दिल्ली पुलिस ने ‘ऑपरेशन शास्त्र’ शुरू किया | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 10 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
दिल्ली पुलिस ने ‘ऑपरेशन शास्त्र’ शुरू किया है, जो सोशल मीडिया पर बंदूकों और हथियारों के बढ़ते महिमामंडन तथा प्रदर्शन को निशाना बनाने वाला एक बड़ा अभियान है। इसका उद्देश्य गन कल्चर/हथियार संस्कृति पर रोक लगाना और सार्वजनिक सुरक्षा को मज़बूत करना है।
मुख्य बिंदु:
- उद्देश्य: यह अभियान ऑनलाइन हथियारों और हिंसक चित्रों को सामान्य बनाने तथा उनका महिमामंडन करने से रोकने पर केंद्रित है, जिनके बारे में पुलिस का मानना है कि वे युवाओं को प्रभावित कर सकते हैं तथा असुरक्षित व्यवहार को बढ़ावा दे सकते हैं।
- कार्यान्वयन एजेंसियाँ: यह पहल दिल्ली पुलिस के नेतृत्व में पुलिस आयुक्त के निर्देशों के तहत तथा साइबर इकाइयों और फील्ड टीमों के समन्वित सहयोग से चलाई जा रही है।
- ऑपरेशन शास्त्र के तहत अधिकारियों ने हज़ारों सोशल मीडिया खातों और शॉर्ट-फॉर्म वीडियो की निगरानी की, जहाँ लोग प्रभाव जमाने या रोमांच के लिये बंदूकें, चाकू या अन्य हथियारों का प्रदर्शन करते दिखाई दिये।
- तकनीकी दृष्टिकोण: इस अभियान में सोशल प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री की डिजिटल स्कैनिंग और व्यावहारिक विश्लेषण को शामिल किया गया, ताकि हथियारों के महिमामंडन को बढ़ावा देने वाली आपत्तिजनक पोस्टों की पहचान की जा सके।
- महत्त्व: ऑपरेशन शास्त्र सार्वजनिक सुरक्षा के लिये उभरते खतरों से निपटने हेतु ऑनलाइन निगरानी और स्थानीय कार्रवाई को जोड़ने वाला आधुनिक पुलिसिंग दृष्टिकोण दर्शाता है।
- यह अभियान समुदायों को जागरूक करने तथा युवाओं को हथियारों और हिंसा को ग्लैमराइज़ करने वाली सामग्री बनाने या साझा करने से हतोत्साहित करने का भी प्रयास करता है।
गोवा बना बर्ड एटलस प्रकाशित करने वाला दूसरा भारतीय राज्य | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 10 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
गोवा पक्षियों के दस्तावेज़ीकरण और जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अपना व्यापक राज्य-स्तरीय बर्ड एटलस प्रकाशित करने वाला भारत का दूसरा राज्य बन गया है।
मुख्य बिंदु:
- राज्य: गोवा में ‘बर्ड एटलस ऑफ गोवा’ जारी किया गया, जिससे यह ऐसा करने वाला भारत का दूसरा राज्य बन गया।
- केरल राज्य-स्तरीय बर्ड एटलस प्रकाशित करने वाला पहला भारतीय राज्य था।
- लॉन्च: इस एटलस का विमोचन गोवा के नौवें बर्ड फेस्टिवल के दौरान किया गया, जो जैव विविधता के प्रति जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी पर राज्य के ज़ोर को दर्शाता है।
- उद्देश्य: यह बर्ड एटलस गोवा में पक्षी प्रजातियों और उनके वितरण का व्यवस्थित तथा स्थानिक मानचित्रण प्रदान करता है।
- इससे दीर्घकालिक पारिस्थितिक निगरानी, वैज्ञानिक अनुसंधान और संरक्षण योजना को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
- कार्यप्रणाली: यह एटलस नागरिक विज्ञान (सिटिजन साइंस) के सहयोग से तैयार किया गया, जिसमें पक्षी विज्ञानी, शोधकर्त्ता, पक्षी प्रेमी तथा स्वयंसेवकों ने फील्ड अवलोकन और डेटा प्रदान किया।
- महत्त्व:
- यह राज्य स्तर पर पक्षी जैव विविधता से संबंधित आँकड़ों की कमी को पूरा करता है।
- यह नीति निर्माताओं और संरक्षणकर्त्ताओं को आवास संरक्षण तथा प्रजाति प्रबंधन के लिये सूचित रणनीतियाँ बनाने में सहायता करेगा।
- यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण में जनभागीदारी को बढ़ावा देती है।
VOC पोर्ट एंटी-ड्रोन सुरक्षा तैनात करने वाला भारत का पहला पोर्ट बना | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 10 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
चिदंबरनार पोर्ट प्राधिकरण (VOC पोर्ट) भारत का पहला बंदरगाह बन गया है जिसने उन्नत एंटी-ड्रोन सुरक्षा प्रणाली की तैनाती शुरू की है।
मुख्य बिंदु:
- प्रणाली: एंटी-ड्रोन सुरक्षा प्रणाली में रडार, रेडियो फ्रीक्वेंसी डिटेक्शन और ऑप्टिकल ट्रैकिंग तकनीकों का समेकन किया गया है, ताकि बंदरगाह क्षेत्र के आसपास अनधिकृत ड्रोन गतिविधियों का पता लगाया जा सके, उनकी निगरानी की जा सके तथा उन पर प्रतिक्रिया दी जा सके।
- यह कदम तमिलनाडु में चिदंबरनार पोर्ट प्राधिकरण (VOC पोर्ट) द्वारा लागू किया गया है।
- उद्देश्य: इस प्रणाली का लक्ष्य समुद्री अवसंरचना की सुरक्षा को सुदृढ़ करना, महत्त्वपूर्ण परिसंपत्तियों की रक्षा करना और प्रमुख परिचालन क्षेत्रों में मानव-रहित हवाई प्रणालियों से उत्पन्न संभावित खतरों को रोकना है।
- यह पहल बंदरगाह सुरक्षा उपायों में एक महत्त्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करती है और व्यापार मार्गों तथा समुद्री प्रतिष्ठानों को उभरते तकनीकी खतरों से सुरक्षित रखने की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
- सुरक्षा चिंता: विश्व स्तर पर वाणिज्यिक ड्रोन के बढ़ते उपयोग ने सुरक्षा एजेंसियों को जासूसी, तस्करी या संवेदनशील अवसंरचना के पास आकस्मिक हवाई क्षेत्र उल्लंघन से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिये काउंटर-ड्रोन प्रणालियाँ अपनाने हेतु प्रेरित किया है।
कोटक बना पूरी तरह से डिजिटल FPI रजिस्ट्रेशन शुरू करने वाला भारत का पहला बैंक | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 10 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
कोटक महिंद्रा बैंक भारत का पहला कस्टोडियन बन गया है जिसने इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरों के माध्यम से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) के पंजीकरण और खाता खोलने की पूरी प्रक्रिया को सुगम बनाया है, जो पूंजी बाज़ार तक डिजिटल पहुँच में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
मुख्य बिंदु:
- संस्था: इस उपलब्धि की घोषणा कोटक महिंद्रा बैंक ने की।
- भारत के प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंकों में से एक, जब इसकी कस्टडी शाखा ने FPI के लिये पूरी तरह से डिजिटल ऑनबोर्डिंग सक्षम की।
- नवाचार: यह भारत में पहली बार है जब किसी FPI लाइसेंस और उससे जुड़े ग्राहक खाता खोलने से संबंधित दस्तावेज़ पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरों (eSign) के माध्यम से निष्पादित किये गए हैं, बिना भौतिक ‘वेट सिग्नेचर’ की आवश्यकता के।
- यह कदम जनवरी 2026 में SEBI द्वारा शुरू किये गए एकीकृत डिजिटल वर्कफ्लो के बाद उठाया गया है, जो FPI पंजीकरण के लिये कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म (CAF) पोर्टल में डिजिटल हस्ताक्षरों के उपयोग की अनुमति देता है।
- उद्देश्य: इस पहल का उद्देश्य विदेशी निवेशकों के लिये भारतीय बाज़ार में प्रवेश की प्रक्रिया को सरल एवं तीव्र बनाना है, ताकि कागज़ी कार्यवाही कम हो, परिचालन जोखिम घटें और ऑनबोर्डिंग अनुभव का आधुनिकीकरण हो सके।
- लाभ: कागज़-रहित ऑनबोर्डिंग से वैश्विक निवेशकों के लिये समय और लॉजिस्टिक बोझ में उल्लेखनीय कमी आती है।
- यह ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा देता है और भारत में अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने की आकांक्षा को समर्थन देता है।
- यह पूंजी बाज़ारों के लिये भारत की डिजिटल अवसंरचना को मज़बूत करता है।
- महत्त्व: यह विकास वित्तीय बाज़ारों में डिजिटल रूपांतरण की दिशा में भारत की प्रगति को दर्शाता है और निवेशक पंजीकरण तथा अनुपालन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने हेतु SEBI के व्यापक सुधारों के अनुरूप है।
वॉलमार्ट $1 ट्रिलियन मार्केट वैल्यू तक पहुँचने वाला पहला रिटेलर बना | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 10 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
वॉलमार्ट ने 1 ट्रिलियन डॉलर के बाज़ार मूल्यांकन को पार कर एक ऐतिहासिक वित्तीय उपलब्धि हासिल की है और इस तरह वह प्रमुख वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के वर्चस्व वाले ‘ट्रिलियन-डॉलर क्लब’ में शामिल होने वाली पहली पारंपरिक रिटेल कंपनी बन गई है।
मुख्य बिंदु:
- वॉलमार्ट: यह अमेरिका स्थित एक बहुराष्ट्रीय खुदरा निगम है, जो हाइपरमार्केट, डिस्काउंट डिपार्टमेंट स्टोर्स और किराना आउटलेट्स की अपनी व्यापक शृंखला के लिये जाना जाता है।
- ऐतिहासिक उपलब्धि: वॉलमार्ट का बाज़ार पूंजीकरण पहली बार 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया।
- जिससे वह एनवीडिया, अल्फाबेट (गूगल की मूल कंपनी) और अन्य तकनीकी दिग्गजों जैसी शीर्ष कंपनियों की श्रेणी में शामिल हो गया।
- वृद्धि के कारक:
- इसके ऑनलाइन मार्केटप्लेस और ई-कॉमर्स सेवाओं का विस्तार।
- संचालन में एकीकृत डिजिटल और AIआधारित क्षमताओं से मिला बढ़ावा।
- वॉलमार्ट+ जैसी सब्सक्रिप्शन सेवाओं और तीव्र डिलीवरी विकल्पों को सुदृढ़ करना।
- वॉलमार्ट के विज्ञापन व्यवसाय में वृद्धि और आपूर्ति-शृंखला नवाचार।
- महत्त्व:
- यह खुदरा उद्योग की गतिशीलता में बदलाव को दर्शाता है, जहाँ एक पारंपरिक रिटेलर ने आमतौर पर तकनीक और डिजिटल-केंद्रित कंपनियों के पास रहने वाले स्थान में प्रवेश किया है।
- यह वॉलमार्ट की ओम्नी-चैनल रणनीति और प्रतिस्पर्द्धी परिदृश्य में नवाचार करने की उसकी क्षमता में निवेशकों के विश्वास का संकेत देता है।
केरल में भारत का पहला ‘एल्डरली बजट’ | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 10 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
29 जनवरी 2026 को वित्त मंत्री के. एन. बालगोपाल द्वारा प्रस्तुत केरल राज्य बजट 2026–27 में, वरिष्ठ नागरिकों की आवश्यकताओं को संबोधित करने के लिये मुख्य बजट के साथ एक विशेष ‘एल्डरली बजट’ दस्तावेज़ पेश करने वाला केरल भारत का पहला राज्य बन गया।
मुख्य बिंदु:
- एल्डरली बजट के प्रमुख स्तंभ: राज्य ने वृद्ध आबादी में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव से निपटने के लिये विशेष निधियाँ और नीतिगत ढाँचे निर्धारित किये हैं:
- वित्तीय सुरक्षा: सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बढ़ाकर ₹2,000 प्रति माह किया गया है, जिससे 60 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा।
- सामाजिक सुरक्षा और कल्याण कोष पेंशन के लिये कुल आवंटन ₹14,500 करोड़ रखा गया है।
- स्वास्थ्य एवं जेरियाट्रिक देखभाल:
- मेनोपॉज़ क्लिनिक: ज़िला अस्पतालों में ₹3 करोड़ के प्रारंभिक व्यय के साथ स्थापित किये गए हैं।
- ‘मिसिंग मिडल’ के लिये बीमा: गरीबी रेखा से ऊपर लेकिन मौजूदा योजनाओं के दायरे से बाहर परिवारों को लक्षित करने वाली स्वास्थ्य बीमा योजना हेतु ₹50 करोड़ का आवंटन।
- पैलियेटिव केयर: सामुदायिक-आधारित पैलियेटिव केयर नेटवर्क के लिये बढ़ी हुई फंडिंग, जो केरल के स्वास्थ्य मॉडल की पहचान है।
- आवास एवं अवसंरचना:
- रिटायरमेंट होम: निजी और सहकारी क्षेत्रों द्वारा आधुनिक रिटायरमेंट होम के निर्माण को सब्सिडी देने के लिये ₹30 करोड़ का आवंटन।
- वृद्ध-अनुकूल शहर: स्थानीय निकायों को पार्कों और पैदल पथों सहित ‘एज-फ्रेंडली’ सार्वजनिक अवसंरचना विकसित करने हेतु विशेष अनुदान।
- केयर इकोनॉमी:
- ऑन-कॉल स्वयंसेवक सेवाएँ: अकेले रहने वाले बुज़ुर्गों को दैनिक कामों और चिकित्सकीय यात्राओं में सहायता देने के लिये डिजिटल प्लेटफॉर्म तथा स्वयंसेवकों के समूह के विकास हेतु ₹10 करोड़।
- वायोमित्रम योजना: सभी नगरपालिकाओं एवं पंचायत वार्डों तक विस्तार, ताकि घर-घर निशुल्क दवाएँ और जाँच उपलब्ध कराई जा सकें।
- महत्त्व: केरल में बुज़ुर्ग आबादी भारत में सबसे अधिक है, जिससे स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और देखभाल प्रणालियों पर दबाव बढ़ता है।
- एल्डरली बजट जनसांख्यिकीय वास्तविकता के प्रति एक सक्रिय नीतिगत प्रतिक्रिया का प्रतिनिधित्व करता है, न कि केवल प्रतिक्रियात्मक कल्याण व्यय का।
एयरबस-GSV सेंटर ऑफ एक्सीलेंस | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 10 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
वैश्विक एयरोस्पेस अग्रणी एयरबस ने गुजरात के वडोदरा स्थित गति शक्ति विश्वविद्यालय (GSV) में एक अत्याधुनिक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (CoE) का उद्घाटन किया।
मुख्य बिंदु:
- सहयोग: एयरबस और GSV के बीच यह सहयोग भारत के एयरोस्पेस अनुसंधान इकोसिस्टम को मज़बूत करने का लक्ष्य रखता है, विशेष रूप से सतत विमानन प्रौद्योगिकियों में तथा इस क्षेत्र में उद्योग–शिक्षा सहभागिता को और गहरा करने का उद्देश्य रखता है।
- CoE के उद्देश्य: विमानन क्षेत्र के डी-कार्बोनाइज़ेशन पर केंद्रित अनुसंधान, जिसमें सतत विमानन ईंधन (SAF) और हाइड्रोजन-आधारित प्रणोदन प्रणालियाँ शामिल हैं।
- कौशल विकास: भारतीय एयरोस्पेस इकोसिस्टम के लिये एक विशेषीकृत कार्यबल तैयार करना, विशेष रूप से विमानन संचालन, रखरखाव और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों को लक्षित करते हुए।
- अनुसंधान एवं नवाचार: वास्तविक विश्व की एयरोस्पेस चुनौतियों के समाधान हेतु उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोगात्मक परियोजनाओं को आगे बढ़ाना।
- गति शक्ति विश्वविद्यालय (GSV): भारत सरकार के रेल मंत्रालय के अंतर्गत स्थापित एक केंद्रीय विश्वविद्यालय।
- स्थान: वडोदरा में स्थित यह विश्वविद्यालय पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के लिये प्रमुख शैक्षणिक प्रेरक के रूप में कार्य करता है।
- महत्त्व: यह CoE वडोदरा में स्थित C-295 विमान निर्माण सुविधा (टाटा-एयरबस सहयोग) को पूरक बनाता है और घरेलू आपूर्ति शृंखला को सुदृढ़ करता है।