टू द पॉइंट

भारतीय सभ्यता, संस्कृति का वर्तमान स्वरूप और इसका महत्त्व | 26 Jun 2020 | भारतीय विरासत और संस्कृति

भूमिका:

भारतीय संस्कृति व सभ्यता विश्व की सर्वाधिक प्राचीन एवं समृद्ध संस्कृति व सभ्यता है। इसे विश्व की सभी संस्कृतियों की जननी माना जाता है। जीने की कला हो, विज्ञान हो या राजनीति का क्षेत्र भारतीय संस्कृति का सदैव विशेष स्थान रहा है। अन्य देशों की संस्कृतियाँ तो समय की धारा के साथ-साथ नष्ट होती रही हैं किंतु भारत की संस्कृति व सभ्यता आदिकाल से ही अपने परंपरागत अस्तित्व के साथ अजर-अमर बनी हुई है।

संस्कृति शब्द का अर्थ:

भारतीय संस्कृति का प्राचीन स्वरूप:

वसुधैव कुटुंबकम:

आश्रम व्यवस्था:

मानव संस्कृति:

भारतीय संस्कृति का वर्तमान स्वरूप और महत्त्व:

 निष्कर्ष:

अतः यह स्पष्ट रूप से उल्लेखनीय है कि भारत में कभी भी एक ही संस्कृति पूर्ण रूप से व्याप्त नहीं रही और न ही शायद किसी भी बड़े प्रदेश में कभी एक ही संस्कृति रही है। इस देश में आध्यात्मिक संस्कृति की प्रमुखता रही है। अतः संस्कृति में बदलाव निरंतर रहेगा।