विपणन विकास सहायता योजना | उत्तर प्रदेश | 31 Dec 2025
चर्चा में क्यों?
उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025–30 के अंतर्गत सेवा निर्यातकों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से अपनी तरह की पहली विपणन विकास सहायता (MDA) योजना का शुभारंभ किया है।
- उत्तर प्रदेश इस प्रकार की नीति लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है।
मुख्य बिंदु
- उद्देश्य:
- राज्य के सेवा निर्यातकों की विपणन क्षमता तथा वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता को सुदृढ़ कर सेवा निर्यात को प्रोत्साहन प्रदान करना।
- लक्षित लाभार्थी:
- उत्तर प्रदेश निर्यात संवर्द्धन ब्यूरो (UPEPB) में पंजीकृत सेवा निर्यातक।
- उत्तर प्रदेश निर्यात संवर्द्धन परिषद में पंजीकृत इकाइयाँ।
- भारत सरकार द्वारा चिह्नित 12 प्रमुख सेवा क्षेत्रों के अंतर्गत सेवाओं का निर्यात करने वाले सेवा प्रदाता।
- वित्तीय सहायता प्रावधान:
- विदेशों में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों एवं प्रदर्शनियों में सहभागिता हेतु स्टॉल किराए की लागत का 75% तक (अधिकतम 2 लाख रुपये)।
- एक प्रतिभागी के लिये इकोनॉमी क्लास हवाई यात्रा व्यय का 75% तक (अधिकतम 1 लाख रुपये)।
- भारत में आयोजित कार्यक्रमों के लिये सहायता:
- स्टॉल किराया: अधिकतम 50,000 रुपये
- यात्रा व्यय: अधिकतम 25,000 रुपये
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों के आयोजकों को कुल लागत का 75% तक (निर्धारित अधिकतम सीमा के अधीन) वित्तीय सहायता।
- आर्थिक महत्त्व:
- इस योजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के सेवा क्षेत्र की अंतर्राष्ट्रीय उपस्थिति का विस्तार, रोज़गार सृजन, निवेश आकर्षण तथा राज्य के निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना है।
के-4 बैलिस्टिक मिसाइल | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 31 Dec 2025
चर्चा में क्यों?
भारत ने परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियों से 3,500 किलोमीटर प्रति घंटे की मारक क्षमता वाली के-4 मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया।
मुख्य बिंदु
- प्रक्षेपण मंच: यह प्रक्षेपण भारतीय नौसेना की परमाणु ऊर्जा से संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) INS अरिघाट से बंगाल की खाड़ी में किया गया।
- सामरिक महत्त्व: यह परीक्षण भारत की समुद्र-आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करता है तथा देश की परमाणु त्रय (Nuclear Triad)- भूमि, वायु और समुद्र से परमाणु हथियारों की तैनाती की क्षमता, को मज़बूती प्रदान करता है।
- द्वितीय-हमला क्षमता: के-4 मिसाइल का यह सफल परीक्षण भारत की द्वितीय-हमला क्षमता को सशक्त बनाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि किसी भी प्रारंभिक परमाणु हमले के पश्चात भी भारत प्रभावी एवं निर्णायक प्रत्युत्तर देने में सक्षम रहेगा।
- DRDO की भूमिका: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित के-4 मिसाइल ठोस ईंधन तकनीक एवं उन्नत नेविगेशन प्रणालियों से युक्त है, जो इसकी विश्वसनीयता तथा सटीकता को बढ़ाती है।
- बैलिस्टिक मिसाइलों की विशेषताएँ:
- बैलिस्टिक मिसाइलें रॉकेट द्वारा संचालित हथियार प्रणालियाँ होती हैं, जो प्रक्षेपण के बाद मुख्यतः मुक्त-पतन पथ का अनुसरण करती हैं। ये पारंपरिक या परमाणु युद्धक ले जाने में सक्षम होती हैं और इन्हें भूमि, समुद्र या वायु से प्रक्षेपित किया जा सकता है।
- मारक क्षमता के आधार पर वर्गीकरण:
- छोटी दूरी की मिसाइलें: 1,000 किमी से कम
- मध्यम दूरी की मिसाइलें: 1,000–3,000 किमी
- मध्यवर्ती दूरी की मिसाइलें: 3,000–5,500 किमी
- लंबी दूरी/अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBM): 5,500 किमी से अधिक
- अग्नि-V:
- अग्नि-V भारत की सबसे लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जो 5,000 किलोमीटर से अधिक की मारक क्षमता वाली एक ICBM मिसाइल है।
भारत टैक्सी पहल | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 31 Dec 2025
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने ‘भारत टैक्सी’ नामक अपनी तरह की पहली ड्राइवर-स्वामित्व वाली सहकारी राइड-हेलिंग पहल का शुभारंभ किया है, जिसका उद्देश्य निजी टैक्सी एग्रीगेटरों के विकल्प के रूप में निष्पक्ष, पारदर्शी और न्यायसंगत परिवहन सेवा उपलब्ध कराना है।
मुख्य बिंदु
- भारत टैक्सी: यह सरकार समर्थित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जिसे एक सहकारी मॉडल के रूप में विकसित किया गया है, जहाँ ड्राइवर पारंपरिक निजी कंपनियों पर निर्भर रहने के बजाय शेयरधारक और सह-मालिक होते हैं।
- उद्देश्य: इस योजना का उद्देश्य टैक्सी चालकों को उचित आय सुनिश्चित करके सशक्त बनाना, निजी एग्रीगेटरों (जैसे ओला और उबर) पर निर्भरता कम करना तथा यात्रियों को किफायती, पारदर्शी परिवहन सेवाएँ प्रदान करना है।
- सहकारी संरचना: यह सेवा सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा संचालित की जाती है।
- लॉन्च: यह सेवा 1 जनवरी, 2026 से पूरे देश में शुरू होने वाली है।
- ड्राइवर के लिये लाभ: ड्राइवर के स्वामित्व वाला मॉडल, कोई कमीशन नहीं और लाभ साझाकरण।
- यात्रियों के लिये लाभ: पारदर्शी मूल्य निर्धारण, किफायती यात्राएँ और अनेक वाहन विकल्प।
उत्तराखंड को खनन क्षेत्र में सुधार के लिये प्रोत्साहन | उत्तराखंड | 31 Dec 2025
चर्चा में क्यों?
केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिये खनन क्षेत्र में सुधारों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु 200 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन राशि को स्वीकृति दी।
मुख्य बिंदु
- राष्ट्रीय रैंकिंग: खनन सुधारों में उत्तराखंड ने राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त किया।
- योजना: यह राशि “राज्यों को पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता (SASCI)” योजना के अंतर्गत आवंटित की गई है।
- सुधार उपाय: खनन सुधारों का कार्यान्वयन
- खनिज आवंटन के लिये ई-नीलामी प्रणाली।
- खानों की उपग्रह और डिजिटल निगरानी।
- पारदर्शी लाइसेंसिंग और अनुपालन तंत्र।
- अवैध खनन पर अंकुश लगाने के उपाय।
- राजस्व पर प्रभाव: इन सुधारों के परिणामस्वरूप राज्य में खनन राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे राज्य अर्थव्यवस्था में इसका योगदान बढ़ा है।
- प्रमुख खनिज: उत्तराखंड में पाए जाने वाले प्रमुख खनिजों में चूना पत्थर, मैग्नेसाइट, जिप्सम, ताँबा, ग्रेफाइट, सोपस्टोन (स्टीटाइट) तथा डोलोमाइट शामिल हैं।
बोर्ड परीक्षा-विजय अभियान | झारखंड | 31 Dec 2025
चर्चा में क्यों?
झारखंड के गुमला ज़िला प्रशासन ने विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन और बोर्ड परीक्षा परिणामों में सुधार लाने हेतु 'बोर्ड परीक्षा-विजय अभियान' की शुरुआत की है।
मुख्य बिंदु
- उद्देश्य: झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) की कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाओं में सम्मिलित होने वाले विद्यार्थियों के अधिगम परिणामों तथा परीक्षा प्रदर्शन में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित करना।
- विशेष फोकस: ऐसे विद्यालय, जिनका शैक्षणिक प्रदर्शन ऐतिहासिक रूप से अपेक्षाकृत कमज़ोर रहा है, उन्हें इस पहल के अंतर्गत प्राथमिकता दी जाएगी।
- अभियान के अंतर्गत प्रमुख गतिविधियाँ: लक्षित विशेष कोचिंग सत्रों का आयोजन, मेंटोरशिप कार्यक्रमों का संचालन तथा विद्यार्थियों की प्रगति के लिये प्रदर्शन-आधारित ट्रैकिंग तंत्र की व्यवस्था।
- JAC की स्थापना वर्ष 2003 में की गई थी।
- गुमला ज़िला:
- गठन: 18 मई, 1983
- संभाग: दक्षिण छोटानागपुर संभाग
- नदियाँ: दक्षिण कोयल, शंख तथा उत्तर कोयल
- खनिज: बॉक्साइट, लेटराइट, चाइना क्ले