टू द पॉइंट

संसद (भाग-2) | 24 Nov 2021 | भारतीय राजनीति

संसद (भाग-l)

संसद में नेता (Leaders in Parliament)

संसद के सत्र (Sessions of Parliament)

संसदीय कार्यवाही की युक्ति

(Devices of Parliamentary Proceedings)

भारतीय संसद में प्रस्ताव (Motions in Indian Parliament)

विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव 
(Breach of Privilege Motion)

  • यह किसी सदस्य द्वारा उस समय प्रस्तुत किया जाता है, जब उसे लगता है कि किसी मंत्री ने किसी मामले के तथ्यों को रोककर या गलत या विकृत तथ्य देकर सदन या उसके एक या अधिक सदस्यों के विशेषाधिकार का उल्लंघन किया है। इसका उद्देश्य संबंधित मंत्री की निंदा करना होता है।
  • इसे राज्यसभा के साथ-साथ लोकसभा में भी प्रस्तुत किया जा सकता है।

निन्दा प्रस्ताव (Censure Motion)

  • इसे लोकसभा में अपनाने के कारणों का उल्लेख होना चाहिये।
  • इसे किसी व्यक्तिगत मंत्री या मंत्रियों के समूह या संपूर्ण मंत्रिपरिषद के खिलाफ प्रस्तुत किया जा सकता है।
  • यह विशिष्ट नीतियों और कार्यों के लिये मंत्रिपरिषद की निंदा करने के लिये प्रस्तुत किया जाता है।
  • इसे केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।

ध्यानाकर्षण प्रस्ताव (Calling-Attention Motion)

  • यह संसद में किसी सदस्य द्वारा तत्काल सार्वजनिक महत्त्व के मामले में मंत्री का ध्यान आकर्षित करने और उस मामले पर उससे एक आधिकारिक बयान मांगने के लिये प्रस्तुत किया जाता है।
  • इसे राज्यसभा के साथ-साथ लोकसभा में भी प्रस्तुत किया जा सकता है।

स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion)

  • इसे लोकसभा में तत्काल सार्वजनिक महत्त्व के एक निश्चित मामले पर सदन का ध्यान आकर्षित करने के लिये प्रस्तुत किया जाता है।
  • इसमें सरकार के खिलाफ निंदा का एक तत्त्व शामिल होता है।
  • इसे केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।

अनियत-दिन-वाले प्रस्ताव (No-Day-Yet-Named Motion)

  • यह एक ऐसा प्रस्ताव है जिसे अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया है लेकिन इस पर चर्चा के लिये कोई तारीख तय नहीं की गई है।
  • इसे राज्यसभा के साथ-साथ लोकसभा में भी प्रस्तुत किया जा सकता है।

अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion)

  • संविधान का अनुच्छेद 75 कहता है कि मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होगी।
  • दूसरे शब्दों में, लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव पारित करके मंत्री को पद से हटा सकती है।
  • प्रस्ताव को स्वीकृत करने के लिये 50 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है।
  • इसे केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।

धन्यवाद प्रस्ताव (Motion of Thanks)

  • प्रत्येक आम चुनाव के बाद पहले सत्र और प्रत्येक वित्तीय वर्ष के पहले सत्र को राष्ट्रपति द्वारा संबोधित किया जाता है।
  • राष्ट्रपति के इस अभिभाषण पर संसद के दोनों सदनों में 'धन्यवाद प्रस्ताव' नामक प्रस्ताव पर चर्चा होती है।
  • यह प्रस्ताव सदन में पारित होना चाहिये। नहीं तो सरकार गिर जाती है।

कटौती प्रस्ताव (Cut Motions)

  • कटौती प्रस्ताव लोकसभा के सदस्यों को दी गई एक विशेष शक्ति है। किसी अनुदान की राशि को कम करने अथवा एक निश्चित सीमा तक घटाने का प्रस्ताव कटौती प्रस्ताव कहलाता है। इसमें अनुदान माँग के हिस्से के रूप में सरकार द्वारा वित्त विधेयक में विशिष्ट आवंटन के लिये चर्चा की जा रही मांग का विरोध किया जाता है।
  • यदि प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है, तो यह एक अविश्वास मत के बराबर होता है और यदि सरकार निचले सदन में संख्या बढ़ाने में विफल रहती है, तो वह सदन के मानदंडों के अनुसार इस्तीफा देने के लिये बाध्य होती है।
  • निम्नलिखित में से किसी भी तरीके से मांग की राशि को कम करने के लिये एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा सकता है:
  • नीति निरनुमोदन कटौती प्रस्ताव: यह इस तरह से प्रस्तुत किया जाता है कि मांग की राशि को घटाकर 1 रुपये कर दिया जाए (यह मांग में निहित नीति की अस्वीकृति का प्रतिनिधित्व करता है)।
  • मितव्ययिता कटौती प्रस्ताव: इसे इस तरह से प्रस्तुत किया जाता है कि मांग की राशि में उल्लिखित राशि की कमी की जाए।
  • सांकेतिक कटौती प्रस्ताव: इसे इसलिये प्रस्तुत किया जाता है ताकि मांग की राशि में 100 रुपये की कटौती की जा सके ( यह एक विशिष्ट शिकायत व्यक्त करता है)।
  • इसे केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।

समापन प्रस्ताव (Closure Motion)

  • यह सदन के समक्ष किसी मामले पर बहस को कम करने के लिये किसी सदस्य द्वारा प्रस्तुत किया गया एक प्रस्ताव होता है।
  • यदि प्रस्ताव को सदन द्वारा अनुमोदित किया जाता है, तो बहस तुरंत रोक दी जाती है और मामले पर मतदान किया जाता है।
  • समापन प्रस्ताव चार प्रकार के होते हैं:
  • साधारण समापन: जब कोई सदस्य प्रस्ताव करता है कि 'इस मामले पर पर्याप्त चर्चा हो चुकी है तो अब मतदान किया जाए'।
  • खंडश: समापन: इस मामले में, किसी विधेयक के खंड या एक लंबे संकल्प को बहस शुरू होने से पहले भागों में बांटा जाता है। बहस पूरे हिस्से को कवर करती है और पूरे हिस्से को वोट देने के लिये रखा जाता है।
  • कंगारू समापन: इस प्रकार के तहत, केवल महत्वपूर्ण खंड बहस और मतदान के लिये जाते हैं और बीच में आने वाले खंडों को छोड़ दिया जाता है और पारित  मान लिया जाता है।
  • गिलोटिन समापन: यह तब होता है जब समय की कमी के कारण किसी विधेयक या संकल्प के बिना चर्चा किये गए खंडों को भी चर्चा किये गए खंडों के साथ मतदान के लिये रखा जाता है।

व्यवस्था का प्रश्न (Point of Order)

  • जब सदन की कार्यवाही प्रक्रिया संबंधी सामान्य नियमों का पालन नहीं करती है तो कोई सदस्य व्यवस्था का प्रश्न उठा सकता है।
  • व्यवस्था का प्रश्न सदन के नियमों या संविधान के ऐसे अनुच्छेदों की व्याख्या या प्रवर्तन से संबंधित होना चाहिये जो सदन के कामकाज को नियंत्रित करते हैं और ऐसा प्रश्न उठाया जाना चाहिये जो अध्यक्ष के संज्ञान में हो।
  • यह आमतौर पर सरकार पर लगाम लगाने के लिये विपक्षी सदस्य द्वारा उठाया जाता है।
  • यह एक असाधारण युक्ति है क्योंकि यह सदन के समक्ष कार्यवाही को स्थगित कर देती है। व्यवस्था के प्रश्न पर किसी बहस की अनुमति नहीं है।

विशेष उल्लेख (Special Mention)

  • ऐसा मामला जो राज्यसभा में प्रश्नकाल, आधे घंटे की चर्चा, अल्पावधि चर्चा या स्थगन प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव या सदन के किसी नियम के तहत नहीं उठाया जा सकता है, विशेष उल्लेख के तहत उठाया जा सकता है। 
  • लोकसभा में इसके समकक्ष प्रक्रियात्मक उपकरण को 'नियम 377 के तहत नोटिस (उल्लेख)' के रूप में जाना जाता है।