधित वैश्विक वायु गुणवत्ता दिशा-निर्देशों (AQGs) के मुख्य बिंदुओं का वर्णन कीजिये। विगत 2005 के अद्यतन से ये किस प्रकार भिन्न हैं? इन संशोधित मानकों को प्राप्त करने के लिये, भारत के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में किन परिवर्तनों की आवश्यकता हैं? (2021)

प्रश्न 2. सरकार द्वारा किसी परियोजना को अनुमति देने से पूर्व अधिकाधिक पर्यावरणीय प्रभाव आकलन अध्ययन किये जा रहे हैं। कोयला गर्त-शिखरों (पिटहेड्स) पर अवस्थित कोयला-अग्नित तापीय संयंत्रों के पर्यावरणीय प्रभावों पर चर्चा कीजिये। (2014)