प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के 11 वर्ष | 10 Apr 2026
प्रिलिम्स के लिये: प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY), भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI), सूक्ष्म इकाइयों के लिये क्रेडिट गारंटी फंड (CGFMU), अकाउंट एग्रीगेटर।
मेन्स के लिये: वित्तीय समावेशन और उद्यमिता को बढ़ावा देने में PMMY का महत्त्व, इसकी उपलब्धियाँ और इससे जुड़ी चुनौतियाँ।
चर्चा की क्यों?
भारत के प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) की 11वीं वर्षगाँठ पर इसकी सफलता की सराहना की।
सारांश
- PMMY द्वारा सूक्ष्म एवं लघु व्यवसायों को बिना किसी गारंटी के ऋण उपलब्ध कराकर वित्तीय समावेशन के दायरे को बढ़ाया गया है। इसने उद्यमिता के साथ-साथ महिला सशक्तीकरण और अर्थव्यवस्था के औपचारिक स्वरूप को सुदृढ़ करने में मदद की है।
- हालाँकि, ऋण के छोटे आकार, बढ़ते NPA और सीमित मूल्यवर्द्धन जैसी बाधाएँ इसके विस्तार में चुनौतियाँ खड़ी कर रही हैं। 'क्रेडिट-प्लस' मॉडल और तरुण प्लस जैसी पहलों के माध्यम से इन कमियों को दूर कर सतत आर्थिक विकास की राह प्रशस्त की जा सकती है।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) क्या है?
- परिचय: 8 अप्रैल, 2015 को शुरू की गई PMMY भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है जिसका उद्देश्य नॉन-कॉर्पोरेट, गैर-कृषि सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSE) को बिना किसी गारंटी के संस्थागत ऋण प्रदान करना है।
- उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य स्वरोज़गार को बढ़ावा देना और ज़मीनी स्तर के उद्यमियों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाना है।
- यह योजना भारत के वित्तीय समावेशन कार्यक्रम की आधारशिला है, जो तीन स्तंभों पर आधारित है: बैंकिंग सुविधाओं से वंचित लोगों को बैंकिंग सुविधा प्रदान करना, असुरक्षित लोगों को सुरक्षा प्रदान करना और वित्तपोषित न होने वाले लोगों को वित्तपोषित करना।
- कार्यान्वयन एजेंसी: यह वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के अधीन कार्य करती है।
- वित्तपोषण प्रावधान: अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCB), क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB), गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और सूक्ष्म वित्त संस्थानों (MFI) जैसे सदस्य ऋण देने वाली संस्थाओं (MLI) द्वारा ऋण प्रदान किये जाते हैं।
- SIDBI की सहायक कंपनी मुद्रा (माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी लिमिटेड) ऋण देने वाली इकाइयों को पुनर्वित्त सहायता प्रदान करती है, किंतु प्रत्यक्ष ऋण प्रदान नहीं करती है।
- ऋण गारंटी: सूक्ष्म इकाइयों के लिये ऋण गारंटी कोष (CGFMU) PMMY ऋणों के लिये गारंटी कवरेज प्रदान करता है, जिससे ऋण देने वाली संस्थाओं के लिये जोखिम कम हो जाता है।
- पात्र लाभार्थियों में व्यक्ति, स्वामित्व वाली संस्थाएँ, साझेदार फर्म, निजी और सार्वजनिक लिमिटेड कंपनियाँ और अन्य कानूनी संस्थाएँ शामिल हैं।
- मुद्रा कार्ड: यह छोटे उद्यमियों की कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये एक लचीली, परेशानी मुक्त ऋण सुविधा प्रदान करता है।
- यह ओवरड्राफ्ट सुविधा वाला RuPay डेबिट कार्ड के रूप में कार्य करता है, जिससे आसान निकासी, भुगतान और किफायती क्रेडिट उपयोग संभव होता है।
- PMMY के अंतर्गत ऋण श्रेणियाँ:
|
श्रेणी |
ऋण राशि की सीमा |
कुल ऋण में हिस्सा |
उद्देश्य |
|
शिशु |
₹50,000 तक |
74% |
व्यवसाय शुरू करना (बहुत छोटे पैमाने पर, बुनियादी सेटअप) |
|
किशोर |
₹50,000 – ₹5 लाख |
24% |
प्रारंभिक चरण के व्यवसाय का विस्तार करना (उपकरण खरीदना) |
|
तरुण |
₹5 लाख – ₹10 लाख |
2% |
स्थापित व्यवसाय को बड़े पैमाने पर ले जाना (उत्पादन बढ़ाना, श्रमिकों को काम पर रखना) |
|
तरुण प्लस |
₹10 लाख – ₹20 लाख |
0.004% |
केंद्रीय बजट 2024–25 में घोषित, यह "बिना वित्तपोषण वालों को वित्तपोषण" के उद्देश्य को सुदृढ़ करता है, जिससे उन सफल व्यवसायों को और विस्तार दिया जा सके जिन्होंने पहले ही अपने तरुण ऋण चुका दिये हैं। |
PMMY की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या हैं?
- बड़े पैमाने पर ऋण तक पहुँच: पिछले दशक में इस योजना ने 57 करोड़ से अधिक ऋणों को स्वीकृति प्रदान की है, जो 40.07 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
- महिला उद्यमिता को बढ़ावा देना: यह योजना नारी शक्ति की एक प्रमुख चालक रही है; महिलाएँ सभी ऋण लाभार्थियों का 67% (दो-तिहाई) हिस्सा हैं।
- उपेक्षित समुदायों को सशक्त बनाना: PMMY सामाजिक समानता को बढ़ावा देता है, जिसमें 51% से अधिक लाभार्थी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से संबंधित हैं।
- औपचारिक अर्थव्यवस्था में संक्रमण: 12 करोड़ से अधिक खाते पहली बार उद्यमी बनने वालों के हैं, जो उन्हें स्थानीय साहूकारों के अनौपचारिक ऋण नेटवर्क से सफलतापूर्वक बाहर निकालकर औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में एकीकृत कर रहे हैं।
- अभूतपूर्व पैमाना: वित्तीय वर्ष 2015-16 में प्रारंभ के पश्चात् यह योजना निरंतर विस्तारित हुई है; वर्ष 2023-24 में यह 6.67 करोड़ ऋणों (5.41 लाख करोड़ रुपये) के साथ अपने उच्चतम स्तर पर पहुँची, तथा मार्च 2026 तक 5.65 लाख करोड़ रुपये की स्वीकृति के साथ इसने सुदृढ़ प्रगति को बनाए रखा है।
- वर्ष 2047 के लिये विज़न: इन 57.79 करोड़ ऋणों द्वारा प्रदान की गई निरंतर वित्तीय सुरक्षा और विश्वास सीधे सरकार के 2047 तक समावेशी विकास प्राप्त करने और भारत को एक विकसित राष्ट्र (विकसित भारत) में बदलने के लक्ष्य के अनुरूप है।
PMMY से संबंधित चुनौतियाँ क्या हैं?
- संरचनात्मक विषमता: ऐतिहासिक रूप से 70% से अधिक ऋण 'शिशु' श्रेणी में केंद्रित रहे हैं।
- यह सूक्ष्म इकाइयों के स्थायी लघु और मध्यम उद्यमों में विकसित होने में विफलता को इंगित करता है, जो भारत के औद्योगिक परिदृश्य में "मिसिंग मिडिल" की समस्या को बनाए रखता है और उच्च आर्थिक गतिशीलता को स्थिर करता है।
- ऋण-अवशोषण क्षमता घाटा: यह योजना पूंजी निवेश को प्राथमिकता देती है लेकिन ऋणकर्त्ता की ऋण-अवशोषण क्षमता को अनदेखा करती है।
- समवर्ती क्षमता निर्माण (वित्तीय साक्षरता, व्यावसायिक कौशल, बाज़ार पहुँच) के बगैर ऋणकर्त्ता प्रायः धन का उत्पादक रूप से उपयोग करने में विफल होते हैं, जिससे सूक्ष्म-उद्यम विफलता दर उच्च होती है।
- क्षेत्रीय असंतुलन और निम्न मूल्यवर्द्धन: MUDRA ऋण मुख्य रूप से व्यापार और सेवा क्षेत्रों में केंद्रित हैं।
- यह संरचनात्मक पूर्वाग्रह रोज़गार गुणक प्रभाव को सीमित करता है और सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF) में न्यूनतम योगदान देता है।
- बढ़ती गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ (NPA): ऋण की संपार्श्विक प्रकृति NPA और ऋण चूक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिये एक चिंता का विषय बनी हुई है।
- ऋण-प्रतिस्थापन बनाम संपत्ति सृजन: वितरित किये गए ऋण की एक महत्त्वपूर्ण राशि का उपयोग लाभार्थियों द्वारा पूंजीगत व्यय या नवीन उत्पादक संपत्तियों के निर्माण के बजाय अनौपचारिक साहूकारों से मौज़ूदा, उच्च-लागत ऋण को पुनर्वित्त करने के लिये किया जाता है, जिससे योजना का इच्छित आर्थिक प्रभाव कम हो जाता है।
PMMY को कौन-से उपाय मज़बूत कर सकते हैं?
- नकदी प्रवाह-आधारित ऋण प्रणाली की ओर परिवर्तन: बैंकों को भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), विशेष रूप से अकाउंट एग्रीगेटर (AA) ढाँचा और GST नेटवर्क (GSTN) का उपयोग करते हुए पारंपरिक, संपार्श्विक ऋण से हटकर गतिशील, नकदी प्रवाह-आधारित क्रेडिट मूल्यांकन की ओर बढ़ना चाहिये।
- यह व्यवसाय की सेहत की वास्तविक समय निगरानी को संभव बनाता है और NPA के जोखिम को कम करता है।
- ‘क्रेडिट-प्लस’ दृष्टिकोण अपनाना: नीति को केवल ‘ऋण वितरण’ से आगे बढ़कर समग्र ‘उद्यम विकास’ की दिशा में स्थानांतरित करना चाहिये।
- इसके लिये प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) तथा ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) और स्किल इंडिया मिशन जैसे प्लेटफॉर्मों के बीच संस्थागत समन्वय आवश्यक है, ताकि उधारकर्त्ताओं को कौशल उन्नयन से लेकर बाज़ार से जुड़ाव तक संपूर्ण सहायता प्रदान की जा सके।
- सूक्ष्म स्तर पर अंतिम उपयोग की निगरानी: ऋण देने वाली संस्थाओं को डेटा विश्लेषण और AI-आधारित प्रारंभिक चेतावनी संकेत (EWS) का उपयोग करके वितरित धन के अंतिम उपयोग पर निगरानी रखनी चाहिये।
- यह व्यावसायिक ऋणों के व्यक्तिगत उपभोग की ओर विचलन को रोकने में मदद करेगा तथा खातों के NPA बनने से पहले ही वित्तीय तनाव की पहचान संभव बनाएगा।
- सूक्ष्म विनिर्माण को प्रोत्साहन देना: ‘मेक इन इंडिया’ और जनसांख्यिकीय लाभांश के उपयोग जैसे व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप मुद्रा योजना को संरेखित करने के लिये सूक्ष्म विनिर्माण इकाइयों हेतु विशेष प्रोत्साहन (जैसे– अधिक ब्याज अनुदान या प्राथमिकता गारंटी कवरेज) स्पष्ट रूप से शुरू किये जाने चाहिये।
- NBFC और MFI एकीकरण को सुदृढ़ करना: पारंपरिक वाणिज्यिक बैंकों के पास अक्सर अनौपचारिक क्षेत्र के लिये उपयुक्त अंडरराइटिंग मॉडल (ऋण जोखिम मूल्यांकन मॉडल) का अभाव होता है।
- इस योजना को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) और माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (MFIs) को और अधिक सशक्त करना चाहिये, जिनके पास ‘लास्ट-माइल’ कनेक्टिविटी और ज़मीनी स्तर पर क्रेडिट मूल्यांकन की विशेष विशेषज्ञता होती है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने बिना वित्तपोषण वाले क्षेत्र तक पहुँच का विस्तार किया है, जिससे उद्यमिता, आय और सशक्तीकरण (3E) को बढ़ावा मिला है। ‘क्रेडिट-प्लस’ दृष्टिकोण तथा ‘तरुण प्लस’ जैसी पहलों के माध्यम से यह छोटे उद्यमों को विस्तार करने एवं रोज़गार सृजित करने में सक्षम बनाती है। समग्र रूप से यह वित्तीय समावेशन, समावेशी विकास व आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मज़बूत करती है।
|
दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. भारत में वित्तीय समावेशन और महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के महत्त्व पर चर्चा कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) क्या है?
यह एक प्रमुख योजना (2015) है, जो गैर-कॉर्पोरेट, गैर-कृषि सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को बिना ज़मानत ऋण प्रदान करती है। - PMMY के अंतर्गत ऋण की श्रेणियाँ कौन-सी हैं?
शिशु (₹50,000 तक), किशोर (₹50,000-₹5 लाख), तरुण (₹5-10 लाख) और तरुण प्लस (₹10-20 लाख)। - मुद्रा लिमिटेड की क्या भूमिका है?
यह ऋण देने वाली संस्थाओं को पुनर्वित्त सहायता प्रदान करती है, लेकिन सीधे उधारकर्त्ताओं को ऋण नहीं देती। - PMMY का क्या महत्त्व है?
यह वित्तीय समावेशन, महिला उद्यमिता (67% लाभार्थी) और अनौपचारिक क्षेत्र के औपचारिकीकरण को बढ़ावा देती है। - PMMY की प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
छोटे ऋणों का प्रभुत्व, बढ़ते NPA, विनिर्माण क्षेत्र का कम हिस्सा और कमज़ोर क्रेडिट अवशोषण क्षमता।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. प्रधानमंत्री MUDRA योजना का लक्ष्य क्या है? (2016)
(a) लघु उद्यमियों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाना
(b) निर्धन कृषकों को विशेष फसलों की कृषि के लिये ऋण उपलब्ध कराना
(c) वृद्ध एवं निस्सहाय लोगों को पेंशन देना
(d) कौशल विकास एवं रोज़गार सृजन में लगे स्वयंसेवी संगठनों का निधीयन (फंडिंग) करना
उत्तर: (a)
