प्रिलिम्स फैक्ट्स (29 Aug, 2020)



प्रिलिम्स फैक्ट्स: 29 अगस्त, 2020

जारवा जनजाति

Jarawa Tribal

हाल ही में ग्रेट अंडमानी जनजाति के नौ लोगों के COVID-19 से संक्रमित पाए जाने के कारण अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के प्रशासन ने जारवा जनजाति (Jarawa Tribal) के लोगों के लिये  COVID-19 परीक्षण कराने का निर्णय लिया है।  

Jarawa-Tribal

प्रमुख बिंदु:

  • अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में 6 अधिसूचित अनुसूचित जनजातियाँ (Scheduled Tribes) हैं। 
  • पाँच PVTGs में से अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के प्रशासन ने चार जनजातियों (जारवा, ओंगे, ग्रेट अंडमानी एवं शोम्पेन) से संपर्क किया है किंतु सेंटीनली जनजाति अपने क्षेत्र में किसी बाहरी व्यक्ति के आगमन पर आक्रामक हो जाती है।   
    • नवंबर 2018 में संयुक्त राज्य अमेरिका के 27 वर्षीय जॉन एलेन चाउ (John Allen Chau) को सेंटीनली जनजाति के लोगों ने मार डाला जब उन्होंने उनसे संपर्क करने की कोशिश की।
  • वर्तमान में जारवा रिज़र्व (Jarawa Reserve) के पश्चिम तट में जारवा जनजाति समूह के लगभग 500 सदस्य निवास करते हैं।
    • COVID-19 के मद्देनज़र प्रशासन ने ग्रेट अंडमानी और जारवा जनजाति को क्रमशः जारवा रिज़र्व के स्ट्रेट आईलैंड (Strait Island) और वेस्ट कोस्ट (West Coast) में स्थानांतरित कर दिया ताकि उनको बाहरी लोगों के साथ किसी भी संपर्क से बचा जा सके।
  • जारवा जनजाति को COVID-19 के किसी भी संभावित प्रसार से बचने के लिये छोटे समूहों में रहने की सलाह दी गई है।

जारवा जनजाति:

  • दक्षिण अंडमान एवं मध्य अंडमान द्वीप समूह, जारवा जनजाति का निवास स्थान है।
  • वर्तमान में खानाबदोश जारवा जनजाति के लगभग 500 सदस्य 40-50 लोगों के समूहों में चड्ढा (Chaddha) में रहते हैं जिसको वे अपना घर कहते हैं।
  • व्यावसायिक गतिविधियाँ: सूअर, कछुआ, मछली, केकड़ा आदि का शिकार करना, फल, जंगली जड़ें, कंद और शहद  संग्रहित करना।
    • जारवा जनजाति को इन सबको संग्रहित करने के लिये अक्सर बाराटांग द्वीप (Baratang Island) पर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।       

बाराटांग द्वीप (Baratang Island):

Baratang-Island

  • बाराटांग द्वीप अंडमान द्वीप समूह का एक द्वीप है।
  • यह उत्तर एवं मध्य अंडमान प्रशासनिक ज़िले के अंतर्गत आता है जो अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के भारतीय संघ क्षेत्र का हिस्सा है।
  • इसे रांचीवालस द्वीप (Ranchiwalas Island) के नाम से भी जाना जाता है।
  • बाराटांग द्वीप, भारत में पंक ज्वालामुखियों (Mud Volcanoes) का एकमात्र ज्ञात उदाहरण है। इन पंक ज्वालामुखियों में छिटपुट तरीके से विस्फोट होता रहता है, वर्ष 2005 में हुए ज्वालामुखी विस्फोटों का विश्लेषण करने पर अनुमान लगाया गया कि ये विस्फोट वर्ष 2004 में हिंद महासागर में आए भूकंप से संबंधित थे।

Island

  • एक पंक ज्वालामुखी या पंक गुंबद, मिट्टी, पानी एवं गैसों के विस्फोट से निर्मित एक भू-आकृति है।
  • जारवा पुरुष एवं महिला दोनों पेड़ों से जंगली शहद संग्रहित करते हैं। शहद संग्रह के दौरान समूह के सदस्य अपनी खुशी व्यक्त करने के लिये गाना गाते हैं।
  • जारवा लोग शहद संग्रहण के दौरान मधुमक्खी भगाने वाले पौधे [जैसे- ऑयेकवलिन (Ooyekwalin)] की पत्तियों को चबाते हैं। 


एसोसिएशन ऑफ रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसीज़ ऑफ स्टेट्स

Association of Renewable Energy Agencies of States       

27 अगस्त, 2020 को केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री और एसोसिएशन ऑफ रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसीज़ ऑफ स्टेट्स (Association of Renewable Energy Agencies of States- AREAS) के पदेन संरक्षक आर. के. सिंह ने ऑनलाइन मंच के माध्यम से एआरईएएस (AREAS) के 6वें स्थापना दिवस के समारोह में शामिल हुए।

प्रमुख बिंदु:

  • इस समारोह के दौरान AREAS की वेबसाइट www.areas.org.in लॉन्च की और AREAS की टेलीफोन निर्देशिका भी जारी की गई। 
  • इस समारोह में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने 24 घंटे नवीकरणीय ऊर्जा के लिये नवीकरणीय खरीद दायित्त्व (Renewable Purchase Obligation- RPO) तंत्र का प्रस्ताव किया है जो देश में बिजली भंडारण को बढ़ावा देगा।
    • RPO के अनुसार सभी विद्युत वितरण लाइसेंसधारियों को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से अपनी आवश्यकताओं की न्यूनतम निर्दिष्ट मात्रा में खरीद या उत्पादन करना चाहिये।
    • यह भारतीय विद्युत अधिनियम, 2003 (Indian Electricity Act, 2003) के अनुसार है। राज्य विद्युत नियामक आयोग (State Electricity Regulatory Commissions) राज्य के लिये न्यूनतम RPO तय करते हैं।

एसोसिएशन ऑफ रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसीज़ ऑफ स्टेट्स (AREAS):

  • AREAS का गठन केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की पहल पर आपस में बातचीत करने और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने के लिये किया गया है।
  • इसका उद्देश्य प्रौद्योगिकियों एवं योजनाओं/कार्यक्रमों के बारे में अपनी सर्वोत्तम कार्य पद्धतियों एवं ज्ञान साझा करना भी है।
  • AREAS का पंजीकरण 27 अगस्त, 2014 को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम-1860 (Society Registration Act-1860) के तहत किया गया था। 
  • AREAS के संरक्षक केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री तथा इसके पदेन अध्यक्ष केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव होते हैं। 
  • सभी राज्य नोडल एजेंसियाँ इस एसोसिएशन की सदस्य हैं।


कोरल ऑस्टियोपोरोसिस

Coral Osteoporosis

हाल ही में किये गए एक अध्ययन में पता चला कि जलवायु परिवर्तन के मद्देनज़र महासागरों के अम्लीय होने के कारण कोरल 'ऑस्टियोपोरोसिस' (Osteoporosis) विकसित होता है। 

प्रमुख बिंदु:

  • 27 अगस्त, 2020 को जर्नल ‘जियोफिज़िकल रिसर्च लेटर्स’ (Geophysical Research Letters) में प्रकाशित एक पेपर में शोधकर्त्ताओं ने ग्रेट बैरियर रीफ (Great Barrier Reef) के साथ-साथ दक्षिण चीन सागर में दो प्रवाल भित्तियों पर कोरल कंकाल घनत्व में उल्लेखनीय कमी देखी है। यह कमी वर्ष 1950 के बाद से इन प्रवाल भित्तियों के आसपास जल में बढ़ती अम्लीयता से संबंधित है।
  • अध्ययन में बताया गया कि 20वीं सदी के समुद्री अम्लीकरण का ग्रेट बैरियर रीफ और दक्षिण चीन सागर में की-स्टोन रीफ-बिल्डिंग कोरल प्रजातियों के विकास पर औसत दर्जे का प्रभाव था। किंतु अगले कई दशकों में समुद्री अम्लीकरण के बढ़ने से इन प्रभावों में तेज़ी आएगी।
  • सामान्य तौर पर वैश्विक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन का एक तिहाई हिस्सा समुद्र द्वारा अवशोषित होता है जिससे पूर्व-औद्योगिक युग के बाद से समुद्री जल के पीएच (pH) में औसत 0.1 यूनिट की गिरावट हुई है। समुद्री अम्लीकरण के रूप में जानी जाने वाली इस घटना से समुद्री जल में कार्बोनेट आयनों की सांद्रता में 20% की कमी आई है। 
    • परिणामतः कोरल जैसे जीव जो अपना कंकाल बनाने के लिये कैल्शियम कार्बोनेट पर निर्भर रहते हैं, वे जोखिम की स्थिति से गुजर रहे हैं क्योंकि महासागरीय पीएच (pH) में लगातार गिरावट जारी है।
  • महासागरीय अम्लीकरण, कोरल द्वारा निर्मित कंकाल घनत्व को लक्षित करता है और धीरे-धीरे प्रवाल की क्षमता को कमज़ोर करता है जैसे ऑस्टियोपोरोसिस मनुष्यों में हड्डियों को कमज़ोर करता है।
  • शोधकर्त्ताओं ने पाया कि वर्ष 1950 के आसपास शुरू हुआ महासागरीय अम्लीकरण ग्रेट बैरियर रीफ (13%) और दक्षिण चीन सागर (7%) में कंकाल घनत्व में महत्त्वपूर्ण गिरावट का कारण है। इसके विपरीत उन्होंने फीनिक्स द्वीप (Phoenix Islands) और मध्य प्रशांत में एक ही प्रकार के कोरल पर समुद्री अम्लीकरण का कोई प्रभाव नहीं मिला जहाँ संरक्षित रीफ प्रदूषण, अत्यधिक मत्स्यन आदि से प्रभावित नहीं होती हैं।

फीनिक्स द्वीप (Phoenix Islands):

Kiribati

  • फीनिक्स द्वीप समूह आठ एटाॅल (Atolls) और दो जलमग्न प्रवाल भित्तियों का एक समूह है जो मध्य प्रशांत महासागर में गिल्बर्ट द्वीप (Gilbert Islands) समूह के पूर्व में और लाइन द्वीप (Line Islands) के पश्चिम में अवस्थित है।
  • वर्ष 2008 में स्थापित ‘फीनिक्स द्वीप संरक्षित क्षेत्र’ (Phoenix Islands Protected Area) दुनिया के सबसे बड़े संरक्षित क्षेत्रों में से एक है और लगभग 120 प्रवाल प्रजातियों एवं 500 से अधिक मछली प्रजातियों का निवास स्थान है।
  • ये द्वीप समूह किरिबाती गणराज्य (Republic of Kiribati) का हिस्सा हैं।
  • हालाँकि वैश्विक स्तर पर कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन महासागरीय अम्लीकरण का सबसे बड़ा कारक है किंतु सीवेज एवं 
  • अन्य अपवाह तंत्र भी महासागरीय अम्लीकरण के प्रभाव को तेज़ कर सकते हैं जिससे आस-पास की भित्तियों पर समुद्री जल pH में और भी कमी आ सकती है।
  • शोधकर्त्ताओं ने महासागरीय अम्लीकरण एवं अपवाह के संयुक्त प्रभावों को ग्रेट बैरियर रीफ और दक्षिणी चीन सागर में कोरल के घटते कंकाल घनत्व के लिये ज़िम्मेदार माना है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका के ‘वुड्स होल ओशनोग्राफिक इंस्टीट्यूशन’ (Woods Hole Oceanographic Institution) में शोधकर्त्ताओं द्वारा विकसित एक अभिनव संख्यात्मक मॉडल प्रवाल विकास पर महासागरीय अम्लीकरण (समुद्री तापन से अलग) के अलग-अलग प्रभावों को दर्शाता है।


एंड्रोमेडा आकाशगंगा

Andromeda Galaxy

हाल ही में किये गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने नासा (NASA) के ‘हबल स्पेस टेलीस्कोप’ (Hubble Space Telescope) का उपयोग करके एंड्रोमेडा आकाशगंगा (Andromeda Galaxy) के आसपास एक गैसीय आवरण जिसे प्रभामंडल (Halo) कहा जाता है, का मानचित्रण किया है।

Alpharatz

प्रमुख बिंदु:

  • वैज्ञानिकों को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि विस्तृत प्लाज़्मा का लगभग अदृश्य प्रभामंडल एंड्रोमेडा आकाशगंगा से 1.3 मिलियन प्रकाश वर्ष (हमारी आकाशगंगा के लगभग आधे तक) दूर तक फैला हुआ है और कुछ दिशाओं में यह 2 मिलियन प्रकाश-वर्ष दूर तक भी फैला हुआ है। 
    • इसका मतलब है कि एंड्रोमेडा का प्रभामंडल पहले से ही हमारी अपनी आकाशगंगा के प्रभामंडल में टकरा रहा है।
    • वैज्ञानिकों ने यह भी देखा कि प्रभामंडल में एक स्तरित संरचना (Layered Structure) है जिसमें गैस के दो मुख्य नेस्टेड (Nested) और अलग-अलग चक्राकार छल्ले हैं। 
    • यह एक आकाशगंगा के आसपास के प्रभामंडल का सबसे व्यापक अध्ययन है।

महत्त्व:

  • गैस के इस भंडार (प्रभामंडल) में आकाशगंगा के भीतर भविष्य में तारों के गठन के लिये ऊष्मा होती है साथ ही सुपरनोवा जैसी घटनाएँ भी घटित होती है। इस प्रभामंडल के द्वारा आकाशगंगा के अतीत एवं भविष्य के विकास के बारे में जानकारी जुटाई जा सकती है।

एंड्रोमेडा आकाशगंगा (Andromeda Galaxy):

  • एंड्रोमेडा आकाशगंगा जिसे M31 के रूप में भी जाना जाता है, लगभग 1 ट्रिलियन तारों का एक प्रभावशाली सर्पिल है और हमारी आकाशगंगा के आकार में तुलनीय है।
  • 2.5 मिलियन प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित यह आकाशगंगा पृथ्वी से इतनी करीब है कि शरद ऋतु के दौरान यह आकाश में एक सिगार के धुएँ के आकार के रूप में दिखाई देती है।

प्रोजेक्ट एमिगा (AMIGA):

  • प्रोजेक्ट एमिगा (Absorption Map of Ionized Gas in Andromeda-एंड्रोमेडा में आयनित गैस का समावेशी मानचित्र) नामक एक कार्यक्रम के तहत एंड्रोमेडा से दूर स्थित 43 क्वासरों (Quasars) से आने वाले प्रकाश का अध्ययन किया गया।
    • क्वासर (Quasars): ये ब्लैक होल द्वारा संचालित सक्रिय आकाशगंगाओं के चमकदार कोर होते हैं।

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 29 अगस्त, 2020

खेल पुरस्कारों की राशि में वृद्धि

राष्‍ट्रीय खेल और साहसिक कार्य पुरस्‍कार की 7 श्रेणियों में से 4 श्रेणियों में पुरस्‍कार की राशि बढ़ा दी गई है। खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने आज राष्‍ट्रीय खेल दिवस पर घोषणा की कि राजीव गांधी खेल रत्‍न पुरस्‍कार की राशि साढ़े सात लाख रूपए से बढ़ाकर 25 लाख रूपए कर दी गई है। अर्जुन पुरस्‍कार और द्रोणाचार्य आजीवन पुरस्‍कार की राशि 5-5 लाख रूपए से बढ़ाकर 15-15 लाख रूपए कर दी गई है। द्रोणाचार्य नियमित और ध्‍यानचंद पुरस्‍कार की राशि भी पांच-पांच लाख रूपए से बढ़ाकर दस-दस लाख रूपए कर दी गई है। राजीव गांधी खेल रत्न जिसे आधिकारिक तौर पर ‘स्पोर्ट्स एंड गेम्स में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार’ के रूप में जाना जाता है, भारत गणराज्य का सर्वोच्च खेल सम्मान है। इस पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1991–92 में हुई थी। यह पुरस्कार युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय (Ministry of Youth Affairs and Sports) द्वारा प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।

रानी लक्ष्‍मीबाई केंद्रीय कृषि विश्‍वविदयालय

प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के माध्यम से 29 अगस्त को रानी लक्ष्‍मीबाई केंद्रीय कृषि विश्‍वविद्यालय के महाविद्यालय और प्रशासनिक भवन का उद्घाटन किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि कृषि क्षेत्र में आत्‍मनिर्भरता का उद्देश्‍य देश में कृषि उत्‍पादों का मूल्‍य संवर्धन करना, देश तथा विश्व में इनका विपणन करना और किसानों को उद्यमी बनाना है। प्रधानमंत्री के अनुसार, जब किसान और कृषि, उद्योग का रूप लेकर आगे बढ़ेंगे तो निश्चित रूप से गाँवों में रोज़गार और स्‍व-रोज़गार के अवसर पैदा होंगे। रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय देश का पहला कृषि विश्वविद्यालय है, जिसे भारत सरकार द्वारा संसद के अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में वर्ष 2014 में स्थापित किया गया है। । विश्वविद्यालय का मुख्यालय उत्तर प्रदेश राज्य के झांसी में स्थित है। विश्वविद्यालय को कृषि, अनुसंधान और शिक्षा विभाग, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा सीधे वित्त पोषित किया जाता है।

भारत-सिंगापुर रक्षा नीति वार्ता

भारत और सिंगापुर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 14वीं रक्षा नीति वार्ता आयोजित की है। सम्मेलन की अध्यक्षता रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार और उनके सिंगापुर में समकक्ष चैन हेंग के द्वारा की गई। दोनों देशों के बीच सुरक्षा साझेदारी को बढ़ाने की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करते हुए दोनों अधिकारियों ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रक्षा जुड़ाव के मुद्दों पर चर्चा की। बैठक के अंत में दोनों देशों ने मानवीय सहायता और आपदा राहत (Humanitarian Assistance & Disaster Relief-HADR) पर पारस्परिक कार्यान्वयन हेतु समझौते पर हस्ताक्षर किये। इस वार्ता का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आपसी रक्षा सहयोग के साथ रणनीतिक मुद्दों और भू राजनीतिक घटनाक्रम पर चर्चा करने के लिये एक नियमित मंच प्रदान करना है। इस बैठक में आतंकवाद का मुकाबला करने और एक-दूसरे की नौसेना को सुविधा और रसद सहायता प्रदान करने पर भी चर्चा हुई है।

स्टार्टअप चैलेंज प्रतियोगिता ‘चुनौती’

देश में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिये इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ((Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) ने एक नया कदम उठाया है। मंत्रालय ने 'चुनौती' नामक नई पीढ़ी की एक स्टार्टअप प्रतियोगिता लॉन्च की है। इसका उद्देश्य देश के टियर-2 शहरों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए स्टार्टअप और सॉफ्टवेयर उत्पादों को बढ़ावा देना है। मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार, इस कार्यक्रम के लिये सरकार ने तीन वर्ष में 95.03 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य चिन्हित क्षेत्रों में काम कर रहे लगभग 300 स्टार्टअप की पहचान करना, उन्हें 25 लाख रुपये तक की शुरुआती राशि और अन्य सुविधाएँ उपलब्ध कराना है।