एडिटोरियल (14 Feb, 2023)



AI एवं लैंगिक समानता

यह एडिटोरियल 10/02/2023 को ‘द हिंदू’ में प्रकाशित “Is AI industry gender-blind?” लेख पर आधारित है। इसमें AI में व्याप्त लैंगिक पूर्वाग्रहों और लैंगिक समता को बढ़ावा देने के लिये आवश्यक कदमों के बारे में चर्चा की गई है।

संदर्भ

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence- AI) जीवन के हर क्षेत्र में प्रवेश कर रही है और हमारी संबद्धता, कार्यकरण एवं सोचने के तरीके को मौलिक रूप से बदल रही है। अनुमानकारी, व्यक्तिगत एवं अनुकूलित समाधानों, लोगों के स्वास्थ्य में सुधार, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने, आपदाओं के विरुद्ध प्रत्यास्थता की वृद्धि आदि के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाजों को रूपांतरित करने और लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में योगदान कर सकती है।

लेकिन इसके साथ ही AI आक्रामक अनुप्रयोगों के साथ निजता को खतरे में डाल सकता है, मानवाधिकारों को बाधित कर सकता है और असमानता को बढ़ावा दे सकता है। हालाँकि, समाजों पर AI का प्रभाव काफी हद तक प्रौद्योगिकी के पीछे की मंशा और सोच पर निर्भर करता है।

  • इसलिये, AI को समग्र और सभी के लिये लाभकारी बनाने के लिये इसमें विविध लोगों, विशेष रूप से महिलाओं की समान भागीदारी होना अनिवार्य है। 8वाँ ‘विज्ञान में महिलाओं एवं बालिकाओं का अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ (11 फरवरी) AI उद्योग में लैंगिक प्रवृत्तियों और महिलाओं की भागीदारी को प्रतिबिंबित करने का एक अवसर प्रदान करता है।
  • G20 की अध्यक्षता और ‘नारी शक्ति’ पर विशेष ध्यान के साथ, भारत के लिये अनुकूल अवसर मौजूद है कि वह AI में लैंगिक समता को बढ़ावा देने के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रेरित करे और वैश्विक नीति को आकार दे।

AI उद्योग में महिलाओं की स्थिति

  • विश्व आर्थिक मंच (WEF) के वैश्विक लैंगिक अंतराल रिपोर्ट, 2022 के अनुसार AI कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी मात्र 22% है।
    • यह न केवल AI के भविष्य को आकार देने वाले दृष्टिकोणों एवं अनुभवों की विविधता को सीमित करता है, बल्कि लैंगिक वेतन अंतराल को भी बनाए रखता है और करियर विकास को सीमित करता है।
  • भारत में उत्पादित विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) स्नातकों में 43% महिलाएँ हैं, जो अधिकांश उन्नत अर्थव्यवस्थाओं से कहीं अधिक उच्च स्तर को प्रदर्शित करता है।
    • हालाँकि, कार्यकरण के मोर्चे पर अभी बहुत कुछ किये जाने की आवश्यकता है क्योंकि भारत में केवल 14% STEM नौकरियाँ महिलाओं के हिस्से आती हैं।
    • इसके अतिरिक्त, STEM में 81% महिलाएँ अपने करियर में कार्य प्रदर्शन मूल्यांकन के दौरान लैंगिक पूर्वाग्रह का सामना करती हैं।
  • Google और Facebook जैसी दिग्गज टेक कंपनियों में भी AI विशेषज्ञों के रूप में महिलाओं की हिस्सेदारी महज 10-15% है। असमानता की यही स्थिति अनुसंधान के क्षेत्र में भी मौजूद है।
    • Nesta द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि केवल 13.83% AI शोध प्रकाशन महिलाओं द्वारा लिखे गए थे।
      • विभिन्न अध्ययनों से पता चलता है कि पक्षपातपूर्ण AI प्रणाली कार्यबल में मौजूदा अंतराल को और बढ़ा सकती है और कम प्रतिनिधित्व रखने वाले समुदायों को नुकसान भी पहुँचा सकती है।

AI में महिला प्रतिनिधित्व के साथ संलग्न प्रमुख चुनौतियाँ

  • टेक उद्योग में विविधता का अभाव:
    • टेक उद्योग में लंबे समय से लैंगिक संतुलन एवं विविधता की कमी का परिदृश्य रहा है और AI क्षेत्र भी इस मामले में अपवाद नहीं है।
    • तकनीकी भूमिकाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम है, विशेष रूप से नेतृत्व के पदों पर, जिसके परिणामस्वरूप सजातीय दृष्टिकोण और निर्णय लेने में विविधता की कमी की स्थिति बनती है।
  • AI प्रणाली में पूर्वाग्रह:
    • AI प्रणाली, जो विविध आबादी के अनुभवों एवं आवश्यकताओं पर विचार किये बिना डिज़ाइन किये गए हैं, भेदभाव और असमानता को निरंतर बनाए रख सकते हैं।
    • उदाहरण:
      • AI चैटबॉट जो ग्राहकों से आदेश ग्रहण करते हैं, पहले से ही अपने लिंग-विशिष्ट नाम और आवाज़ के साथ अनुचित लैंगिक रूढ़िवादिता को सुदृढ़ कर रहे हैं।
      • फेसियल रिकग्निशन एल्गोरिदम ने महिलाओं और अश्वेत लोगों की पहचान के मामले में उच्च त्रुटि दर दिखाई है, जो पक्षपातपूर्ण प्रशिक्षण डेटा का ही प्रत्यक्ष परिणाम है।
      • जेंडर-ब्लाइंड AI डिज़ाइन महिलाओं के अनुचित क्रेडिट स्कोरिंग को बढ़ावा दे रहे हैं। पूर्वाग्रहपूर्ण AI-रिक्रूटमेंट टूल्स ने महिलाओं से प्राप्त नौकरी के आवेदनों को स्वचालित रूप से फ़िल्टर करने जैसे परिणाम दर्शाए हैं।
  • कार्यस्थल में रूढ़िवादिता और लैंगिक पूर्वाग्रह:
    • AI क्षेत्र में महिलाओं को कार्यस्थल पर लैंगिक पूर्वाग्रह और रूढ़िवादिता का सामना करना पड़ सकता है, जो उनके करियर की प्रगति को प्रभावित कर सकता है और प्रगति के उनके अवसरों को सीमित कर सकता है।
    • यह AI में नेतृत्व के पदों पर महिलाओं की कमी में भी योगदान दे सकता है।
  • कार्य-जीवन संतुलन संबंधी चुनौतियाँ:
    • महिलाओं को कार्य-जीवन संतुलन प्राप्त करने में अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, विशेष रूप से AI जैसे मांगपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में, जो फिर उनके करियर की प्रगति और उद्योग में उनी भागीदारी को प्रभावित कर सकता है।

संबंधित पहल

  • किरण योजना:
    • वर्ष 2014-15 में शुरू की गई किरण (KIRAN) योजना अकादमिक और प्रशासनिक भूमिकाओं में महिला वैज्ञानिकों के आगे बढ़ने के लिये अवसर प्रदान करती है।
  • AI के लिये भारत की राष्ट्रीय रणनीति:
    • यह समावेशिता पर केंद्रित है और #AIFORALL के विचार को बढ़ावा देती है।
    • इस कार्यक्रम के तहत, तेलंगाना राज्य AI और डेटा साइंस में 1,00,000 छात्राओं (कमज़ोर पृष्ठभूमि की बालिकाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए) को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखता है और इस क्रम में 5,000 से अधिक बालिकाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
    • इसके अलावा, तेलंगाना में ग्रामीण महिलाओं को भी राज्य के तीन ग्रामीण डेटा एनोटेशन केंद्रों में प्रशिक्षित और नियोजित किया जा रहा है।
    • सरकार ने We-Hub (हैदराबाद में महिला उद्यमियों के लिये एक इनक्यूबेटर) को भी बढ़ावा दिया है, जिसने डेटा साइंस और AI में 13-17 वर्ष की 700 से अधिक बालिकाओं को प्रशिक्षित किया है।

महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिये क्या किया जा सकता है?

  • निजी क्षेत्र की भूमिका:
    • AI में लैंगिक असमानता को दूर करने के लिये महिलाओं एवं बालिकाओं हेतु अवसर पैदा करने के उद्देश्य से मानसिकता को बदलना तथा प्रयासों एवं निवेश में तेज़ी लाना महत्त्वपूर्ण है।
    • AI में महिलाओं के लिये नेतृत्व के पदों को बढ़ावा देना, पैनल चर्चाओं में महिलाओं की समान भागीदारी, लैंगिक वेतन अंतराल को समाप्त करना, मेंटरशिप एवं नेटवर्किंग के अवसर प्रदान करना, AI भूमिकाओं में विविध पृष्ठभूमि की युवा महिलाओं की भर्ती को प्राथमिकता देना, AI में महिलाओं के नेतृत्व के साथ उद्यमिता एवं अनुसंधान में निवेश, बालिकाओं एवं महिलाओं के बीच AI दक्षताओं को बढ़ावा देना और AI क्रांति में भाग लेने के लिये बहु-विषयक पृष्ठभूमि की महिलाओं को सुविधा प्रदान करना आदि वे कदम हैं जिस दिशा में निजी क्षेत्र को त्वरित गति से कार्य करना चाहिये।
  • कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना:
    • AI में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों (जैसे AI क्षेत्र में महिलाओं के लिये डिज़ाइन किये गए कौशल विकास कार्यक्रम, छात्रवृत्ति, अनुसंधान अनुदान और इंटर्नशिप) में निवेश एवं क्रियान्वयन के माध्यम से सरकार और शैक्षणिक संस्थान एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
    • इसके अतिरिक्त, मीडिया जागरूकता का प्रसार करने और AI में महिलाओं के सकारात्मक प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रेरित करना:
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में लैंगिक विविधता और प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने के लिये अंतर्राष्ट्रीय सहयोग महत्त्वपूर्ण है।
    • ऐसे कुछ उपाय जिनसे इस तरह के सहयोग को सुगम बनाया जा सकता है:
      • AI में लैंगिक विविधता के महत्त्व के बारे में जागरूकता पैदा करना
      • AI के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों, अनुसंधान संस्थानों और विश्वविद्यालयों के बीच अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करना
      • शैक्षिक सामग्री, डेटा सेट और शोध निष्कर्षों जैसे संसाधनों को साझा करना
      • AI के क्षेत्र में कार्यरत व्यक्तियों और संगठनों के नेटवर्क बनाना
      • AI में करियर बना रही महिलाओं को सहायता प्रदान करना
  • गैर-तकनीकी भूमिकाओं में महिलाओं की स्थिति को सुविधाजनक बनाना:
    • AI उद्योग में परियोजना प्रबंधन, व्यवसाय विकास, विपणन, आचार, शासन और बिक्री जैसे क्षेत्रों में महिलाओं के लिये गैर-तकनीकी भूमिकाओं को भी सुविधाजनक बनाया जा सकता है।
    • इन भूमिकाओं के लिये प्रायः उन्नत संचार एवं संगठनात्मक कौशल के साथ ही जटिल तकनीकी अवधारणाओं को समझने और गैर-तकनीकी हितधारकों को इसे समझा सकने की क्षमता की आवश्यकता होती है।
    • किसी भी कार्यक्षेत्र में महिलाएँ विविध दृष्टिकोण एवं अनुभव सामने लेकर आती हैं और इस दृष्टिकोण से वे इन गैर-तकनीकी भूमिकाओं में भी AI क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान दे सकती हैं।

अभ्यास प्रश्न: AI उद्योग प्रतिनिधित्त्व, अवसरों एवं नैतिक विचारों के संदर्भ में लैंगिक समानता को कैसे संबोधित और संवर्द्धित कर रहा है?

  यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)  

मुख्य परीक्षा

प्र. "चौथी औद्योगिक क्रांति (डिजिटल क्रांति) के उद्भव ने सरकार के अभिन्न अंग के रूप में ई-गवर्नेंस की शुरुआत की है"। चर्चा कीजिये।  (वर्ष 2020)