महत्त्वपूर्ण रिपोर्ट्स की जिस्ट

सतत् विकास लक्ष्य प्रतिवेदन-2019 | 11 Dec 2019 | शासन व्यवस्था

इस प्रतिवेदन में प्रस्तुत की गई सूचना सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) के लिये वैश्विक संकेतक फ्रेमवर्क 1 में निर्धारित संकेतकों पर उपलब्ध नवीनतम आँकड़ों (मई 2019 तक) पर आधारित है, जिसे एस.डी.जी संकेतकों पर अंतर-एजेंसी और विशेषज्ञ समूह (आई.ए.ई.जी.-एस.डी.जी.) द्वारा विकसित किया गया तथा महासभा द्वारा अंगीकृत किया गया है।

सतत् विकास लक्ष्य 1: गरीबी का हर रूप में हर जगह उन्मूलन

मुख्य बिंदु

सामाजिक संरक्षण की प्रणालियाँ, बच्चों सहित विश्व के सबसे सुभेद्य (कमज़ोर) लोगों तक पहुँचने में अपर्याप्त रही हैं।

जलवायु से संबंधित आपदाओं की संख्या बढ़ रही है, जिससे गरीब देश सबसे अधिक प्रभावित हैं।

सतत् विकास लक्ष्य 2: भुखमरी का अंत, खाद्य सुरक्षा और बेहतर पोषण तथा सतत् कृषि को प्रोत्साहन

विस्तृत प्रगति के बावजूद भूख से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ रही है।

बच्चों में बौनापन (स्टंटिंग) और ऊँचाई के अनुपात में वज़न में कमी (वेस्टिंग) आ रही है, लेकिन एसडीजी लक्ष्यों को पूरा करने के लिये यह गति पर्याप्त नहीं है।

अधिक वज़न का प्रसार, कुपोषण का एक और रूप जो सभी आयु वर्गों में बढ़ रहा है।

लघु-स्तरीय खाद्य उत्पादक, विश्व में भूख की समस्या के समाधान में बड़ा योगदान दे सकते हैं।

खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने विभिन्न देशों को प्रभावित किया है।

सतत् विकास लक्ष्य 3: उत्तम स्वास्थ्य सुनिश्चित करना और प्रत्येक आयु वर्ग के लोगों की खुशहाली को प्रोत्साहन।

वैश्विक लक्ष्य को पूरा करने के लिये मातृ स्वास्थ्य में निरंतर निवेश की ज़रूरत है, विशेष रूप से उप-सहारा अफ्रीका में।

यदि 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर कम करने के लिये निर्धारित एस.डी.जी लक्ष्य पूरा किया जाता है, तो वर्ष 2030 तक 10 मिलियन अतिरिक्त बच्चों की जान बचाई जा सकेगी।

व्यापक टीकाकरण कवरेज के बावजूद खसरा और डिप्थीरिया के प्रकोप से कई मौतें हुई हैं।

मलेरिया की स्थिति में गिरावट की बजाय वृद्धि को देखते हुए, सबसे अधिक प्रभावित देशों में तीव्र प्रयासों की तत्काल आवश्यकता है।

तपेदिक का पता लगाने और उपचार में अंतराल के साथ दवाओं की प्रतिरोधकता में कमी ने बीमारी के विरुद्ध प्रगति को बाधित करने का कार्य किया है।

उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों को धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है, लेकिन गरीब देशों में यह अभी भी एक अभी भी एक संकट बना हुआ है।

पर्यावरणीय स्वास्थ्य में खामियों को बीमारी और मृत्यु के प्रमुख योगदानकर्त्ता के रूप में देखा गया है।

सतत् विकास लक्ष्य 4: समावेशी और समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना तथा सबके लिये आजीवन सीखने के अवसरों को प्रोत्साहन

किसी विषय को पढ़ने और गणित में कम दक्षता दर वैश्विक रूप से सीखने में समस्या का संकेत देती है।

प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को स्कूली शिक्षा के सदर्भ में प्रमुख शुरुआत माना जाता है, लेकिन दुनिया के एक-तिहाई बच्चे इससे अछूते रह जाते हैं।

स्कूली शिक्षा से वंचित बच्चों तक पहुँचने में बाधा उत्पन्न हुई है।

प्रगति के बावजूद 750 मिलियन वयस्क अभी भी एक साधारण कथन को पढ़ और लिख नहीं सकते हैं, इन वयस्कों में से दो-तिहाई महिलाएँ हैं।

सतत् विकास लक्ष्य 5: लैंगिक समानता हासिल करना और सभी महिलाओं एवं लड़कियों को सशक्त करना

महिलाओं और लड़कियों को हानिकारक प्रथाओं का सामना करना पड़ता है जो उनके जीवन को गंभीरतापूर्वक प्रभावित करती हैं।

कई देशों के कानूनी ढाँचे में अंतराल होने से यह महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहा है

वित्तीयन अंतराल लैंगिक समानता पर कानूनों और नीतियों के कार्यान्वयन को सीमित करता है।

सतत् विकास लक्ष्य 6: सबके लिये जल एवं स्वच्छता की उपलब्धता और सतत् प्रबंधन सुनिश्चित करना

प्रगति के बावजूद सुरक्षित तौर पर प्रबंधित पेयजल और स्वच्छता को अरबों लोगों तक पहुँचाने के लिये त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है।

जल तनाव (वाटर स्ट्रेस) ने हर महाद्वीप पर लोगों को प्रभावित किया है, इसके लिये तत्काल और सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता है।

कई देश अपने जल संसाधनों के एकीकृत प्रबंधन को उन्नत कर रहे हैं, लेकिन अधिक द्रुतगति से प्रगति की आवश्यकता है।

सतत् विकास लक्ष्य 7 : सस्ती, विश्वसनीय, सतत् और आधुनिक ऊर्जा सुलभता सुनिश्चित करना

10 में से लगभग 9 लोगों की पहुँच अब विद्युत तक है, लेकिन इससे वंचित लोगों तक पहुँचने के लिये और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता होगी।

तीन अरब लोग अभी भी खाना पकाने के स्वच्छ ईंधन और प्रौद्योगिकियों से वंचित हैं, जिससे मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिये गंभीर खतरे की स्थिति उत्पन्न होती है।

एक महत्त्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को पूरा करने के लिये विद्युत क्षेत्र में प्रगति को परिवहन और परितप्तता तक विस्तारित होना चाहिये।

ऊर्जा दक्षता में सुधार जारी है लेकिन एस.डी.जी. लक्ष्य तक पहुँचने के लिये ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।

सतत् विकास लक्ष्य 8: निरंतर, समावेशी औऱ सतत् आर्थिक वृद्धि, सबके लिये पूर्ण और उत्पादक रोज़गार एवं उत्कृष्ट कार्य

अल्प विकसित देशों में आर्थिक संवृद्धि फिर से उन्नति पर है, लेकिन 7 प्रतिशत का लक्ष्य अभी भी पहुँच से बाहर है।

श्रम उत्पादकता बढ़ रही है, हालाँकि क्षेत्रों के बीच व्याप्त व्यापक असमानताएँ देखी जा सकती हैं।

महिलाओं और पुरुषों के बीच वेतन अंतराल की निरंतरता लैंगिक असमानता की स्पष्ट अनुभूति कराता है।

वैश्विक बेरोज़गारी दर लगातार गिर रही है, लेकिन कुछ क्षेत्रों और युवाओं में यह उच्च बनी हुई है

सतत् विकास लक्ष्य 9: मज़बूत बुनियादी सुविधाओं का निर्माण, समावेशी और सतत् औद्योगीकरण को प्रोत्साहन तथा नवाचार को संरक्षण

हालिया प्रगति के बावजूद 2030 के लक्ष्य को पूरा करने के लिये अल्प विकसित देशों में औद्योगीकरण की रफ्तार अभी भी बहुत धीमी है।

अति गरीब देशों के लघु उद्योगों (छोटे पैमाने की औद्योगिक इकाइयाँ) में उन वित्तीय सेवाओं का अभाव होता है जिनकी उन्हें विकास और नवाचार के लिये आवश्यकता होती है।

विभिन्न राष्ट्रों के बीच व्यापक असमानताओं के साथ, अनुसंधान और विकास पर वैश्विक खर्च प्रति वर्ष 2 ट्रिलियन डॉलर पहुँच गया है।

सतत् विकास लक्ष्य 10: विभिन्न देशों की आंतरिक व उनके बीच असमानताएँ कम करना

देश के भीतर समृद्धि के संवितरण पर उपलब्ध आँकड़ों ने मिश्रित प्रगति दिखाई है।

अमीर और गरीब देश समान रूप से समानता और समावेशिता को बढ़ावा देने वाली नीतियों से लाभान्वित हो सकते हैं।

निम्न-आय वाले देशों को तरजीही व्यापार दर्जे (प्रेफरेंशियल ट्रेड स्टेटस) का लाभ मिलता है।

सुव्यवस्थित, सुरक्षित, नियमित और ज़िम्मेदार प्रवासन को सुगम बनाने की नीतियाँ व्यापक तो हैं, लेकिन ये सार्वभौमिकता से बहुत दूर हैं।

सतत् विकास लक्ष्य 11: शहरों और मानव बस्तियों को समावेशी सुरक्षित, लचीला और संवहनीय बनाना

तीव्र शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि पर्याप्त एवं किफायती आवास के निर्माण को आगे बढ़ा रहे हैं।

सार्वजनिक परिवहन की सुलभता में वृद्धि हो रही है, लेकिन विकासशील क्षेत्रों में तीव्रतर प्रगति की आवश्यकता है।

म्यूनिसिपल वेस्ट बढ़ रहा है, जो कि शहरी बुनियादी ढाँचे में निवेश की बढ़ती आवश्यकता को उजागर कर रहा है।

कई शहरों में वायु प्रदूषण एक अपरिहार्य स्वास्थ्य खतरा बन गया है।

सतत् विकास लक्ष्य 12: संवहनीय उपभोग और उत्पादन के पैटर्न को सुनिश्चित करना।

मैटेरियल फुटप्रिंट्स (भौतिक पदछाप) को कम करना एक वैश्विक अनिवार्यता है।

धनी देशों में लोगों की जीवनशैली गरीब देशों से निकाले गए संसाधनों पर अत्यधिक निर्भर है।

सतत् उपभोग और उत्पादन में वृद्धि सभी एस.डी.जी लक्ष्यों में प्रगति करती है।

सतत् विकास लक्ष्य 13: जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभावों का सामना करने के लिये तत्काल कार्रवाई करना ।

जलवायु परिवर्तन के बुरे प्रभावों से बचने के लिये समाज के सभी स्तरों पर अभूतपूर्व परिवर्तन की आवश्यकता होगी।

देश बढ़ते जलवायु खतरों को देखते हुए आपदा जोखिम न्यूनीकरण की रणनीतियाँ विकसित कर रहे हैं।

जलवायु से संबंधित वित्तीय प्रवाह में वृद्धि हुई है लेकिन यह वृद्धि समस्या के पैमाने को देखते हुए अपर्याप्त है और अभी भी जीवाश्म ईंधन में निवेश से प्रभावित है।

ज़्यादातर देश जलवायु परिवर्तन के अनुकूल अपनी क्षमता और प्रतिरोधकता को बढ़ाने की योजनाएँ बना रहे हैं।

सतत् विकास लक्ष्य 14: सतत् विकास हेतु महासागरों, सागरों और समुद्री संसाधनों का संवहनीय एवं संरक्षित उपयोग

भू आधारित प्रदूषक और समुद्री मलबा तटीय आवासों के लिये हानिकारक हैं लेकिन पानी की गुणवत्ता में सुधार संभव है।

बढ़ते अम्लीकरण से समुद्री जीवन को क्षति पहुँच रही है जिससे जलवायु परिवर्तन को संतुलित करने की महासागर की भूमिका में बाधा उत्पन्न हो रही है।

वर्ष 2010 के बाद से समुद्री संरक्षित क्षेत्रों की सीमा दोगुनी हो गई है लेकिन प्रमुख जैव विविधता क्षेत्रों की सुरक्षा के लिये और अधिक प्रयास किये जाने की आवश्यकता है।

मत्स्य भंडार में गिरावट स्थिर होती प्रतीत हो रही है, अब उन्हें फिर से स्थापित करने कि आवश्यकता है, विशेष तौर पर गंभीर रूप से क्षीण हुए क्षेत्रों में।

सतत् विकास लक्ष्य 15: सतत‍् उपयोग को बढ़ावा देने वाले स्थलीय पारिस्थितिकीय प्रणालियों, सुरक्षित जंगलों, भूमि क्षरण और जैव विविधता के बढ़ते नुकसान को रोकने का प्रयास करना।

जैव विविधता की हानि का तीव्र स्तर एक आपातकालीन प्रतिक्रिया की मांग करता है।

क्षय से पृथ्वी पर भूमि के कुल क्षेत्र का पाँचवाँ भाग और एक अरब लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।

लक्ष्य 2030 को पूरा करने के लिये प्रमुख जैव विविधता क्षेत्रों के संरक्षण की प्रगति को त्वरित करना चाहिये।

पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र आवश्यक पर्यावरणीय सेवाएँ प्रदान करते हैं, लेकिन इनकी स्थिति विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक रूप से भिन्न-भिन्न होती है।

वन क्षेत्र अभी भी घट रहा है, किंतु इसके घटने की दर धीमी है।

अंतर्राष्ट्रीय समझौते जैव विविधता संरक्षण के लिये नवीन दृष्टिकोण विकसित कर रहे हैं।

सतत् विकास लक्ष्य 16: सतत् विकास के लिये शांतिपूर्ण एवं समावेशी समाजों को प्रोत्साहन, सभी के लिये न्याय सुलभ कराना और प्रत्येक स्तर पर प्रभावी, जवाबदेह और समावेशी संस्थाओं की रचना करना।

समग्र रूप से युवा पुरुषों में हत्या का खतरा अधिक होता है, जबकि करीबी साथी द्वारा नर हत्या की सबसे अधिक शिकार महिलाएँ होती हैं।

मानव तस्करी से पीड़ित लोगों को अधिकतर यौन शोषण और ज़बरन श्रम में लगाया जाता है।

जन्म पंजीकरण एक मानव अधिकार है, फिर भी दुनिया भर में अंडर-5 आयु समूह के तीन-चौथाई से कम बच्चे पंजीकृत हैं।

मानवाधिकार रक्षकों, पत्रकारों और व्यापार संघियों की हत्या की दर बढ़ रही है।

सतत् विकास लक्ष्य 17: क्रियान्वयन के साधनों को सुदृढ़ करना और सतत् विकास के लिये वैश्विक साझेदारी को नई शक्ति प्रदान करना

विकास के वित्तपोषण को बढ़ावा देने के लिये संकल्प के बावजूद अनुदान में गिरावट हो रही है।

सतत‍् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये कराधान सहित घरेलू संसाधनों का प्रभावी उपयोग महत्त्वपूर्ण है।

विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार तनाव वैश्विक भर में उत्पादकों और उपभोक्ताओं को प्रभावित कर रहा है।

दुनिया की आधी से अधिक आबादी ऑनलाइन सेवाओं की उपयोगकर्त्ता है, अब हमें पूरा ध्यान शेष आधी आबादी को निर्देशित करने पर देना चाहिये।

आँकड़ों के लिये वित्तीय सहायता बढ़ी है, लेकिन एसडीजी द्वारा बनाई गई मांग को पूरा करने के लिये अभी भी पर्याप्त नहीं है।