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जलवायु परिवर्तन एवं भूमि रिपोर्ट | 05 Nov 2019 | जैव विविधता और पर्यावरण

यह रिपोर्ट भू-आधारित पारिस्थितिकी प्रणालियों में ग्रीनहाउस गैस (GHG) प्रवाह, भूमि उपयोग (Land Use) और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन एवं शमन (Ldaptation and Mitigation), मरुस्थलीकरण (Desertification), भूमि निम्नीकरण (Land Degradation) तथा खाद्य सुरक्षा के संबंध में सतत भूमि प्रबंधन (Sustainable Land Management) को संबोधित करती है।

A. गर्म होते विश्व में लोग, भूमि और जलवायु

भूमि मानव आजीविका और कल्याण को प्राथमिक आधार प्रदान करती है जिसमें खाद्य आपूर्ति, स्वच्छ जल और कई अन्य पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं की आपूर्ति के साथ ही जैव विविधता प्रमुख रूप से शामिल हैं। मानव द्वारा भूमि का उपयोग वैश्विक हिम-रहित भूमि सतह के 70 प्रतिशत से अधिक (लगभग 69-76 प्रतिशत) हिस्से को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। भूमि जलवायु प्रणाली में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पूर्व-औद्योगिक अवधि के बाद से भूमि सतह का वायु तापमान (Land Surface Air Temperature) वैश्विक औसत तापमान से लगभग दोगुना बढ़ गया है। मौसमी चरम घटनाओं की आवृत्ति व तीव्रता में वृद्धि के साथ जलवायु परिवर्तन ने खाद्य सुरक्षा और स्थलीय पारिस्थितिकी प्रणालियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है तथा साथ ही कई क्षेत्रों में मरुस्थलीकरण एवं भूमि निम्नीकरण में योगदान किया है।

इस रिपोर्ट में वानस्पतिक हरियाली (Vegetation Greening) को प्रकाश संश्लेषण करने वाले सक्रिय पादपों के बायोमास में वृद्धि के रूप में परिभाषित किया गया है जिसे उपग्रही पर्यवेक्षणों में देखा गया है।

इस रिपोर्ट में कार्बन डाइऑक्साइड निषेचन (CO2 Fertilization) को वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड सांद्रता की वृद्धि के परिणामस्वरूप पौधे की वृद्धि के रूप में परिभाषित किया गया है। कार्बन डाई ऑक्साइड निषेचन की मात्रा पोषक तत्त्वों और जल की उपलब्धता पर निर्भर करती है।

इस रिपोर्ट में उपग्रही पर्यवेक्षणों से अनुमानित वानस्पतिक भूरेपन (Vegetation Browning) को प्रकाश संश्लेषण करने वाले सक्रिय पादपों के बायोमास में कमी के रूप में परिभाषित किया गया है।

वर्ष 2007-2016 की अवधि में कृषि, वानिकी और अन्य भूमि उपयोग संबंधित (Agriculture, Forestry and Other Land Use- AFOLU) क्रियाकलापों के चलते वैश्विक स्तर पर मानव गतिविधियों से लगभग 13 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), 44 प्रतिशत मीथेन (CH4) और 82 प्रतिशत नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) उत्सर्जन हुआ। यह ग्रीन हाउस गैसों (GHGs) के कुल शुद्ध मानवजनित उत्सर्जन के 23 प्रतिशत का प्रतिनिधित्त्व करता है (केवल कार्बन डाई ऑक्साइड, CH4 और N2O के माप के आधार पर)। यदि वैश्विक खाद्य प्रणाली [ इस रिपोर्ट में वैश्विक खाद्य प्रणाली (Global Food System) को उन सभी तत्वों (पर्यावरण, लोग, निविष्टि, प्रक्रियाएँ, अवसंरचना, संस्थान आदि) और गतिविधियों के रूप में परिभाषित किया गया है जो खाद्य के उत्पादन, प्रसंस्करण, वितरण, तैयारी और उपभोग तथा वैश्विक स्तर पर सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय परिणामों सहित इन गतिविधियों के समस्त परिणामों से संबंधित हैं।] में पहले और बाद की उत्पादन गतिविधियों से जुड़े उत्सर्जन को भी इसमें शामिल कर लें तो यह कुल शुद्ध मानवजनित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का 21-37 प्रतिशत है।

भूमि-उपयोग या जलवायु परिवर्तन के कारण भूमि स्थितियों में होने वाला परिवर्तन वैश्विक और क्षेत्रीय जलवायु को प्रभावित करता है। क्षेत्रीय स्तर पर भूमि स्थिति में परिवर्तन तापन/वार्मिंग को कम या अधिक कर सकता है और चरम घटनाओं की तीव्रता, आवृत्ति और अवधि को प्रभावित कर सकता है।

जलवायु परिवर्तन भूमि पर अतिरिक्त दबाव उत्पन्न कर सकता है और आजीविका, जैव विविधता, मानव व पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य, बुनियादी ढाँचे और खाद्य प्रणालियों के समक्ष पहले से विद्यमान जोखिमों को और बढ़ाता है। भविष्य के सभी GHG उत्सर्जन परिदृश्यों में भूमि पर बढ़ते प्रभावों का अनुमान लगाया जाता है। इससे कुछ क्षेत्रों को उच्च जोखिम का सामना करना पड़ेगा जबकि कुछ क्षेत्रों को पूर्वानुमान के इतर जोखिमों का सामना करना पड़ेगा।

जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जोखिम का स्तर तापन के स्तर के साथ ही जनसंख्या, उपभोग, उत्पादन, तकनीकी विकास और भूमि प्रबंधन प्रारूपों के उभार दोनों पर निर्भर करता है।

साझा सामाजिक-आर्थिक मार्ग

(Shared Socioeconomic Pathways /SSPs)

इस रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन शमन, अनुकूलन और भूमि-उपयोग पर भविष्य के सामाजिक-आर्थिक विकास के निहितार्थों का साझा सामाजिक-आर्थिक मार्ग (SSPs) का उपयोग करके पता लगाया गया है। SSPs जलवायु परिवर्तन शमन और अनुकूलन के प्रति विभिन्न चुनौतियों को अपने दायरे में लेता है।

  1. SSP1 में जनसंख्या की शीर्ष वृद्धि और गिरावट (वर्ष 2100 में लगभग 7 बिलियन), उच्च आय और घटती असमानता, प्रभावी भूमि-उपयोग विनियमन, अल्प संसाधन-गहन उपभोग (निम्न-GHG उत्सर्जन प्रणालियों में उत्पादित खाद्य एवं खाद्य अपशिष्ट के निम्न स्तर सहित), मुक्त व्यापार और पर्यावरण के अनुकूल प्रौद्योगिकियाँ और जीवन-शैली आदि शामिल हैं। अन्य मार्गों (Pathways) की तुलना में SSP1 में शमन और अनुकूलन के प्रति निम्न चुनौतियाँ मौजूद हैं।
  2. SSP2 में मध्यम जनसंख्या वृद्धि (वर्ष 2100 में लगभग 9 बिलियन), मध्यम आय; तकनीकी प्रगति, उत्पादन और उपभोग प्रारूप के पिछले रुझानों की निरंतरता तथा असमानता में धीमी कमी शामिल हैं। अन्य मार्गों की तुलना में SSP2 में शमन और अनुकूलन के प्रति मध्यम चुनौतियाँ मौजूद हैं।
  3. SSP3 में उच्च जनसंख्या (वर्ष 2100 में लगभग 13 बिलियन), निम्न आय, निरंतर जारी असमानता, भौतिकता-गहन उपभोग और उत्पादन, व्यापार में बाधाएँ तथा तकनीकी परिवर्तन की धीमी दर शामिल हैं। अन्य मार्गों की तुलना में SSP3 में शमन के प्रति और अनुकूलन के प्रति उच्च चुनौतियाँ मौजूद हैं।
  4. SSP4 में मध्यम जनसंख्या वृद्धि (वर्ष 2100 में लगभग 9 बिलियन), मध्यम आय लेकिन क्षेत्रों के अंदर और क्षेत्रों के बीच व्यापक असमानता शामिल हैं। अन्य मार्गों की तुलना में SSP4 में शमन के प्रति निम्न चुनौतियाँ तथा अनुकूलन के प्रति उच्च चुनौतियाँ मौजूद हैं।
  5. SSP5 में जनसंख्या की शीर्ष वृद्धि और गिरावट (वर्ष 2100 में लगभग 7 बिलियन), उच्च आय तथा कम असमानता एवं मुक्त व्यापार शामिल हैं। इस मार्ग में संसाधन-गहन उत्पादन, उपभोग और जीवन शैली शामिल हैं। अन्य मार्गों की तुलना में SSP5 में शमन के प्रति उच्च चुनौतियाँ और अनुकूलन निम्न चुनौतियाँ मौजूद हैं।

SSPs को प्रतिनिधि एकाग्रता मार्ग RCPs (Representative Concentration Pathways;RCPs) के साथ जोड़ा जा सकता है जो अनुकूलन निहितार्थ के साथ शमन के विभिन्न स्तरों को सूचित करता है। इस प्रकार SSPs विभिन्न SSP-RCP संयोजनों द्वारा अनुमानित वैश्विक औसत सतह तापमान वृद्धि के विभिन्न स्तरों के अनुरूप हो सकते हैं।

B. अनुकूलन और शमन प्रतिक्रिया विकल्प

कई भूमि संबंधी प्रतिक्रियाएँ जो जलवायु परिवर्तन, अनुकूलन और शमन में योगदान करती हैं, वे मरुस्थलीकरण और भूमि निम्नीकरण की रोकथाम के साथ खाद्य सुरक्षा में वृद्धि भी कर सकती हैं। भूमि संबंधी प्रतिक्रियाओं की क्षमता और अनुकूलन एवं शमन पर सापेक्षिक बल देना संदर्भ विशिष्ट है, जिसमें समुदायों और क्षेत्रों की अनुकूलन क्षमता शामिल है। यद्यपि भूमि संबंधी प्रतिक्रिया विकल्प अनुकूलन और शमन में महत्त्वपूर्ण योगदान कर सकते हैं, लेकिन अनुकूलन के मार्ग में कुछ बाधाएँ भी हैं और वैश्विक शमन में उनके योगदान की अपनी सीमाएँ हैं।

अधिकांश आकलित प्रतिक्रिया विकल्प सतत विकास और अन्य सामाजिक लक्ष्यों में सकारात्मक योगदान देते हैं। कई प्रतिक्रिया विकल्प बिना भूमि प्रतिस्पर्द्धा के भी कार्यान्वित किए जा सकते हैं और कई सह-लाभ (Co-benefits) प्रदान करने की क्षमता रखते हैं।

यद्यपि अधिकांश प्रतिक्रिया विकल्प उपलब्ध भूमि के लिये प्रतिस्पर्द्धा किये बिना कार्यान्वित किए जा सकते हैं, कुछ विकल्प भूमि रूपांतरण की मांग में वृद्धि कर सकते हैं। यदि इसे कुल भूमि के सीमित हिस्से पर लागू किया जाता है और सतत प्रबंधित भूदृश्यों में एकीकृत किया जाता है, तो इसके कम प्रतिकूल दुष्प्रभाव होंगे और कुछ सकारात्मक सह-लाभ भी पाए जा सकते हैं।

मरुस्थलीकरण पर रोकथाम की कई गतिविधियाँ शमन सह-लाभों के साथ जलवायु परिवर्तन अनुकूलन में योगदान कर सकती हैं, साथ ही समाज को सतत विकास सह-लाभ प्रदान करते हुए जैव विविधता की हानि को रोक सकती हैं। मरुस्थलीकरण को टालने, उसमें कमी लाने और उसके व्युत्क्रमण से मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, मृदा और बायोमास में कार्बन भंडारण में वृद्धि होगी, जबकि कृषि उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा को लाभ पहुँचेगा। अवशिष्ट जोखिम और दूरनुकूलक (Maladaptive) परिणामों की संभावना के कारण निम्नीकृत भूमि की पुनर्स्थापना के प्रयास से अधिक बेहतर होगा कि मरुस्थलीकरण की रोकथाम की जाए।

सतत वन प्रबंधन सहित सतत भूमि प्रबंधन, भूमि निम्नीकरण की रोकथाम एवं उसमें कमी ला सकता है, यह भूमि उत्पादकता को बनाए रखेगा और कभी-कभी भूमि निम्नीकरण पर जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को उलट भी सकता है। यह शमन तथा अनुकूलन में भी योगदान दे सकता है। निजी खेतों से लेकर समग्र वाटरशेड तक के पैमाने पर भूमि के निम्नीकरण को कम करना और उसे उत्क्रमित (reversing) कर समुदायों को लागत प्रभावी, त्वरित और दीर्घकालिक लाभ प्रदान किया जा सकता है और इसके साथ ही अनुकूलन और शमन के सह-लाभों सहित कई सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को समर्थन देगा। सतत भूमि प्रबंधन के कार्यान्वयन के साथ कुछ स्थितियों में अनुकूलन की सीमितता के पार भी जाया जा सकता है।

उत्पादन से उपभोग तक (खाद्य हानि और अपशिष्ट सहित) समग्र खाद्य प्रणाली में प्रतिक्रिया विकल्पों को कार्यान्वित किया जा सकता है तथा अनुकूलन एवं शमन को बढ़ावा देने के लिये इन्हें आगे बढ़ाया जा सकता है।

भविष्य का भूमि उपयोग अंशतः वांछित जलवायु परिणाम और प्रसारित किये गए प्रतिक्रिया विकल्पों की श्रेणी पर निर्भर करता है। सभी निर्धारित मॉडल मार्ग (Modelled Pathways) जो तापन को 1.5 या 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे तक सीमित करते हैं, भूमि-आधारित शमन एवं भूमि-उपयोग परिवर्तन की आवश्यकता है और उनमें से अधिकांश में पुनः वनरोपण, वनीकरण, निर्वनीकरण में कमी तथा जैव ऊर्जा के विभिन्न संयोजन शामिल किये गए हैं। कुछ ही मॉडल मार्ग भूमि रूपांतरण में कमी के साथ 1.5 डिग्री सेल्सियस का लक्ष्य हासिल करते हैं और इस प्रकार वे मरुस्थलीकरण, भूमि निम्नीकरण एवं खाद्य सुरक्षा संबंधी परिणामों में कमी लाते हैं।

C. प्रतिक्रिया विकल्पों को सक्षम करना

सभी पैमानों पर नीतियों, संस्थानों और शासन प्रणालियों का उपयुक्त डिज़ाइन भूमि-संबंधी अनुकूलन और शमन में योगदान कर सकता है, जबकि साथ ही जलवायु-अनुकूल विकास मार्गों की तलाश को अवसर दे सकता है। पारस्परिक रूप से सहायक जलवायु और भूमि नीतियों में संसाधनों की बचत, सामाजिक लचीलेपन में वृद्धि करने, पारिस्थितिक पुनर्स्थापना का समर्थन करने और विभिन्न हितधारकों के बीच संलग्नता और सहयोग को बढ़ावा देने की क्षमता है।

समग्र खाद्य प्रणाली हेतु प्रवर्तन नीतियाँ, जिनमें वे नीतियाँ भी शामिल हैं जो खाद्य हानि और अपशिष्ट को कम करती हैं और आहार विकल्पों को प्रभावित हैं, अधिक सतत भूमि-उपयोग प्रबंधन, परिष्कृत खाद्य सुरक्षा और निम्न उत्सर्जन प्रक्षेप पथ को सक्षम करती हैं। इस तरह की नीतियाँ जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और शमन में योगदान कर सकती हैं, भूमि निम्नीकरण, मरुस्थलीकरण और गरीबी को कम कर सकती हैं तथा साथ ही सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार ला सकती हैं। बाज़ारों तक पहुँच में सुधार, भू-स्वामित्व की सुरक्षा, खाद्य में पर्यावरणीय लागत को कम करने, पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं के लिये भुगतान और स्थानीय एवं सामुदायिक सामूहिक कार्यवाही की वृद्धि द्वारा सतत भूमि प्रबंधन और निर्धनता उन्मूलन सक्षम किया जा सकता है।

भूमि और खाद्य नीतियों का निर्माण करते समय सह-लाभों और दुविधाओं (Trade-offs) की पहचान कर लेना कार्यान्वयन अवरोधों को दूर कर सकता है। सुदृढ़ बहुस्तरीय, उन्नत और बहुक्षेत्रीय शासन के साथ-साथ पुनरावृत्ती, सुसंगत, अनुकूली और प्रत्यास्थी तरीके से विकसित तथा अपनाई गई नीतियाँ सह-लाभों को अधिकतम जबकि हानि को न्यूनतम कर सकती हैं। चूँकि भूमि प्रबंधन का निर्णय खेत-स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक लिया जाता है और जलवायु एवं भूमि नीतियाँ, दोनों प्रायः कई क्षेत्रों, विभागों और एजेंसियों तक व्याप्त होती हैं।

भूमि-आधारित जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और शमन के लिये नीति साधनों के चयन, मूल्यांकन, कार्यान्वयन और निगरानी में स्थानीय हितधारकों (विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक संवेदनशील मूल निवासी एवं स्थानीय समुदाय, महिलाएँ, गरीब एवं वंचित) की संलग्नता से निर्णयन और शासन की प्रभावशीलता की वृद्धि होती है। विभिन्न क्षेत्रों के बीच और वृहत पैमाने पर एकीकरण सह-लाभों को अधिकतम करने और ट्रेड ऑफ को न्यूनतम करने की संभावना में वृद्धि करता है।

D. निकट अवधि में कार्यवाही

मरुस्थलीकरण, भूमि निम्नीकरण और खाद्य सुरक्षा पर ध्यान देने के लिये मौजूदा ज्ञान के आधार पर निकट अवधि में कार्यवाही की जा सकती है, जबकि जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन तथा इसके शमन के लिये दीर्घावधिक प्रतिक्रियाओं को समर्थन देना होगा। इसके अंतर्गत व्यक्तिगत और संस्थागत क्षमता का निर्माण, ज्ञान हस्तांतरण में तेजी लाना, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और तैनाती में वृद्धि करना, वित्तीय तंत्र को सक्षम करना, पूर्व चेतावनी प्रणाली लागू करना, जोखिम प्रबंधन को लागू करना और कार्यान्वयन व उन्नयन में अंतराल को संबोधित करना आदि प्रक्रियाएं शामिल हैं।

जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और शमन, मरुस्थलीकरण, भूमि निम्नीकरण तथा खाद्य सुरक्षा पर ध्यान देने से निकट अवधि में की जाने वाली कार्यवाही सामाजिक, पारिस्थितिक, आर्थिक एवं विकास के सह-लाभ प्रदान कर सकती है। ये सह-लाभ निर्धनता उन्मूलन और संवेदनशील लोगों के लिये अधिक प्रत्यास्थ आजीविका में योगदान कर सकते हैं।

महत्त्वाकांक्षी शमन मार्गों के अनुसरण से सभी क्षेत्रों में मानवजनित GHG उत्सर्जन में तेजी से कमी भूमि पारिस्थितिकी तंत्र और खाद्य प्रणालियों पर जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों को कम करती है। विभिन्न क्षेत्रों में जलवायु शमन और अनुकूलन प्रतिक्रियाओं में देरी के कारण भूमि पर नकारात्मक प्रभाव बढ़ेगा और सतत विकास की संभावना कम होगी।